देवघर बाबा मंदिरः प्रचार-प्रसार व विज्ञापन पर 1.70 करोड़ और सांस्कृतिक कार्यक्रम पर 95 लाख रुपये खर्च करना दान के पैसों का दुरुपयोग तो नहीं !

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 01/24/2018 - 10:34

Deoghar: देवघर स्थित विश्व विख्यात बाबा मंदिर में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. विशेषकर आर्थिक मामलों के मुद्दों पर. आरटीआई एक्टिविस्टों को बाबा मंदिर के पदाधिकारियों से सूचना के अधिकार के तहत जो जानकारी मिली है, वह प्रथम दृष्टया मंदिर के आय के पैसों के दुरुपयोग की तरफ इशारा करती है. जो जानकारी सामने आयी है, वह चौंकाने वाला है. पिछले तीन साल में बाबा मंदिर की आमदनी में से 1.70 करोड़ रुपया का खर्च प्रचार-प्रसार और अखबारों को विज्ञापन देने पर किया गया. 95 लाख रुपया खर्च कर तीन दिनों का सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया.

देवघर जिला के डीसी होते हैं बाबा मंदिर के  रिसीवर

कोर्ट के आदेशानुसार देवघर जिले के डीसी बाबा मंदिर के रिसीवर भी होते थे.  रिसीवर का काम मंदिर की व्यवस्था को मेंटेन करना है.  मंदिर से जुड़े लोग बताते हैं कि खेल यहीं शुरू हुआ. जिन अधिकारियों को मंदिर के पैसे सुरक्षित रखने एवं कोष बढ़ाने का जिम्मा दिया हुआ था,  उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए मंदिर कोष के पैसों को गैर जिम्मेदार तरीके से खर्च किया. कोर्ट ने अपने आदेश में साफतौर पर कहा था कि जिला के डीसी मंदिर के केयर टेकर रहेंगे. जबकि अधिकारियों ने करोड़ों रूपये का खर्च वहां भी कर दिया जिसका बाबा मंदिर से कोई सरोकार नहीं था. 

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एक संस्था को दे दिया 25 लाख रुपया डोनेशन

पिछले पंद्रह साल से जो भी अधिकारी देवघर उपायुक्त के पद पर पदस्थापित रहे किसी ने इस दुरुपयोग को रोकने के प्रति दिलचस्पी नहीं दिखायी. एक उपायुक्त ने अपने कार्यकाल में 20-25 लाख रुपये एक संस्था को डोनेशन में दान कर दिया. जबकि एक अन्य उपयुक्त ने तो बाबा मंदिर कोष के 95 लाख रुपये सिर्फ तीन दिन के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में खर्च कर दिया. वहीं बाबा मंदिर के प्रचार-प्रसार और अखबार को दिए गए विज्ञापन के लिए पिछले तीन साल में तकरीबन एक करोड़ 70 लाख से भी ज्यादा खर्च किया गया है.

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जब सुविधा की बात होती है, तब बताया जाता है कम आमदनी

मंदिर से जुड़े हुए लोग बताते हैं कि जिला प्रशासन मंदिर के पैसों को टूल्स की तरह उपयोग में लाता है. इस टूल्स का उपयोग बाबा मंदिर में हो रही गड़बड़ियों को छिपाने में किया जाता है. वहीं दूसरी तरफ मंदिर से जुड़ी संस्थाओं के पदाधिकारियों का भी कहना है कि बाबा मंदिर में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. मई-जून की गर्मियों के समय मंदिर के प्रांगण का पत्थर दहकते कोयले के समान हो जाता है, जिसपर चलने में भक्तों को परेशानी होती है. देवघर डीसी को अखबार में करोड़ों के विज्ञापन बांटने के बजाय मंदिर में इस तरह की व्यवाहरिक समस्या दूर करनी चाहिए. वहीं मंदिर के तीर्थ पुरोहितों  ने भी मंदिर में पीने के पानी के अभाव और मंदिर में स्वास्थ्य सेवाओं में कमी की बात कही. उनके अनुसार इन कमियों को दूर करने में सरकारी हाकिमों द्वारा रत्ती भर भी प्रयास नहीं किया जा रहा है. जब भी सुविधाओं की बात की जाती है, तब जिला प्रशासन का यह जवाब होता है कि मंदिर की आमदनी कम है. लेकिन वहीं जिला प्रशासन अखबारों में करोड़ों रुपये के विज्ञापन का आदेश जारी करता है. तब आमदनी पर ध्यान नहीं दिया जाता.

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