गढ़वा : पंचायतों में हो रहे मनरेगा ऑडिट में सामने आया बड़ा गड़बड़झाला, कई मामलों में जमकर की गयी पैसों की बंदरबांट

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 01/16/2018 - 12:47

Garhwa : मनरेगा योजना अंतर्गत जिले में चलाये जा रहे विकास कार्यों से आम जनता को  कम  और   पंचायत प्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों का ज्यादा फायदा हुआ है.  इसमें कई ऐसे मामले उजागर हुए हैं, जिसमें सारे नियमों को ताक पर रखकर पंचायत प्रतिनिधियों तथा पंचायत स्तर के कर्मचारियों ने जमकर बंदरबांट की है. इसमें  प्रखंड के पदाधिकारियों की भी संलिप्तता बताई जा रही है.  जिले के सभी पंचायत में एक साथ हो रहे सोशल ऑडिट के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है. वहीं ऑडिट में पारदर्शिता की बात ही गयी, लेकिन उसमें भी ऑडिटरों के पंचायत प्रतिनिधियों से मिलीभगत कार्य करने की शिकायत मिली है.  इस ऑडिट कार्य ने विकास योजनाओं में अनेक भ्रष्टाचार के मामले उजागर किए हैं. साथ ही ऑडिट इंचार्ज ने कुछ पंचायत में फिर से ऑडिट कराने के आदेश दिये हैं.

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रंका प्रखंड में राशि की गलत निकासी का मामला आया सामने

जिले के रंका प्रखंड के कटरा पंचायत भवन में फर्जी ग्राम सभा कर योजना की राशि निकालने का मामला सामने आया है. इस मामले में पंचायत के मुखिया समेत पंचायत सेवक, जेई और रोजगार सेवक से 11 लाख रुपए की रिकवरी करने का निर्देश दिया गया है. वहीं जनसुनवाई कार्यक्रम में बीपीओ की ओर से मजदूर के मस्टर रोल बिना हस्ताक्षर के पैसे निकाले जाने के में उनपर 21 हजार रुपए का दंड भी लगाया गया है. साथ ही मजदूरों को कार्य स्थल पर सुविधा नहीं दिए जाने पर मुखिया और पंचायत सेवक पर भी एक-एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है. जनसुनवाई में चार डोभा का अभिलेख नहीं मिलने पर पंचायत सेवक पर चार हजार जुर्माना लगाया गया है. वहीं करी के धनंजय राम की ओर से पाकीसोत डोभा निर्माण किए जाने पर 22 हजार रुपए रिकवरी करने को कहा गया है. जबकि कटरा के हुसैन अंसारी की ओर से डोभा योजना की राशि से अधिक पैसे निकासी करने का मामला सामने आया. वहीं सिरोई कला के सुरेन्द्र सिंह की ओर से डोभा निर्माण में योजना की राशि से अधिक राशि निकालने का मामला भी सामने आया है. इसे बारे में सोशल ऑडिट की टीम ने बताया कि पंचायत के मुखिया, पंचायत सेवक, रोजगार सेवक और बीपीओ की मिली भगत से फर्जी निकासी की गयी.

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जबकि कुछ इसी तरह से रंका के पंडरिया पंचायत में चल रहे सामाजिक अंकेक्षण में मनरेगा योजनाओं में भारी गड़बड़ी देखने को मिला है.  ऑडिट में लगी छह सदस्यों की टीम ने पंचायत के धनीमंडरा गांव में मनरेगा योजना के 2015-16 की योजना संख्या 06 के तहत 2.62 लाख 400 रुपए की लागत से निर्माणाधीन हरदयारी बांध निर्माण में बिना काम कराये ही फर्जी तरीके से मस्टर रोल और एमबी कराकर 1.40 लाख 151 रुपये की निकासी की मामला प्रकाश में आया है. जबकि अधौरा गांव में 4.37 लाख की लागत से निर्माणाधीन सेनुआर तालाब गहरीकरण में मस्टर रोल में मजदूरों का फर्जी हस्ताक्षर बनाकर 1 लाख दो हजार 204 रुपये के एवज में 2 लाख 54 हजार 92 रुपए की फर्जी निकासी कर ली गयी. साथ ही एमबी बुक के अनुरूप योजना में काम नहीं कराया गया. वहीं पच्चु बांध मरम्मति कार्य में मस्टर रोल में मजदूरों का 120 दिन की हाजिरी बना लिया गया और 20 हजार 40 रुपए की फर्जी निकासी का मामला भी सामने आया है.

