गिरिडीह : संयम नहीं रख पाये जैन मुनि, उपवास के दिन गोलगप्पा व पराठा खाते पकड़े गए

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 04/30/2018 - 16:30

Giridih : दिगंबर जैन मुनि प्रतीक सागर महाराज ने अपने आचरण से पूरे जैन समाज के आस्था को ठेस पहुंचाया है. अपने तप और कठिन साधना के लिए पूरी दुनिया में जैन मुनियों का नाम पूरी श्रद्धा से लिया जाता है. ऐसे में जब लाखों-करोड़ों लोगों के आदर्श और आस्था के प्रतीक दिगंबर जैन मुनि जब अपने पथ से भटक जाए तो पूरे समाज की आस्था को ठेस पहुंचती है. अपने आचरण से कुछ ऐसा ही किया है दिगंबर जैन मुनि प्रतीक सागर महाराज. उन्होंने जैन धर्म के नियमों की अनदेखी कर अपने मार्ग से भटक गये और संयम तोड़ते हुये उपवास के दौरान गोलगप्पा और पराठे का स्वाद लिया. शनिवार को कोलकाता में हुये इस घटना से आहत जैन समाज के प्रबुद्ध लोगों ने दिगंबर मुनि प्रतीक सागर महाराज को वस्त्र पहनाकर विदा कर दिया.

दयाचंद जैन, मंत्री, मुनि संघ समिति ने बताया कि कोलकाता के जैन मंदिर में दिगंबर मुनि प्रतीक सागर महाराज तीन माह से रह रहे थे. उनके जैन नियमों के विपरित क्रियाकलापों को देख मुनि संघ व्यवस्था समिति के पदाधिकारियों ने उन्हें कपड़े पहनाने का निर्णय लिया. नियमों के विपरीत दिनचर्या पाए जाने पर उनको कोलकाता से रवाना कर दिया गया.

इसे भी पढ़ें - कुरमी महाजुटान में पुराने नेताओं के सामने दिखी चंद हजार लोगों की भीड़, बोलने नहीं देने से लंबोदर नाराज, नहीं आये सुदेश व अमित

इससे पहले भी अपने आचरण के कारण विवादों में रहे हैं प्रतीक सागर महाराज

झारखंड के गिरिडीह में स्थित तीर्थनगरी मधुबन पारसनाथ जैनियों का पवित्र धरती है. यहां हमेशा जैन समाज के संतों का आना-जाना होता है. कुछ समय पूर्व दिगंबर जैन मुनि प्रतीक सागर महाराज भी मधुबन स्थित तेरह पंथी कोठी में चातुर्मास साधना करने के लिए आए थे. उस समय भी कई बार रात में भोजन करने व महिलाओं से बात करने के कारण वे विवादों में घिरे थे. तीर्थयात्रियों से भी उलझ गये. प्रबुद्ध लोगों ने समझाया पर जैन मुनि ने सभी की बातों को अनदेखा कर दिया. चातुर्मास के बाद तेरहपंथी कोठी के महामंत्री कमल किशोर पहाड़िया ने उन्हें कोलकाता बुलाया.

इसे भी पढ़ें - घरों में बिजली पहुंचाने के मामले को लेकर झारखंड के संदर्भ में PM को किसने दी गलत सूचना

बुलावे पर मुनि प्रतीक सागर महाराज मधुबन से कोलकाता पहुंचे. कोलकाता में उन्हें जैन धर्मावलंबियों ने उपवास के समय आलू पराठा और गोलगप्पा खाते पकड़ लिया. साथ ही महिलाओं से रात्रि में भोजन मंगाकर खाने की भी बात सामने आई. तब मुनि संघ व्यवस्था समिति व जैन समाज के लोगों ने दिगंबर मुनि को कपड़े पहनाकर वहां से रवाना कर दिया.

दिगंबर मुनि को धर्म के नियमों के तहत 24 घंटे में एक बार भोजन व पानी लेना होता है. आजीवन पैदल विहार करना होता है. खाने में बहुत से पदार्थ का निषेध है. बिना बर्तन के भोजन करना उनकी आदत में शुमार होना चाहिए.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.