गढ़वा : अवैध उत्खनन से नदियों के अस्तित्व पर खतरा, भू-गर्भ जल को भी हो रहा नुकसान

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 04/30/2018 - 19:13

Garhwa : गढ़वा शहर की जीवन रेखा कही जाने वाली दानरो या डाडू नदी का अस्तित्व खतरे में है. नदी में पायी जाने वाली जैविक घटक और यहां तक कि अंशकालिक खाद्य श्रृंखला पूरी तरह से अनुपस्थित है. वर्तमान में नदी पूरी तरह से सूख चुकी है. विशेषज्ञों का कहना है कि जिले के कई स्थानों पर अंधाधुंध रेत खनन के कारण दानरो नदी के तट पर जमा रेत काफी नीचे आ गई है. रेत खनन पर रोक नहीं लगाई गई तो नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है. अवैध रेत खनन के कारण नदी के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है. रेत के कारण नदी में भूमिगत जल का संचार होता है. रेत के अवैध उत्खनन से नदी का भूमिगत जल भी सूख सकता है, क्योंकि भूमिगत जलस्तर बनाने में रेत का महत्वपूर्ण रोल होता है.

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रेत की बढ़ती मांग के कारण बढ़ा है अवैध उत्खनन

आधिकारिक सूत्रों की मानें तो रेत की बढ़ती मांग के कारण नदियों से अवैध रेत खनन हो रही है. अवैध रेत खनन पर जल्द रोक नहीं लगी तो दानरो नदी में जमा रेत तीन-चार साल में समाप्त हो जायेगा, जिसका सीधा असर नदी के अस्तित्व और भूमिगत जल पर पड़ेगा. नदी में जमा रेत केवल नदी में जल प्रवाह को रोकने  में मदद नहीं करता है, बल्कि यह पानी के ठहराव की क्षमता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण  भूमिका निभाता है.

सोसाइटी फॉर एलिमिनेशन ऑफ रूरल  (एसईआरपी) के एक सदस्य ने कहा कि वर्तमान में अनुमानित  जमा रेत का नियमित रूप से अवैध खनन होता रहा तो मौजूदा जमा रेत तीन से चार साल तक नहीं टिकेगा. जिला के भीतर निर्माण गतिविधि और विकास के वर्तमान और भविष्य की मांग से परिस्थिति विकट हो रही है.

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अवैध उत्खनन रोकें, नहीं तो होगी भू-गर्भ जल समस्या : वन संरक्षक राजीव कुमार रॉय

वन संरक्षक (सीएफ) गढ़वा राजीव कुमार रॉय ने कहा कि मूल रूप से वर्षा चट्टानी रेत से ढके बेसिन पर सतह प्रवाह में योगदान देती है. अधिक रेत प्रवाह की गति कम है. इन दिनों रेत खनन ने बेसिन की चट्टान की सतह का खुलासा किया है। चट्टानी चिकनी सतह पर प्रवाह की गति विनाशकारी है. नग्न चट्टानी पकड़ क्षेत्रों में नए रेत गठित नहीं होते हैं. तेजी से पानी का प्रवाह किनारे से रेत को बेसिन पर जमा कर रहा है. प्रवाह रेत फ़िल्टर के रूप में कार्य करता है.

अवैध उत्खनन का असर तटबंध के किनारे रहने वाली आबादी पर पड़ रही है. अवैध उत्खनन के कारण भू-गर्भ जल का नीचे चला गया है, अगर तत्काल इसपर रोक नहीं लगाई गई तो पेयजल समस्या से जुझने को लोग मजबूर हो जायेंगे.  उन्होंने भू-गर्भ जल समस्या से निजात पाने के लिए अवैध उत्खनन पर रोक लगाने और नदी के किनारे वृक्षारोपण करने की सलाह दी है.

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