गिरिडीह:  PNB ने 1600 ग्रामीणों को बनाया लोन डिफॉल्टर, आक्रोशित ग्रामीणों ने कहा - लोन लिया नहीं तो डिफॉल्टर कैसे

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 03/16/2018 - 16:10

Giridih : एक तरफ नीरव मोदी के धोखाधड़ी से पंजाब नेशनल बैंक लगातार देश में सुर्खियां बटोर रही है. वहीं गिरिडीह में भी यह बैंक इनदिनों खूब चर्चा में है. लेकिन यहां चर्चा नीरव मोदी को लेकर नहीं बल्कि जिले के अति नक्सल प्रभावित पीरटांड़ के हरलाडीह के तकरीबन 16 सौ गरीब, आदिवासी ग्रामीणों के कारण है. जी हां बिल्कुल सही पढ़ा आपने, गिरिडीह में पंजाब नेशनल बैंक का चिरकी शाखा 16सौ के करीब गरीब ग्रामीणों के लोन डिफॉल्टर बनाये जाने को लेकर चर्चा में है. वहीं लोन डिफॉल्टर बनाये जाने के नोटिस से गरीबों के पैरों तले ज़मीन खिसक गई है. गौरतलब है कि हरलाडीह के सैकड़ों आदिवासी व गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को पंजाब नेशनल बैंक चिरकी शाखा से लोन का नोटिस मिला है. जबकि लोगों का कहना है कि उन्होंने कोई लोन ही नहीं लिया है. नोटिस के अनुसार ग्रामीणों ने वर्ष 2012 में लोन लिया है और लोन की रकम नहीं चुकाए जाने के कारण लोग डिफॉल्टर हो गये है.

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ग्रामीणों का आरोप नहीं लिया कभी लोन

नोटिस मिलने से लोग घबराये हुये हैं. लोगों कि मानें तो इनलोगों ने कभी लोन ही नहीं लिया है. ग्रामीण कहते हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर बिचौलियों ने लोन लेकर पैसे का गबन कर लिया है.

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गोलबंद होने लगे हैं ग्रामीण

ग्रामीणों का कहना है जिन्हें भी नोटिस दिये गये हैं, उनमें ज्यादातर लोगों की कर्ज राशि 30 हजार से 60 हजार रुपये तक हैं. मामले को लेकर ग्रामीणों ने गोलबंद होकर उपायुक्त से मामले की शिकायत करने का निर्णय लिया है. ग्रामीण कहते हैं कि वे कभी बैंक ही नहीं गये हैं और ना ही उनके पास पासबुक है. इसके बाद भी लोन का नोटिस मिला है. ग्रामीण कहते हैं कि बैंक द्वारा कुछ लोगों को केसीसी लोन का नोटिस मिला है, जबकि उनके पास नाम भर की जमीन है.

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जिन्हें नोटिस मिला है उनके लोन से जुड़े कागजात बैंक के पास हैं

इधर, इस मसले पर पीएनबी चिरकी बैंक के मैनेजर वाई. के. तुंग का कहना है कि करीब 16 सौ लोगों पर नोटिस जारी किया गया है. जिसमें छह सौ 50 केसीसी लोन व बाकि के नाम अन्य प्रकार के लोन हैं. ग्रामीणों की शिकायत के बाबत मैनेजर ने कहा कि यदि ऋणधारक उनके पास शिकायत करते हैं तो वरीय पदाधिकारियों को जानकारी देंगे. उन्होंने कहा कि नोटिस भेजे गये लोगों के डोक्यूमेंट बैंक के ही पास हैं.

बहरहाल  इस मामले में बैंक सही है या फिर ग्रामीण ये तो जांच विषय है. लेकिन इतनी बड़ी संख्या में ग्रामीणों के डिफॉल्टर बनाये जाने एवं कई ग्रामीणों द्वारा बैंक नहीं जाने की बात बताये जाने से इस मामले में कोई बड़ा गड़बड़झाला न हो, इससे इंकार नहीं किया जा सकता है. ऐसे में यह देखना होगा कि आगे इस मामले में क्या कुछ होता है. फिलहाल यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है.

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