लातेहार : लैंड माइंस के विस्फोट से घायल हुआ हाथी, जंगली जानवरों के अनुकूल नहीं रहा पलामू टाइगर रिजर्व

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 01/12/2018 - 11:53

Latehar : देश भर में बाघ, जंगली हाथी और दुर्लभ पशु-पक्षियों के लिये प्रसिद्ध पलामू टाइगर रिजर्व अब जंगली जानवरों के अनुकूल नहीं रहा. विभिन्न कारणों से पीटीआर में एक साल में आठ हाथियों की मौत हो गयी है. रिजर्व क्षेत्र में हाथियो के मरने का सिलसिला थम नहीं रहा है. वहीं गारू प्रखंड के बारेसांड के तिसिया जंगल मे बीते दिन नक्सलियों के बिछाये लैंड माइंस पर पैर पड़ने से एक हाथी घायल हो गया, और उसके शरीर के कई हिस्सों से खुन बह रहा है. हाथी की हालात देख कर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसके जिंदा रहने की उम्मीद कम ही है. गौरतलब है कि तीन महीने पहले भी लैंड माइंस विसफोट की वजह से एक हाथी की मौत हो गयी थी.

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घायल हाथी को बचाने में असहाय दिखा पलामू रिजर्व

बारेसांड वन क्षेत्र में काम कर रहे वन कर्मियों की माने तो हाथी दो दिनों से घायल है. जिसकी सूचना विभाग के आला अधिकारियों को दे दी गयी है. लेकिन पीटीआर में एक भी पशु चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं. जिस कारण हाथी का इलाज नहीं हो पा रहा है. ज्ञात हो कि पलामू टाइगर रिजर्व में जानवरों के घायल होने पर रांची या अन्य जगह से पशु चिकित्सक को उनके इलाज के लिये बुलाया जाता है. बीते कुछ महीने पहले ओरमांझी जैविक उद्यान से मंगाये गये सांभर की बीमारी और उचित चिकित्सा के अभाव में मौत हो गयी थी. चिकित्सक के अभाव में अक्सर यहां जानवरों का समय पर इलाज नहीं हो पाता है और कई बार उनकी मौत हो जाती है.

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पुलिस-नक्सली संघर्ष और मानव अतिक्रमण का जैव विविधता पर प्रतिकूल असर

पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र लगातार हो रहे बम विस्फोट, जंगली आग, अवैध शिकार, जल संकट, वनों में घटता आहार, और लुप्त होते पानी का असर जानवरों की बेचैनी के रूप में आसानी से देखा जा रहा है. यही कारण है कि जंगली जानवर गांवों की ओर बढ़ने लगे हैं.

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