आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने 80:20 गोल्ड स्कीम में वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम का किया बचाव 

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 03/14/2018 - 17:30

New delhi :  आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने यूपीए सरकार की सोने के आयात की 80:20 स्कीम का बचाव किया है.  बता दें कि वित्त मंत्री रहने के दौरान पी चिदंबरम सोने के आयात पर नियंत्रण के लिए 80:20 स्कीम लाये थे.  राजन ने कहा कि यह स्कीम सोने के आयात पर नियंत्रण लगाने के लिए लायी गयी थी. उन्होंने कहा कि आरोप लगाने से पहले हमें यह देखना होगा कि असल में हुआ क्या था. मोदी सरकार इस मामले में लगातार उस समय की यूपीए सरकार पर हमलावर है. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया है कि 2014 में जिस दिन लोकसभा चुनाव के रिजल्ट आये, उस दिन तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सात  निजी कंपनियों को 80:20 गोल्ड स्कीम के तहत सहयोग दिया. श्री प्रसाद का आरोप है कि इसमें मेहुल चौकसी की कंपनी गीतांजलि भी शामिल थी. 

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भाजपा लगातार 80:20 स्कीम पर मंत्री पी चिदंबरम को घेर रही है 
भाजपा दिल्ली  पर सत्तारूढ होने के कुछ दिन पूर्व से ही 80:20 स्कीम के तहत कुछ कारोबारियों को सहयोग देने को लेकर लगातार पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को घेर रही है. इसमें आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी घसीटे जा रहे हैं. इस संबंध में सीएनबीसी टीवी को दिये एक इंटरव्यू में रघुराम राजन ने इस मामले में अपना पक्ष रखा है. रघुराम ने गोल्ड स्कीम 80:20 को लेकर कहा कि हमें यह देखना होगा कि हम इस स्कीम को किस समय पर लाये. 2013 के दौरान जब इस स्कीम को लाया गया, तब देश में फॉरेन एक्सचेंज क्राइसिस की स्थिति थी. इसकी वजह से सबने यह आशंका जताई थी कि चालू खाता घाटा नियंत्रण से बाहर हो सकता है. उन्होंने कहा कि यह स्कीम ज्वैलरी सेक्टर में रोजगार पैदा करने की जरूरत को ध्यान में रखकर भी लायी गयी थी. चालू खाते के घाटे में एक सबसे बड़ी हिस्सेदारी सोने की बड़ी खरीदारी थी. 

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जनता  भारी पैमाने पर सोना खरीद रही थी, तो सरकार ने नियंत्रण की कोशिश की 

जब जनता  भारी पैमाने पर सेाना खरीद रही थी, तो सरकार ने इस पर थोड़ा नियंत्रण पाने के लिए कदम उठाने की सोची. उस समय यह सोचा गया कि एक अस्थाई समाधान सोने के आयात पर लगाम लगेगी. उन्होंने बताया कि इस स्कीम के तहत हर 100 ग्राम के आयात में से 20 ग्राम सोने का निर्यात करना जरूरी था. इसी वजह से सोने के आयात पर लगाम लगाई जा सकी. यूपीए सरकार के राज में इस स्कीम की शुरुआत अगस्त, 2013 में की गयी थी. ज्वैलर्स के लगातार दबाव के बाद यूपीए सरकार ने सोने के आयात-निर्यात में कुछ राहत दी थी. इस स्कीम के तहत निजी कंपनियों को भी आयात करने की सुविधा दी गयी.   स्कीम में यह शर्त रखी गयी थी कि कारोबारियों ने जो भी सोना आयात किया है. इसमें से वह सिर्फ 20 फीसदी निर्यात कर सकते हैं और 80 फीसदी उन्हें घरेलू इस्तेमाल के लिए रखना होगा.

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