दुमका : हिजला मेले की तैयारी शुरू, मेले की समस्याओं पर अध्यक्ष से ग्रामीणों ने की बातचीत

Submitted by NEWSWING on Mon, 01/08/2018 - 18:37

 Dumka  : दिसोम मारंग बुरु संताली आरीचली आर लेगचार आखड़ा के अध्यक्ष सह हिजला गांव के मांझी बाबा सुनीलाल हांसदा की अध्यक्षता में हिजला मेला को लेकर बैठक की गयी. इस बैठक में ग्रामीणों और मेला स्वंय सेवकों के साथ मेला परिसर में ही विचार-विमर्श किया गया. इस बैठक में सरवा पंचायत की मुखिया मंजुलता भी उपस्थति रहीं. बैठक से पहले ग्रामीणों व मेला स्वंय सेवकों ने दिसोम मारंग बुरु थान में पूजा-अर्चना की. इसके बाद मेला से संबंधित समस्याओं पर विचार किया गया.

कहां लगता है हिजला मेला

राज्य के संताल परगना के दुमका जिला में स्थित मयूराक्षी नदी के किनारे पहाड़ की तलहटी में हर साल इसे मेले का आयोजन किया जाता है. वहीं भारतीय पञ्चांग के अनुसार फाल्गुन माह के बसंत ऋतु के शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार के दिन लगने वाला यह मेला आठ दिनों तक चलता है और इसका समापन भी शुक्रवार के दिन ही किया जाता है.

कब से किया जाता है मेले का आयोजन

इस मेले की शुरूआत 3 फरवरी 1890 को किया गया था. जबकि इसकी पृष्ठभूमि सन 1855-56 का संताल विद्रोह है, जिसमें हजारों की संख्या में संताल समुदाय के लोग शहीद हुए थे. 1855-56 में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संताल विद्रोह हुआ था, जिसमें अंग्रेजी प्रशासन ने हजारों सतालों का खून बहाया था. इससे प्रशासन और  आदिवासी समाज के बीच दूरी बन गयी थी. इसी दूरी को कम करने के लिए 1890 में दुमका के तत्कालीन उपायुक्त बी कास्टियार्स ने इस मेले की शुरुआत की थी और उसी वक्त से यह मेला लगता आ रहा है. आजादी के पहले तक यह मेला संताल परगना के विकास के लिए नियम और योजना बनाने का महत्वपूर्ण स्थान था. संताल परगना काश्तकारी कानून भी इसी मेले में बहस का परिणाम था. इसके अलावा ब्रिटिश हुकुमत आदिवासियों की परंपरा जानने के उदेश्य से भी मेले का आयोजन करता था, जिसे अंग्रेज हिज लॉ कहते थे.

इसे भी पढ़ें - जिस राज्य में लोग भूख से मरते हैं, वहीं के गोदाम में सड़ जाता है 1098 क्विंटल अनाज (देखें वीडियो)

उल्लेखनीय है कि ब्रिटिश सरकार ने जनजातियों की भूमि की आर्य सामंतों से सुरक्षा के लिए 22 दिसम्बर 1855 में अधिनियम संख्या 37 के अनुसार दामिन-ए-कोह और आसपास के क्षेत्रों को गैर विनियमित क्षेत्र (Non-Exchangeable Zone) बना दिया. जिसका नाम संताल परगना काश्तकारी अधिनियम दिया गया. जनजाति समुदाय के लोग शांतिप्रिय प्रकृति के होते हैं और इस इलाके के संताल समाज परंपरागत स्वशासन व्यवस्था के अंतर्गत समाज संचालित करते थे. जहां पर बाहरी हस्तक्षेप बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाता था. इसलिए इनलोगों के लिए पारित अधिनियम को समझाने के लिए तत्कालीन उपायुक्त जॉन रॉबर्ट कास्टेयर्स ने 3 फरवरी 1890 को संताल समुदाय के लिए मयूराक्षी नदी के किनारे  एक सभा का आयोजन किया, जिसमें संताल परगना के संताल जनजाति के लोग शामिल हुए. साथ ही इस सम्मेलन में उपायुक्त जॉन रॉबर्ट कास्टेयर्स ने उनके कानून (His Law) को समझाने की व्यवस्था भी की. वही हिज लॉ के उच्चारण में दिक्क्त की वजह से इसका नाम हिजला मेला पड़ा. कुछ समय बाद हिजला के नाम से इस स्थान पर हिजला गांव पड़ गया. इस मेले में संताल आदिवासी 128 साल से शामिल हो रहे हैं.

 इस मेले के संबंधित एक आम धारणा यह भी है कि यदि कोई राजनेता आकर इस मेले का उद्घाटन करता है, तो उन्हें अपनी राजगद्दी खोनी पड़ती है. इसलिए इस मेले का उद्घाटन पास के ही गांव के रहनेवाले संताल जाति के ग्राम प्रधान, जिसे  मांझी हराम कहते हैं, वो ही इसका उद्घाटन करते हैं. वहीं झारखण्ड राज्य गठित होने के बाद झारखंड सरकार ने इस मेले को राजकीय मेला के रुप में घोषित किया.

इसे भी पढ़ें - आधार मामले में शत्रुघ्न सिन्हा का ट्वीट : क्या हम ‘बनाना रिपब्लिक’ में जी रहे हैं, यहां प्रतिशोध की राजनीति हावी

आयोजन में हो रही परेशानी

मेले के आयोजन में सबसे बड़ी परेशानी यह है कि मेला परिसर के आसपास दारू बेची जाती है, साथ ही आसपास के छोटे दुकानों में भी दारू की बिक्री होती है. जिसपर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाये. इसके साथ ही मेले के आसपास के गांव और सरवा पंचायत के गावों के नृत्य टीमों को प्राथमिकता दी जाए. इसके अलावा  मेला परिसर में स्थित संताल आदिवासी के पूज्य स्थल दिसोम मारंग बुरु थान के नायकी बाबा(पुजारी) को मेला के सात दिनों के लिये सरकार प्रोत्साहन राशि और पूजा सामग्री का दे और मेला परिसर में स्थित मारंग बुरु थान का मरम्मत किया जाय.

बैठक में सरवा पंचायत के उपमुखिया विनोद मुर्मू, नायकी बाबा सीताराम सोरेन, झारखण्ड मरांडी,दिलीप सोरेन,पालटन मुर्मू,आबिद मरांडी,सुनीता मरांडी, सुनीता मुर्मू, मुनि हांसदा, बबली टुडू, सवित्री हांसदा, होपोनटी बास्की,बिटिया सोरेन, बाहा टुडू, सरला मरांडी, लुखीमुनि हेम्ब्रोम, बेरुनिका सोरेन, नीलम मरांडी, ललिता सोरेन, सोनिया सोरेन, जिहा हेम्ब्रोम के साथ-साथ काफी संख्या में महिला,पुरुष,बच्चे उपस्थति थे.
 

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

City List of Jharkhand
loading...
Loading...