नगड़ी पीडीएस में डीबीटी : मंत्री ने कहा नियमों में एकरूपता ना होने से योजना सफल नहीं, केंद्र सरकार को जानकारियों से कराएंगे अवगत

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 04/19/2018 - 18:37

Ranchi: बुधवार को हेमंत सोरेन के नगड़ी दौरे के कुछ देर के बाद ही यह अफवाह उड़ी कि खाद्यान्न वितरण मामले में डीबीटी फेल होने की वजह से डीबीटी व्यवस्था राज्य सरकार वापस ले लेगी. जबकि ऐसा करना राज्य सरकार के बस में है ही नहीं. केंद्र सरकार की पायलट प्रोजेक्ट पीडीएस में डीबीटी देश के करीब-करीब हर राज्य में शुरू की गयी. केंद्र की तरफ से जब यह निर्देश झारखंड को मिला तो राज्य के दो प्रखंडों का चयन सरकार की तरफ से किया गया. इनमें गोला और ओरमांझी प्रखंड शामिल थे. लेकिन जल्दबाजी में और रांची से पास होने के कारण नगड़ी प्रखंड को चुना गया. मामले को लेकर अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने भी आपत्ति दर्ज करायी थी. जिसके बाद उन्होंने विभाग को एक रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट को विभाग ने केंद्र सरकार को भेज दिया. अब राज्य सरकार की तरफ से एक सोशल ऑडिट का काम नगड़ी में किया जा रहा है. उसकी भी रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी. मामले पर न्यूज विंग ने सच जानने के लिए विभाग के मंत्री सरयू राय से विशेष बातचीत की.

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योजना को बनाना है सफल, तो नियमों में लाए एकरूपता : सरयू राय 

ऐसा नहीं है कि ये बिन आग का धुआं है. इसमें दो तीन चीजे हैं. नगड़ी में पीडीएस में डीबीटी शुरू किए हुए छह महीने हो गए. अब इस योजना का प्रभाव क्या है उसका आकलन किया जा रहा है. नगड़ी में करीब 12000 लाभुक हैं. इन सभी लाभुकों से बात की जा रही है. यह एक तरह का सर्वेक्षण है. डीबीटी एक्ट में सर्वेक्षण का प्रावधान है. यह सर्वेक्षण मार्च से ही शुरू है. आने वाले एक हफ्ते के अंदर सर्वेक्षण हो जाएगा. सरकार की जेएसएलपीएस ही सर्वेक्षण का काम कर रही है. हमलोगों के अध्ययन में कुछ बाते निकल कर सामने आ रही हैं. तीन तरह के अधिनियम हैं. पहला डीबीटी, दूसरा खाद्य सुरक्षा अधिनियम और तीसरा अधिनियम पहल है, जिसके जरिए सरकार गैस बांटने का काम कर रही है. नगड़ी में पीडीएस में डीबीटी पहल के अधिनियम के मुताबिक हो रही है. यह भारत सरकार का ही निर्देश था. हमारे अध्ययन में यह सामने आया है कि इन तीनों नियमों में एकरूपता नहीं है.

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लॉ डिपार्टमेंट ने जतायी हमारी बातों पर सहमति : मंत्री

मंत्री सरयू राय का कहना है, हमलोगों ने इस मामले को ड्राफ्ट कर लॉ डिपार्टमेंट को भेजा. लॉ डिपार्टमेंट ने भी हमारी बातों पर सहमति जतायी है. हमारी प्राथमिकता खाद्य सुरक्षा अधिनियम की है. हमें हर हाल में इसके प्रावधान को लागू करना है. हमने जिसको भी यह कार्ड दे दिया है उसको हर महीने हमें राशन देना ही है.यह हमारी प्राथमिकता है.

नगड़ी नहीं है इस योजना के लायकः मंत्री

न्यूज विंग से बातचीत में विभाग के मंत्री सरयू राय ने कहा जैसे ही हमारा सर्वेक्षण पूरा हो जाता है, हमलोग भारत सरकार को लिखेंगे कि भारत सरकार एक ऐसी नियमावली बनाए जिससे एकरूपता आए. नगड़ी पायलट प्रोजेक्ट के लिए उपयुक्त नहीं है. कैसे हुआ और क्यों हुआ वो अलग बात है. किसी भी उपयुक्त स्थान पर योजना शुरू करने के लिए भी हमारे तीनों अधिनियमों में एकरूपता लानी जरूरी है.

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बैंकिंग प्रणाली में भी है खामी : सरयू राय

मंत्री सरयू राय का कहना है, हम जो पेमेंट करते है वो भारत सरकार की पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम) के जरिए करते हैं. लेकिन हमारे जो बैंक हैं उनके जरिए सेवा पहुंच नहीं पा रही है. अगर किसी के पास दो या तीन अकाउंट है तो किस अकाउंट में पैसा गया यह पता नहीं चलता. इसे बैंकिंग सिस्टम से बाहर कर हमारे जितने भी राशन दुकान हैं उन्हें बैंकिंग कॉरेसपॉन्डेंट बना देना चाहिए. ताकि वहीं वो आदमी आए आगूंठा लगाए राशन ले और पैसा उसके खाते में चला जाए. हमलोग यह करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कई बैंक ऐसा नहीं करना चाह रहे हैं.

केंद्रीय कानून मंत्री से की मुलाकात, उन्हें भी सारी बात बतायी

हाल ही में मैं दिल्ली दौरे पर था. वहां मेरी मुलाकात केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद से हुई. उन्हें भी मैंने अधिनियमों की वजह से हो रही परेशानी से अवगत कराया. इसके अलावा भारत सरकार को इन सभी विषयों को देखते हुए पत्र लिखने की तैयारी में हूं. भारत सरकार के व्यय सचिव अजयनाथ झा जब नगड़ी आए थे, तो उन्हें भी सारी बात बता दी गयी थी.

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