जनजातीय परामर्शदात्री समिति (TAC) की गठित उपसमिति की बैठक के बाद सुलगने लगा है दुमका

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 01/09/2018 - 15:20

Parvin Kumar, Dumka: जनजातीय परामर्श दात्री  समिति की गठित उपसमिति की बैठक 6 जनवरी को दुमका  स्थित मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में किया गया था. बैठक में समाज कल्याण मंत्री लुइस मराण्डी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमिटी के सदस्य पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारी जे बी तुबिद, विधानसभा सदस्य, राम कुमार पाहन ने हिस्सा लिया. इस बैठक में मेनका सरदार को भी आना था लेकिन किसी कारण वह नहीं आ सकीं और उनके स्थान पर दुमका नगर पालिका अध्यक्षा अमिता रक्षित शामिल हुई थीं. अमिता रक्षित एसपीटी एक्ट को लेकर शहर के बुद्धिजीवियों के सुझाव को डायरी में लिख रही थीं. बैठक के दिन जेएमएम कार्यकाता एसपीटी एक्ट में संशोधन के लिए सुझाव आमंत्रित करने आयी टीएसी के उपसमिति की बैठक के विरोध में सड़क पर उतरी थीं. जिसका नेतृत्व शिकारीपाड़ा विधानसभा विधायक नलिन सोरेन ने किया था.

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क्या सुलगने लगा है दुमका

जनजातीय परामर्श दात्री समिति की एक उपसमिति का गठन किया गया है. जिसे तीन जनवरी से संथाल परगना के पांच जिलों का दौरा करना निर्धारित किया गया था. इसका नेतृत्व समिति के अध्यक्ष सह कल्याण मंत्री लुईस मरांडी ने किया. वह समिति द्वारा एसपीटी एक्ट में पुराना थाना क्षेत्र की अवधारणा और आवासीय जरूरतों के लिए थाना क्षेत्र की भूमि का क्रय-विक्रय के प्रावधानों का अध्ययन करने के लिए बना है. साथ ही संथाल परगना में एसपीटी एक्ट के तहत गैर जनजातियों द्वारा गैर जनजातीय लोगों की भूमि की खरीद बिक्री पर संबंधित क्षेत्र के बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गैर सरकारी संगठन, समिति, स्थानीय जनप्रतिनिधियों से बात कर के उनका मंतव्य प्राप्त करना था.

 

सात जनवरी को दर्जनों गांव में रघुवर दास और लुईस मरांडी एवं टीएससी सदस्यों का पुतला फूंका गया

दिसोम मारंग बुरु युग जाहेर आखड़ा, सिदो-कान्हु चांद-भैरव फूलो-झानो आखड़ा, दिसोम मारंग बुरु संताली अरीचली आर लेगचार आखड़ा और सिदो-कान्हू मांझी परगना बैसी के बैनर तले दुमका और जामा प्रखंड के कई गांवों में ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री रघुवर दास, कल्याण मंत्री सह टीएसी उपसमिति के अध्यक्ष लुईस मरांडी, सदस्य जेबी तुबिद, राजकुमार पहान आदि का संयुक्त रूप से पुतला दहन किया गया. ग्रामीणों ने जनजातीय परामर्शदात्री परिषद की उपसमिति की बैठक का पुरजोर विरोध किया एवं उपसमिति के द्वारा किये जा रहे कार्य को सरकार की ओर से आदिवासियों की जमीन लुटने के रूप में देखा जा रहा है.

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जामा प्रखंड के कुकुरतोपा गांव के माझी बाबा मंगल मुर्मू का कहना है, रघुवर सरकार काफी धूर्त है. वह येन-केन-प्रकारेण से आदिवासियों की जमीन लेना चाहती है. लेकिन हम किसी भी कीमत पर उनकी मंशा पूरा नहीं होने देंगे. टीएससी की उप समिति द्वारा संथाल परगना भ्रमण और लोगों से विचार लेने के पीछे सरकार की मंशा साफ है कि कैसे एसपीटी एक्ट में संशोधन का माहौल बनाया जाए. हम लोग गांव-गांव में लोगों को संगठित करेंगे. जागरूक करेंगे और रघुवर सरकार के इरादों को पूरा नहीं होने देंगे.

गुहियाजोड़ी के माझी बाबा साहेब मरांडी का मनना है कि यह लड़ाई राजनीतिक दल की नहीं है. बल्कि एसपीटी में संशोधन की लड़ाई पूरे संथाल परगना में निवास करने वाली जनता की लड़ाई है. जिसे संथाल परगना में रहने वाले सिदो-कान्हु के वंशज कभी पूरा नहीं होने देंगे. हम लोग सरकार की साजिश पहले भी नकाम कर चुके हैं इस बार भी करेंगे.

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नावाडीह गांव के मांझी बाबा छोटका मुर्मू का कहना है कि सरकार टीएससी के माध्यम से जनता को गुमराह कर रही है. साथ ही संथाल परगना की मूल समस्या से जनता का ध्यान भटकाना चहती है. आज भी शिक्षा और मूलभूत सुविधा के अभाव के कारण आजादी के इतने वर्षों बाद भी गांवों में आदिवासी और गैर आदिवासियों की आर्थिक, सामाजिक स्थिति ठीक नहीं हुई. अभी भी गांवों की 90 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है. वे परम्परागत रूप से कृषक/किसान हैं. अगर यहां सीएनटी और एसपीटी एक्ट में बदलाव किया जाता है, तो यहां के आदिवासियों और गैर आदिवासियों की स्थिति और बदत्तर हो जायेगी. आज इन्ही एक्ट के कारण यहां के गरीब आदिवासी और गैर आदिवासी की जमीन बची हुई है.

दुमका जिला के इन गांवों में सात जनवरी को किया गया पुतला दहन

टीएससी की उपसमिति के संताल दौरे के बाद कई गांवों में सरकार की कार्यशैली और नीतियों पर सवाल खड़े किये जा रहे हैं. 6 जनवरी को दुमका में टीएसी की उपसमिति की बैठक के बाद गांवों में हलचल शुरू हो गयी. ग्रामीणों का मनना है कि सरकार एसपीटी-सीएनटी एक्ट में टीएसी के माध्यम से संशोधन करना चहती है, जिसके विरोध में जिला के दर्जनों गांवों में रघुवर दास एवं टीएससी की उपसमिति सदस्यों का पूतला फूंका गया. जिन गावों से सूचना प्राप्त हुई वे गांव हडवाडीह, हिजला, करामडीह, विजयपुर, कुकुरतोपा, नवाडीह, धोबनचोपा, बड़ीयारी, दुन्दिया, गुहियाजोड़ी हैं.

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