गिरिडीह : खनन माफियाओं का सेफ जोन बना गावां वन क्षेत्र, लूटी जा रही संपदा

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 05/04/2018 - 20:25

रोजाना दर्जनों जेसीबी मशीनों से बर्बाद हो रहा जंगल और लूटी जा रही प्राकृतिक संपदा

Giridih : गावां वन प्रक्षेत्र के गावां व तिसरी प्रखंड खनन माफियाओं के लिए चाराहाग साबित हो रहा है. जहां हद से ज्यादा वनों का दोहन कर प्राकृतिक संपदा को लूटा जा रहा है. ऐसा प्रतीत होता है कि गावां वन प्रक्षेत्र में वन अधिनियम पूरी तरह पंगु बन कर रह गया है. जिले में वन विभाग के सबसे बड़े अधिकारी डीएफओ भी जानते हैं कि गावां-तिसरी के जंगलों में खुलेआम दर्जनों जेसीबी मशीनें कही माइका, पत्थर तो कहीं बैरल (कीमती पत्थर जैसे पुखराज, नीलम) वगैरह की लूट के लिए जंगलों को दिन-रात नष्ट कर रहे हैं. लेकिन संसाधन के अभाव और वन कर्मियों के पास हथियार नही रहने के कारण खनन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती.

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इन जगहों पर चलती है अवैध खदानें

गावां वन प्रक्षेत्र में लगभग सैंकड़ो अवैध खदानों का संचालन हो रहा है, जहां बड़े स्तर पर माइका, पत्थर और बैरल का अवैध खनन किया जा रहा है. इसमें से गावां के सेरूआ पंचायत के खजिया पहाड़ में पत्थर खदान, निमाडीह पंचायत के सुरंगी माइका माइंस, बेलाखुट्टा पहाड़ी पर संचालित माइका की माइंस, बादीडीह के भीखी में दो-तीन माईका की माइंस समेत कड़वामारन, सफी माइंस, हरलाघाटी, घुठिया आदि जगहों पर कहीं माईका तो कहीं पत्थर के लालच में जंगल को नष्ट किया जा रहा है. इसके अलावे गावां प्रखंड के अमतरो पंचायत के ककड़ियार, सुरंगी, तिसरी सीमा पर स्थित असुरहड्डी, डूब्बा, पनियाय आदि जगहों पर भी कीमती पत्थर जिसे स्थानीय स्तर पर बैरल कहा जाता है. इसका अवैध खनन किया जा रहा है.

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अधिकारी देते हैं रटा रटाया बयान

इस मामले में डीएफओ से जब जवाब मांगा जाता है, तो उनकी जुबां पर रटा रटाया जुमला होता है, जिसका मजमून ये है कि गावां-तिसरी के जंगलों में हो रहे अवैध खनन की पुरी जानकारी है.यह भी पता कि वहां जेसीबी और पोकलेन के जरिए जंगल को नष्ट किया जा रहा है. बहुत जल्द वहां इसके खिलाफ कार्रवाई होगी. अब अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब अधिकारियों का रवैया ही टालमटोल वाला रहेगा, तो खनन माफियाओं के हौसले बढ़ेंगे ही. नतीजा जंगलों और भू-संपदा की लूट और तबाही के रुप में ही सामने आएगा.

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