कौशल विकास के प्रशिक्षण के लिए एजेंसियों के चयन का टेंडर पास करने में भारी गड़बड़ी, नई कंपनियों को दे दिया गया काम

Submitted by NEWSWING on Thu, 01/11/2018 - 19:57

Shubhas Shekhar, Ranchi : केंद्र सरकार की महत्‍वाकांक्षी योजना स्किल इंडिया के तहत 25 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र बांटने के लिए रघुवर सरकार ताल ठोंक रही है, लेकिन झारखंड में इस योजना की बुनियाद ही गड़बडियों की नींव पर रखी गयी है. सरकार के अधिकारियों ने मनपसंद एजेंसियों को काम देने के लिए टेंडर के नियम और शर्तों को दरकिनार कर दिया और वैसे कंपनियों को भी काम दिया गया जो बिल्‍कुल नये थे और जिस काम के लिए उनका चयन होना था उसका अनुभव नहीं था.

तीन कंपनियों का टेंडर किया गया अप्रूव

नगर विकास एवं आवास विभाग झारखंड सरकार की ओर से 9 नवंबर 2015 को नेशनल अरबन लाइवलीहुड मिशन (एनयूएलएम) के तहत प्रशिक्षण देने के लिए संस्‍थाओं के चयन के लिए टेंडर निकाली गयी थी. इसके तहत टेंडर डालने की अंतिम तिथि 26 नवंबर 2015 तय की गयी थी. टेंडर खोलने की तारीख 27 नवंबर थी. निर्धारित तारीख पर टेंडर खोला गया और उसका मूल्‍यांकन शुरू हुआ. इस दौरान मूल्‍यांकन करने वाली समिति पर तीन कंपनियों के टेंडर पेपर को भी मूल्‍यांकन में शामिल करने के लिए दबाव बनाया गया. यह कंपनियां थीं– वीएलसीसी, साईं ब्‍यूटी एंड हेल्‍थ केयर और फोकस स्किल. इन कंपनियों के टेंडर को अप्रूव भी कर दिया गया.

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निविदा की कई शर्तों की अनदेखी कर पास किया गया टेंडर

इन कंपनियों को पास करने में निविदा के कई शर्तों को अनदेखी भी कर दी गयी. नियमानुसार टेंडर में शामिल होने वाली कंपनियों को टेंडर डाक्‍यूमेंट के लिए पांच हजार रूपये और प्रोसेसिंग फीस के रूप में 25 हजार रूपये का ड्राफ्ट देना था. टेंडर में शामिल होने वाली कंपनियों को प्रोसेसिंग फीस टेंडर खुलने के दिन ही देना था. वहीं टेंडर डॉक्‍यूमेंट के लिए पांच हजार रूपये की फीस टेंडर पेपर खरीदते समय देनी थी. नेट से डाउनलोट करने की स्थिति में टेंडर डॉक्‍यूमेंट के लिए पांच हजार रूपये का ड्राफ्ट प्रोसेसिंग फीस के 25-25 हजार रूपये का ड्राफ्ट दिसंबर 2015 को बनवाया गया. सिर्फ साईं ब्‍यूटी ने टेंडर डाक्‍यूमेंट के लिए पांच हजार रूपये का ड्राफ्ट निर्धारित तिथि से पहले बनवाया था. तब सिटी मैनेजर राजा चंदन कुणाल ने फाइल में लिखा कि तीनों कंपनियों के द्वारा निर्धारित तिथि के बाद में बैंक ड्राफ्ट जमा कराया गया है.

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एक साल पुरानी कंपनी को भी कर दिया गया अप्रूव

इसके अलावा एक और कंपनी फ्रंट लाइन ग्‍लोबल सर्विसेज को भी टेंडर के नियमों की अनदेखी कर अप्रूव कर दिया गया. टेंडर के नियमों के मुताबिक तीन साल या उससे पुरानी कंपनी को भी काम मिल सकता था. लेकिन फ्रंट लाइन ग्‍लोबल सर्विसेज कंपनी सिर्फ एक साल पुरानी कंपनी थी.

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