चतरा : लेवी नहीं मिली तो नक्सलियों ने फूंके दस करोड़ के वाहन, पुल निर्माण में लगे मजदूरों को भी पीटा

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 04/20/2018 - 12:14

Chatra : जिले के घोर नक्सल प्रभावित प्रतापपुर थाना क्षेत्र के लिपदा गांव में हथियारबंद नक्सलियों ने देर रात जमकर तांडव मचाया है. नक्सलियों ने लिपदा नदी पर पुल निर्माण कार्य में लगे आधा दर्जन वाहनों को फूंक दिया है. रात करीब बारह बजे हथियार से लैश नकाबपोश एक दर्जन नक्सलियों ने घटना को अंजाम दिया है. नक्सलियों ने निर्माण कार्य मे लगे हाइड्रा, पोकलेन, पाइलिंग व ट्रैक्टर फूंका है.

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दस करोड़ रूपये का हुआ नुकसान

जानकारी के अनुसार वाहनों में आग लगाने से पूर्व नक्सलियोंने लेवी व क्षेत्र में दहशत फैलाने के उद्देश्य से मौके पर मौजूद वाहन चालकों व मुंशी के साथ भी मारपीट की है. जिसमे आधा दर्जन मजदूरों को मामूली चोट भी आई है. घायल मजदूरों के अनुसार नक्सली ठेकेदार को खोज रहे थे. नक्सलियों द्वारा लंबे अरसे के बाद अंजाम दिए गए घटना से संवेदक को करीब दस करोड़ रूपये का नुकसान हुआ है. घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है वहीं पुलिस की एक बार फिर परेशानी बढ़ गई है.

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एक बार फिर नक्सलियों ने कराई अपनी उपस्थिति दर्ज

गौरतलब है कि कुछ वर्ष पूर्व तक  नक्सलियों का सेफ जोन माने जाने वाला झारखंड-बिहार सीमा पर स्थित उक्त इलाके में लंबे समय बाद नक्सलियों ने किसी बड़ी घटना को अंजाम देकर एकबार फिर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. घटना किस संगठन के उग्रवादियों द्वारा अंजाम दिया गया है यह पता नहीं चल पाया है. घटना की सूचना पाकर प्रतापपुर थाना पुलिस घटना स्थल के लिए रवाना हो गई है. पुलिस अधीक्षक अखिलेश बी वारियर ने बताया कि पुलिस घटना को अंजाम देने वाले नक्सलियों की पहचान करते हुए उनके धर-पकड़ को ले इलाके में सघन छापेमारी अभियान चला रही है.

 

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पलामू की एजेंसी द्वारा कराया जा रहा था काम

प्रतापपुर के लिपदा नदी पर पूल का निर्माण रिजनेबुल इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, पांकी, पलामू की एजेंसी द्वारा कराया जा रहा था. क्षेत्र में विकास की संभावनाओं को लेकर इस पुल का निर्माण का कार्य करीब साढ़े पांच करोड की लागत से कराया जा रहा था. गौरतलब है कि नक्सल प्रभावित इस इलाके में नक्सली भय के कारण कोई भी संवेदक निविदा में शामिल नहीं हो रहा था. जिसके कारण लंबे समय से पुल का निर्माण कार्य लंबित था. ऐसे में पांकी की एजेंसी ने कार्य के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की मांग के साथ निविदा भरा था. लेकिन न तो पुलिस ने उसे किसी प्रकार का सुरक्षा उपलब्ध कराया और न ही अन्य सुविधाएं दी. ऐसे में साढे पांच करोड़ के योजना के क्रियान्वयन में दस करोड़ के नुकसान ने संवेदक को बड़ा झटका दिया है.

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