रिम्स के डॉक्टर अंशुल ने कहा- मरीजों को बेहतर ट्रीटमेंट देना हमारा काम, हमें खुशी है कि भगवान ने हमें मरीजों की सेवा का मौका दिया

Publisher ADMIN DatePublished Sat, 04/21/2018 - 20:21

पीजी की पढ़ाई मैंने यहीं से की, इसलिए रिम्स से मेरा लगाव है : डॉ अंशुल

Ranchi : रिम्स के जाने माने चिकित्सक डॉ अंशुल कुमार जिन्होंने कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी के द्वारा कई मरीजों की जान बचायी है. युवा होने के साथ ही मरीजों से इनका लगाव अन्य चिकित्सकों से इन्हें अलग करता है. पिछले एक वर्ष से अपनी सेवा रिम्स में दे रहे हैं. न्यूज विंग संवाददाता सौरभ शुक्ला ने इनसे बातचीत की और हृद्य रोग से संबंधित कई सवाल किए. पेश है बातचीत का मुख्य अंश.  

सवाल : आपका परिचय और रिम्स में आप किस पद पर योगदान दे रहे हैं.

जवाब : मेरा नाम डॉक्टर अंशुल कुमार है. मैंने एमबीबीएस की पढ़ाई बिहार के दरभंगा मेडिकल कॉलेज से की है. एमएस जनरल सर्जरी की पढ़ाई 2012 में रिम्स से की. एमसीएच कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी की पढ़ाई 2016 में दिल्ली के राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल से की है. 2016-17 के बीच एक साल फोर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टिट्यूट दिल्ली में अपना योगदान दिया. वहां सेवा देने के बाद मुझे रिम्स में काम करने का अवसर प्राप्त हुआ. चूंकि रिम्स से मेरा लगाव पहले से है, क्योंकि पीजी की पढ़ाई मैंने यहीं से की है. बिहार और झारखंड में एक कार्डियक सेंटर बने इसी सोच के साथ 2017 में मैं यहां ज्वाइन किया. मेरा प्रमुख उद्देश्य यही है कि जो गरीब मरीज दिल्ली या अन्य जगहों पर इलाज के लिए जाते हैं, उनका इलाज यहीं हो और उन्हें बेहतर सुविधा यहीं मिले.

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सवाल : आपके द्वारा की गई ऐसी सर्जरी जो आपके लिए एक उपलब्धि हो.

जवाब: जब मैं यहां ज्वाइन किया तो विगत एक वर्ष में काफी प्रोग्रेस किया है. जहां तक ओपीडी का सवाल है तो यहां ओपीडी शुरू की गई है. ओपीडी में इस वर्ष जनवरी से अप्रैल तक 810 मरीजों को देखा गया है. वार्ड में (इंडोर) 52 मरीजों का इलाज किया है. जहां तक सर्जरी की बात है तो इस वर्ष मेजर सर्जरी 8 और माइनर सर्जरी 18 किया गया है. ऐसी सर्जरी में इमरजेंसी एक्सीडेंट के केस थे. जिसमें नस कट गई और पैर-हाथ काटने की नौबत आ गई. हमने नसों को जोड़ा है और मरीजों को बचाया भी है. बाहरी अस्पतालों में उनके हाथ पैर को काट दिया जाता, लेकिन हम लोगों ने इलाज कर जान बचायी. ऐसे मरीजों का भी ऑपरेशन किया जिनके छाती में इंफेक्शन था. बहुत दिनों से परेशान थे और उनके पास पैसे नहीं थे, इलाज के लिए वैसे दो मरीजों का इलाज शुरुआती दौर में किया. हमारे लिए यह काम मील का पत्थर है, क्योंकि इतनी सुविधा ना होने के बावजूद भी हमने सर्जरी की. यह दो सर्जरी हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हुए. जहां तक ओपन हार्ट सर्जरी का सवाल है तो इसका काम तेजी से चल रहा है. सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के दूसरे तल्ले पर ऑपरेशन थिएटर बन रहा है. लगभग 75 प्रतिशत तक काम पूरा हो गया है. अगले एक माह के अंदर ऑपरेशन थिएटर शुरू हो जाएगा. कार्डियक सर्जरी के इक्विपमेंट्स के लिए काम चल रहा है. कुछ चीजें बची हुई है, जिसे जल्द से जल्द पूरा कर दिया जाएगा. कार्डियक सर्जरी में मैन पावर के लिए सरकार ने हमारी मांगें मान ली है.