टीम के दीपक पाठक, गीता देवी, दीपा लकड़ा, नितोष पांडेय, कैलाश प्रसाद और रघुनाथ प्रसाद वर्मा ने बताया कि टीम के सदस्यों ने जितनी भी योजनाओं पर अभी तक जांच की है. उन सभी में थोड़ी-बहुत गड़बड़ियां उजागर हुई हैं. साथ ही उन्होंने बताया कि कई ऐसी भी योजनाएं हैं, जिसके नाम पर राशि की निकासी की गयी है और उसमें कोई कार्य नहीं हुआ है. वहीं कुछ मजदूरों को छोड़ किसी ने जॉब कार्ड या पासबुक नहीं दिखाया.

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वहीं हरिहरपुर  मझिगांवा पंचायत में भी सोशल ऑडिट के बाद लगभग दस लाख फर्जीवाड़ा का मामला सामने या है. ऑडिट टीम ने पंचायत में संचालित योजनाओं में भारी गड़बड़ी पकड़ी है. बिना स्थल सभा कराये ही दर्जन भर योजनाएं पूरी कर दी गयीं. आधा दर्जन से अधिक योजनाओं में बिना एमबी बुक किए ही सारी राशि की निकासी हो गयी. वहीं मनरेगा से निर्मित कुंआ और डोभा निर्माण में प्राक्कलन से अधिक निकासी कर ली गयी है. जन सुनवाई में अधिकांश सवालों के जवाब रोजगार सेवक नहीं दे सके और कई ऐसे भी मजदूर सामने आए जिन्होंने किसी भी योजना के तहत काम कियेही नहीं और उनके खाते में मजदूरी भेज दी गयी. इसके अलावा दो साल पहले उदय चौबे के खेत में तालाब जीर्णोंद्धार में लगाये गये मजदूरों की मजदूरी का एक लाख रूपया अब तक बकाया है.

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मजदूरों के बिना  काम किये ही  निकाल ली गयी राशि 

दूसरी ओर नगर उंटारी प्रखंड के विलासपुर पंचायत में मनरेगा योजना से किए गए कार्यो में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरते जाने का मामला देखने को मिला है. इस बारे में मनरेगा सोशल ऑडिट टीम के सदस्य विश्वनाथ आर्य महतो ने बताया कि मजदूरों के सत्यापन के दौरान कई ऐसे मजदूर पाये गये जिन्होंने एक दिन भी काम नहीं किया और उनके नाम पर मजदूरी की निकासी कर ली गयी. वहीं  दस्तावेज सत्यापन में कई आवश्यक कागजात भी गायब मिले, जिससे सत्यापन में काफी परेशानी हुई. साथ ही उन्होंने बताया कि कई योजनायें ऐसी भी पायी गयीं, जिसमें मजदूरों के बजाए मशीन से काम लिया गया. जबकि कई मस्टर रॉल में बीपीओ व बीडीओ का हस्ताक्षर भी मौजूद नहीं है और मजदूरी की निकासी कर ली गयी है. उन्होंने कहा कि 93 योजना के अभिलेख में 50 अभिलेख ही टीम को उपलब्ध कराया गया . जबकि 43 अभिलेखों का पता नहीं चल पाया है. जिससे ऑडिट कार्य अधूरा रह गया है. विश्वनाथ आर्य महतो ने बताया कि मस्टर रॉल में गड़बड़ी व अभिलेख उपलब्ध नहीं होने से प्रतीत होता है कि मनरेगा योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गयी है.

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