डीवीसीः अधिकारियों ने पहले वर्क ऑर्डर कैंसिल किया, दोबारा निकाला ट्रक के लिए टेंडर, प्रोजेक्ट हेड ने दिये जांच के आदेश

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 02/12/2018 - 15:37

  Bokaro: डीवीसी के चंद्रपुरा पावर प्लांट में ट्रक निविदा मामले में निविदा के एक वर्ष पूरा होने के बाद डीवीसी के अधिकारियों ने एक सप्ताह के दौरान दो अलग-अलग आदेश पारित किये, जो वर्तमान में जांच का विषय है. इस संबंध में बताया जाता है कि विगत 10 सितंबर 2016 को निविदा-00008/620 के तहत दो वर्ष के लिए दुगदा के विशाल ट्रांसपोर्ट से 19 लाख रुपये की लागत से झारखंड एवं बंगाल के लिए संविदा पर ट्रक लिया गया था. उक्त ट्रांसपोर्ट के ट्रक नंबर-जेएच 09 एडी-2634 को प्रतिमाह ढ़ाई सौ किलोमीटर रनिंग करना था. डीवीसी प्रबंधन ने नौ माह तक ट्रक चलाये जाने के बाद एक नोट शीट के आधार पर उक्त ट्रक को बंद कर डीवीसी के ही ट्रक को चलाने की बात कही.

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कहा गया डीवीसी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं

उक्त नोट शीट पर प्रोजेक्ट हेड, डिप्टी चीफ मैकनिकल पीपी साह, अधीक्षण अभियंता गोपिल चौधरी, कार्यपालक अभियंता हेमंत कुमार और वरीय प्रबंधक वित्त ने हस्ताक्षर किये थे. नोट शीट के आधार पर अधीक्षण अभियंता सीएंडएम ने नौ अक्टूबर 2017 को विशाल ट्रांसपोर्ट के चल रहे उक्त ट्रक को निविदा के कारण संख्या 4.19 के तहत शार्ट क्लोजिंग के आधार पर दिये गये कार्यादेश को बंद कर दिया. डीवीसी के अधिकारियों द्वारा जो नोट शीट बनायी गयी थी, उसमें निविदा पर चलने वाले उक्त ट्रक को बंद करने के लिए डीवीसी की आर्थिक स्थिति का खराब होना तथा उसके स्थान पर डीवीसी के विभागीय ट्रक को चलाने एवं इसके लिए सभी दृष्टिकोण से फिट बताया था.

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एक हफ्ते में निकाला दोबारा टेंडर

निविदा पर चलने वाले विशाल ट्रांसपोर्ट के ट्रक को अधिकारियों द्वारा बंद करने के महज एक सप्ताह बाद ही 16 अक्टूबर 2017 को फिर से अधिकारियों ने बंद किये गये ट्रक को चलाने के लिए नोट शीट बनायी. बंद किये गये विशाल ट्रांसपोर्ट के ट्रक को दोबारा शुरू करने के लिए जो आधार बनाया गया, वह अपने आप में ही मामले की सभी कहानी खुद बयां करता है. नोट शीट पर वरीय मंडल अभियंता हेमंत कुमार ने लिखा कि एक नवंबर 2017 से डीवीसी चंद्रपुरा पावर प्लांट की यूनिट नंबर आठ की ओवरवायलिंग की जानी है. ओवरवायलिंग के क्रम में सामान लाने और ले जाने के लिए ट्रक को बंगाल के मीजिया भेजा जाना है. उक्त कार्य के लिए डीवीसी का ट्रक फिट नहीं है और उसके पास रोड परमिट भी नहीं है.

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सवाल जो उठ रहे हैं

सवाल यह कि जिन अधिकारियों ने जिस ट्रक को एक सप्ताह पहले पूरी तरह से फिट बताया था और उसी को आधार बनाकर निविदा पर चल रहे ट्रक को बंद कर दिया था. वह एक सप्ताह बाद ही पूरी तरह से अनफिट कैसे हो गया. ट्रक को दुबारा शुरू करने के लिए विशाल ट्रांसपोर्ट निविदा की दर से प्रतिमाह चार हजार रुपये मासिक कम दर पर ट्रक को चलाने का एक सहमति पत्र दिनांक 19 अक्टूबर 2017 को ले लिया और उसी को आधार बनाया. इस संबंध में विशाल ट्रांसपोर्ट के मालिक विजय सिंह का कहना था कि उन्हें डीवीसी प्रबंधन द्वारा आज तक यह नहीं बताया जा रहा है कि ट्रक क्यों नहीं चलाया जा रहा है और उसके एवज में उन्हें भुगतान भी क्यों नहीं किया गया है. जबकि कार्यादेश मिलने के बाद उनसे प्रबंधन ने नया ट्रक 21 दिनों के अंदर मांगा था और उन्होंने नया ट्रक दिया था.

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उच्चस्तरीय जांच करने की मांग

मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग हजारीबाग के पूर्व सांसद तथा भाकपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भुनेश्वर प्रसाद मेहता ने की है. उन्होंने कहा कि पूरे मामले में भ्रष्टाचार साफ नजर आता है, जो जांच के बाद सामने आ जायेगा. उन्होंने कहा कि मामले में डीवीसी के अधिकारियों की दोनों रिपोर्ट ही भ्रष्टाचार की कहानी कह रही है. डीवीसी के वरीय मंडल अभियंता हेमंत कुमार ने पूछे जाने पर कहा कि जो भी कार्य किया गया है, वह वरीय अधिकारियों के निर्देश पर किया गया है. डीवीसी चंद्रपुरा के प्रोजेक्ट हेड जीके चंदा ने कहा कि पूरे मामले की जांच कमेटी गठित कर करवायी जा रही है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मामले में कुछ कहा जा सकता है.

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