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सवाल : सिटीवीएस का क्या अर्थ है, इसमें इलाज की प्रक्रिया क्या है.

जवाब : सिटीवीएस का अर्थ कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी है, जिसे हिंदी में ह्रदय वक्ष शल्य चिकित्सा कहा जाता है. मरीज की बीमारी के अनुसार कार्डियोलोजिस्ट दवाई देते हैं, लेकिन उन बीमारी का स्रोत बिना सर्जरी के ठीक नहीं हो सकता है. जैसे नस ब्लॉक, वल्व खराब है. उन मरीजों को हार्ट सर्जरी के द्वारा ठीक किया जाता है. ब्लॉकेज को दूर करते है. इस तरीके से हार्ट की बीमारी जो दवाइयों से ठीक नहीं होती है वहां सर्जरी करना पड़ता है. छाती की बीमारी टीवी या किसी अन्य कारण से छाती (लंग्स) खराब हो जाता है, पूरा काम नहीं करता है उसको निकालना ही एक रास्ता बनता है. वहां हम छाती का ऑपरेशन कर लंग्स के किसी भाग को हटाते है. वैस्कुलर का अर्थ नस से संबंधित है, जैसे किसी की नस कट गयी है या ब्लॉकेज आ गया है. खून की नली में ब्लॉकेज आ गया है. उसको बायपास कर निकलना हमारा काम है.

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 सवाल : आपके द्वारा किए गए ऑपरेशन जो आपके लिए एक उपलब्धि हो.

जवाब : अभी हमारे विभाग की शुरुआत ही है. लोगों की मदद से हम आगे बढ़ रहे हैं. एक महिला काफी दिनों से परेशान थी और हर एक अस्पताल घूम रही थी. उसके छाती में एक बड़ा संक्रमण था. छाती के अंदर एक गोला हो गया था. यह दवाई से ठीक नहीं हो रहा था. 30 साल की वह महिला बहुत परेशान थी. उसके पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे. वह हमारे पास आई, हमने फरवरी के पहले सप्ताह में टीम वर्क से सर्जरी किया यह विभाग की बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि हमारे पास संसाधन कम है. हमारी मदद एनेस्थेसिया और जनरल सर्जरी के डॉक्टरों ने की थी.

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सवाल : एम्स जैसी संस्थान झारखंड में शुरू होने से रिम्स का काम कितना आसान होगा.

जवाब यह सरकार की पॉलिसी डिसीजन है. जहां तक रिम्स का सवाल है तो मेरा यही मानना है कि हम अपने कार्यशैली से रिम्स को और बेहतर बना सकते हैं. मरीजों का उपचार कर रिम्स को अच्छा बनाया जा सकता है. ऐसा करने से मुझे लगता है कि मरीजों को सहूलियत होगी. मेरा मानना है कि मरीज किसी भी डॉक्टर या अस्पताल के लिए बोझ नहीं होते हैं. हां, इलाज में ऊंच नीच हो सकती है. मेरा यही प्रयास रहेगा कि हम एक ऐसा ट्रीटमेंट मरीज को दें, जिससे मरीज हमारे पास इलाज के लिए आये.

सवाल : बतौर चिकित्सक समाज के लोगों से क्या अपील करेंगे.

जवाब : मेरा यह संदेश सभी के लिए है कि हम पर भरोसा रखें. डॉक्टर मानव है, हमसे भी कभी-कभी भूल हो जाती है. हम यहां मरीजों की सेवा के लिए हैं. उनको ठीक करने के लिए हम सभी चिकित्सक काम कर रहे हैं. हमें बहुत खुशी होती है कि भगवान ने मरीज की सेवा का मुझे मौका दिया है.

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