गढ़वा : मनरेगा योजना गड़बड़ी मामला – मुखिया, पूर्व मुखिया सहित 13 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

Publisher NEWSWING DatePublished Sun, 05/27/2018 - 10:35

Garhwa : प्रखंड अन्तर्गत कधवन पंचायत में मनरेगा योजना में गड़बड़ी मामले में वर्तमान मुखिया व पूर्व मुखिया समेत तेरह लोगों पर एफआईआर दर्ज हुआ है. डीडीसी चंद्रमोहन कश्यप के निर्देश पर बीडीओ मुरली यादव ने नगर ऊंटारी थाने में एफआईआर दर्ज करायी है. कधवन पंचायत में मनरेगा के तहत चयनित चार योजनाओं विजय भुईयां के खेत में डोभा निर्माण, हड़ही चेकडैम निर्माण, झरना से भोजपुर श्मशान घाट तक सड़क निर्माण एवं राजकुमार भुईयां के खेत में डोभा निर्माण में भारी गड़बड़ी की पुष्टि होने पर एफआईआर दर्ज किया गया है. बीडीओ ने जिन लोगों पर एफआईआर किया है उसमें तीन मेट, दो रोजगार सेवक, दो पंचायत सेवक, दो मेटेरियल सप्लायर, एक जेई, एक एई, एक मुखिया व एक पूर्व मुखिया शामिल हैं.

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जिन पर हुआ एफआईआर

योजना का मेट जब्बार अंसारी, राजकुमार भुईयां, इंताज अंसारी, रोजगार सेवक दीपक कुमार, विजय कुशवाहा, पंचायत सेवक राजकेश्वर राम, सतीश सिंह, एई महेश प्रसाद, जेई अरुण देव सिंह, कधवन की मुखिया सत्यावती देवी, भोजपुर की पूर्व मुखिया नजुबन बीबी, मेटेरियल सप्लायर संतोष प्रताप देव प्रथम, संतोष प्रताप देव द्वितीय पर एफआईआर हुआ है.

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ग्रामीणों का शिकायत पर एसडीओ ने की थी जांच

कधवन के ग्रामीणों की शिकायत पर एसडीओ कमलेश्वर नारायण ने कधवन पंचायत के चारों योजनाओं की जांच की थी. जांच में एसडीओ को विजय भुईयां के खेत में स्वीकृत डोभा, हड़ही चेकडैम, झरना से भोजपुर श्मशान घाट तक सड़क धरातल पर नहीं मिला था. जांच के दौरान वहां मौजूद सक्षम पदाधिकारी एसडीओ को उपरोक्त योजनाओं के बारे में कुछ भी नहीं बता पाये थे.

जांच के दौरान पाया गया कि विजय भुईयां के खेत में किसी प्रकार का डोभा का निर्माण नहीं हुआ है. ग्रामीणों ने एसडीओ को बताया कि लाभुक एवं मेट ने अरविंद बोस एवं अनामिका बोस के खेत में पूर्व में बने तालाब को दिखाकर पूरी राशि की निकासी कर ली है. वहां मौजूद अरविंद बोस एवं अनामिका बोस ने भी अपनी जमीन होने की पुष्टि की. योजना से संबंधित अभिलेख जांच के दौरान पाया गया कि योजना में 4 लाख 42 हजार मापी की गई. जिसमें फर्जी मस्टर रॉल के माध्यम से 4 लाख 41 हजार 978 रूपये की निकासी कर ली गई है. उक्त योजना का मेट जब्बार अंसारी है. हड़ही चेकडैम जांच में पाया गया कि अरविंद बोस एवं अनामिका बोस के जमीन पर फर्जी तरीके से चेकडैम का निर्माण कार्य दिखाकर राशि की निकासी कर ली गई है.उक्त चेकडैम 5 लाख 43 हजार 900 रूपये में से 5 लाख 42 हजार 864 रूपये की निकासी कर ली गई है. उक्त योजना में मेट अजमल अंसारी को कार्यादेश दिया गया. किन्तु राशि भुगतान इंताज अंसारी एवं जब्बार अंसारी को मेट बनाकर कर दिया गया. झरना से भोजपुर श्मशान घाट तक स्वीकृत सड़क की जांच के क्रम में किसी तरह का कोई सड़क नहीं बनने का मामला उजागर हुआ. बीपीओ भी उक्त सड़क निर्माण कार्य को नहीं दिखा पाये. जबकि उक्त योजना के अभिलेख में पाया गया कि 6 लाख 91 हजार 100 से सड़क की स्वीकृति दी गई थी. जिसमें 6 लाख 2 हजार 643 रूपये की निकासी कर ली गई है. वहीं राजकुमार भुईयां के खेत में स्वीकृत डोभा निर्माण की जांच की गयी. जांच के दौरान डोभा का निर्माण जेसीबी मशीन से कराये जाने का मामला उजागर हुआ. जेसीबी मशीन का निशान भी योजनास्थल पर पाया गया. अभिलेख जांच के क्रम में पाया गया कि योजना की प्राक्कलित राशि 4 लाख 42 हजार रूपये में से 4 लाख 3 हजार 221 रूपये की निकासी की गई है. जबकि उक्त योजना में मेट स्वयं लाभुक राजकुमार भुईयां ही है.

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एफआईआऱ में नहीं है बीपीओ और बिचौलियों का नाम

बीडीओ द्वारा करायी गयी प्राथमिकी में बीपीओ रविशंकर सिंह व कतिपय बिचौलियों का नाम नहीं होने से प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं. जांच के बाद एसडीओ कमलेश्वर नारायण ने डीसी एवं डीडीसी को भेजे जांच प्रतिवेदन में बीपीओ की भूमिका को संदेहास्पद बताते हुये लिखा था कि कधवन पंचायत में मनरेगा में भारी गड़बड़ी की भनक बीपीओ को नहीं होने से बीपीओ की भूमिका संदेह के घेरे में है. ऐसा लगता है कि बीपीओ स्वयं मामले में संलिप्त हैं या उनके द्वारा कार्य के प्रति लापरवाही बरती जा रही है. एसडीओ ने डीसी व डीडीसी से गड़बड़ी के विषय में बीडीओ से स्पष्टीकरण पूछने, बीपीओ, जेई, मुखिया, पंचायत सेवक, रोजगार सेवक आदि के विरूद्ध कानूनी व विभागीय कार्रवाई करने के साथ-साथ राशि की वसूली कराने की अनुशंसा की थी. अब मामले की प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान की कार्रवाई शुरू हो गई है. जिन लोगों का नाम प्राथमिकी में नहीं हैं वैसे लोगों का नाम जांच में आने पर उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

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