देवघर : चैंबर अध्यक्ष ने नये विद्युत टैरिफ पर जताई आपत्ति, कहा- प्रोफेशनल हाथों में सौंपे विद्युत व्यवस्था

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 04/27/2018 - 20:31

Deoghar : चैंबर अध्यक्ष रंजीत गाडोदिया ने नियामक आयोग द्वारा शुक्रवार को घोषित नये विद्युत टैरिफ पर आपत्ति जताई और कहा कि बिजली शुल्क बढाने की प्रक्रिया में कई खामियां हैं. कहा कि आज शाम चार बजे झारखंड विद्युत नियामक आयोग ने नया बिजली टैरिफ प्लान घोषित किया,  जबकि आज दो बजे से 5 बजे तक औद्योगिक क्षेत्रों में पावर कट रहा.  पावर कट की दयनीय स्थिति से राज्य के उद्योग बंदी के कगार पर हैं.  वर्तमान परिप्रेक्ष्य में झारखंड विद्युत वितरण निगम लिमिटेड क्वालिटी एवं क्वांटिटी बिजली मुहैया कराने में पूरी तरह से अक्षम है. बिजली की अनुपलब्धता के बाद ऐसी स्थिति में बिजली शुल्क में बढोत्तरी पूर्णतः अनुचित है.  कहा कि नियामक आयोग ने वितरण निगम पर 120 करोड की पेनाल्टी भी लगाई है. क्या राज्य सरकार ऐसे अयोग्य विद्युत आपूर्तिकर्ता के साथ बिजली लेने को बाध्य रहेगी. अथवा बिजली को प्रोफेशनल के हाथों में सौंपने पर विचार करेगी.  सरकार को इस पर चिंतन करने की आवश्यता है.  राज्य में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित हो इस हेतु राज्य सरकार को सलाह देना नियामक आयोग का दायित्व है लेकिन चैंबर के कई प्रयासों के बाद नियामक आयोग में पिछले दो-तीन वर्षो में दो बार सलाहकार समिति की बैठकें हुईं.  उन बैठकों में एक बार भी बिजली को निजी हाथों में सौंपने पर चर्चा नहीं की गयी.  ऐसी कार्यशैली से नियामक आयोग पर भी सवालिया निशान खडा होता है. आयोग ने डोमेस्टिक बिजली में भी बढोत्तरी की है जो राज्य की गरीब जनता के साथ अन्याय है. रंजीत गाडोदिया ने कहा कि घोषित किये गये नये  बिजली टैरिफ का हम पुरजोर विरोध करते हैं. इस ओर चैंबर की उर्जा उप समिति टीम कार्य कर रही है.  सारी प्रक्रियाओं को समझते हुए हम आगे की कार्ययोजना पर विचार करेंगे.

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आवास बोर्ड की तर्ज पर ट्रांस्पोर्ट नगर के लिए जमीन अधिग्रहण किया जाये

दैनिक समाचार पत्रों के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार रांची में आवास बोर्ड की आवासीय कॉलोनी बनाने के लिए सरकार 53 एकड भूमि अधिग्रहण कर रही है. चैंबर अध्यक्ष रंजीत गाडोदिया ने कहा कि क्यों नहीं इसी तर्ज पर शहर से बाहर रिंग रोड में 100 एकड उपयुक्त जमीन खोजकर ट्रांस्पोर्ट नगर बसाया जाता. कहा कि  पंडरा बाजार में बसे-बसाये व्यापारियों को उजाडना उपयुक्त नहीं है.  ट्रांस्पोर्ट व्यवसायी भी इसके पक्ष में नहीं हैं.  इससे शहर में यातायात की समस्या बढेगी.  राज्य सरकार यह प्रयास करे कि शहर से बाहर उपयुक्त जमीन खोजकर ट्रांस्पोर्ट नगर का निर्माण किया जाये. ट्रांस्पोर्ट नगर का निर्माण बेहद आवश्यक है किंतु इसका निर्माण में शहर से बाहर किया जाना बेहतर होगा.

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