गढ़वाः स्वास्थ्य केंद्रों की हालत खस्ता, नहीं आते डॉक्टर- इलाज के लिए जाना पड़ता है सदर अस्पताल

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 05/11/2018 - 12:41

Garhwa: झारखंड सरकार हर जरुरतमंद तक स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने का दावा करती है. लेकिन हकीकत ये है कि सुदूर गांवों में सामुदायिक केंद्रों की हालत खस्ता है. डॉक्टर की कमी और सुविधाओं के अभाव में मरीजों को बाहर रेफर कर दिया जाता है. कभी-कभी थोड़ी सी देरी जानलेवा साबित होती है. गढ़वा से कुछ ऐसी ही तस्वीर सामने आयी है, जहां कांडी थाना क्षेत्र के सेमौरा गांव निवासी एक प्रसूता की गुरुवार को सदर अस्पताल गढ़वा में मौत हो गई. नवलेश पासवान की पत्नी चंपा देवी 30 वर्ष को बुधवार को सदर अस्पताल में ही ऑपरेशन से बच्चा हुआ, ऑपरेशन के बाद उसे खून भी चढ़ाया गया। लेकिन अगले ही दिन उसने दम तोड़ दिया.

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स्वास्थ्य केंद्र में नहीं मिले डॉक्टर 

बुधवार की सुबह चंपा को ममता वाहन से प्रसव के लिए खरौंधा स्वास्थ्य उप केंद्र ले जाया गया. जहां खून की कमी की बात कहकर उसे मझिआंव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेफर कर दिया गया. जहां से एएनएम ने महिला को गढ़वा सदर हॉस्पीटल भेज दिया. बड़ी बात ये है कि इस बीच प्रसूता को कहीं भी डॉक्टर का ट्रीटमेंट नहीं मिला. कोई दोनों केंद्रों में डॉक्टर नदारद थे. किसी तरह से महिला को सदर अस्पताल तो पहुंचाया गया, जहां ऑपरेशन के जरिए उसकी डिलीवरी हुई. उसके बाद खून की कमी होने पर ब्लड भी चढ़ाया गया. लेकिन प्रसूता की जान नहीं बच सकी. सवाल ये उठता है कि स्वास्थ्य उप केंद्र, या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अगर डॉक्टर उपलब्ध होते तो हो सकता है कि उसकी जान बच सकती थी.

अंतिम संस्कार के लिए चंदा

पीड़ित परिवार बेहद गरीब है. नवलेश पासवान मजदूर है, लेकिन मृतका के पति के पास इतने पैसे तक नहीं की वो अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार कर सके. महिला के दाह संस्कार के लिए गांव के लोग आपस में चंदा कर रहे थे. पिछले चार पांच साल के अंदर उसके पिता, एक भाई व एक बच्चे की मौत हो चुकी है. आर्थिकतंगी से जूझ रहे परिवार के लिए गांव के मुखिया ने आर्थिक सहयोग प्रदान करते हुए बीडीओ को सूचना देकर राहत की मांग की है.

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