अप्रैल में धरती पर गिरने वाला है चीन का 8000 किलो वजनी स्पेस स्टेशन,  जद में भारत भी आयेगा

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 03/13/2018 - 17:40

Beijing :  धरती पर अप्रैल माह में एक खतरा आनेवाला है. बताया गया है कि चीन के 8000 किलो  धातु से बने एक स्पेस स्टेशन ने काम करना बंद कर दिया है और अप्रैल में अपनी ऑर्बिट यानी परिक्रमापथ से निकलकर धरती पर आ गिरेगा. इस स्पेस स्टेशन के नीचे दबकर धरती के कई हिस्से तबाह हो सकते हैं. डर इस बात का भी है कि खतरे की तय की गयी सीमा में भारत भी है.  चीन के स्पेस स्टेशन टियेंगॉंग-1 को 29 सितंबर 2011 में स्पेस में भेजा गया था. 18000 पाउंड यानी करीब 8000 किलोग्राम का यह स्पेस स्टेशन चीन का पहला प्रोटोटाइप स्पेस स्टेशन है. मंडेरिन भाषा में 'टियेंगॉंग' का मतलब होता है स्वर्ग का महल. जब चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ने इसे लॉन्च किया थाइसे महल जैसा बनाने की कोशिश की गयी थी. इस स्पेस स्टेशन ने 2013 में अपना ऑर्बिट छोड़ना शुरू कर दिया.

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2016 में वैज्ञानिकों ने मान लिया कि स्पेस स्टेशन का गिरना तय है

चीन के वैज्ञानिकों ने नासा की मदद ली और इसे वापस ऑर्बिट में पहुंचाने की कोशिशें कीलेकिन 2016 में आखिरकार वैज्ञानिकों ने मान ही लिया कि यह स्पेस स्टेशन अपना रास्ता भटक ही गया है और वापस इसे इसके सही रास्ते पर लाना संभव नहीं है. इसका गिरना तय है. 2018 के जनवरी मा‍ह में पाया गया कि अब बहुत दिन नहींजब यह स्पेस स्टेशन धरती से आ मिलेगा . हालांकि वैज्ञानिक अभी तक तय नहीं कर पाये हैं कि इस स्पेस स्टेशन के अवशेष कहां गिरेंगे. साथ ही यह भी अभी पता नहीं चल पाया है कि अप्रैल महीने की किस तारीख को कितने बजे ये आसमान से गिरेगा. फिलहाल वैज्ञानिकों को इतना भर पता है कि ये टुकड़े 43 डिग्री पूर्वी लेटिट्यूड से 43 डिग्री दक्षिणी लेटिट्यूड के बीच में गिरेंगे.  नासा द्वारा रिलीज नक्शे के हिसाब से दुनिया के मध्य और दक्षिणी हिस्से में इस स्पेस स्टेशन के गिरने की संभावनायें हैं. मैप में मौजूद काली पट्टी वाले हिस्से में इस स्पेस स्टेशन के अवशेष गिरने की सबसे ज्यादा संभावना है. वहीं इन दोनों काली पट्टियों के बीच का हिस्सा कम ही सही लेकिन खतरे में है.

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टियेंगांग-1 पृथ्वी से 290 किलोमीटर ऊपर है,  28,000 किमी/घंटे की गति से पृथ्वी के चक्कर काट रहा है

 टियेंगांग-1 पृथ्वी से 290 किलोमीटर ऊपर स्थापित है और 28,000 किमी/घंटे की गति से पृथ्वी के चक्कर काट रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके गिरने से डरने की कोई बात नहीं है. टेक्निकल खामियों और इतनी तीव्र गति से परिक्रमा करने की वजह से इस स्पेस स्टेशन का अधिकतर हिस्सा जल चुका है. वहीं धरती पर गिरने से पहले ही इस स्पेस स्टेशन के टुकड़े-टुकड़े हो जायेंगे. यानी जो हिस्सा धरती पर गिरने से पहले बदकिस्मती से आपको छू भी गया तो उसका साइज एक छोटे से कंकड़ से बड़ा नहीं होगा. एरोस्कोप एनालिसिस के हिसाब से  आसमान से गिरने वाले इन टुकड़ों से चोट खाने वालों की संख्या 1 लाख करोड़ में एक से भी कम है. वैज्ञानिक विलियम एलोर ठिठोली करते हुए कहते हैं कि इससे ज्यादा संभावना तो किसी की बिजली चमकने से घायल होने की है.

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