सरकार को है शक – व्यवसायियों ने 34,000 करोड़ का जीएसटी छुपाया, जांच में जुटा टैक्स डिपार्टमेंट

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 03/12/2018 - 14:11

New Delhi : जीएसटी नेटवर्क में फाइल रिटर्नस का जब विश्लेषण किया गया तो उसमें  कारोबारियों के द्वारा जुलाई-दिसंबर की अवधि 34 हजार करोड़ रूपये का टैक्स छिपाने का शक किया जा रहा है. दरअसल यह मुद्दा जीएसटी कांउसिल की बैठक में शनिवार को उठाया गया. इस बैठक के बाद जीएसटी रिटर्न्स- 1 और जीएसटीआर- 3बी में अलग – अलग देनदारी बताने वाले कारोबारियों को नोटिस भेजने पर विचार किया जा रहा है. चूंकि जीएसटीआर- 1 का इस्तेमाल फिलहाल मुख्य रूप से सूचना के मकसद से हो रहा है. 

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लोगों ने टैक्स रिटर्न फाइलिंग में बड़ा अंतर रखा है

टाइम्स ऑफ इंडिया को एक सूत्र की ओर से जानकारी दी गयी है कि जिन लोगों ने टैक्स रिटर्न फाइलिंग में बड़ा अंतर रखा है, उन्हीं लोगों पर विशेष ध्यान दिया जाना है. साथ ही सूत्र ने बताया कि कई मामलों में व्यक्तिगत करदाताओं की विस्तृत जानकारी का विश्लेषण करने के बाद परिणाम को राज्यों के साथ साझा किया जायेगा ताकि संदेहास्पद लोगों पर कार्रवायी की जा सके. साथ ही कहा जा रहा है कि सिर्फ शक की वजह यही नहीं है. बल्कि सीमा शुल्क विभाग की ओर से  रिटर्न्स के आंकड़े का जो विश्लेषण किया गया है, उसके बाद बताया जा रहा है कि   आयातित उत्पादों की कीमत काफी कम बतायी गयी है. जबकि इस बारे में एक अधिकारी ने उदाहरण देते हुए बताया कि 10,000 रुपये के मोबाइल फोन की कीमत 7,000 रुपये यदि किसी कारोबारी के द्वारा दिखाया गया हो तो इस तरह की चीजों पर संदेह है कि ऐसा हर पायदान पर कम जीएसटी चुकाने को लेकर किया गया है.  

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ऐसा इसलिए भी हो रहा है क्योंकि जीएसटी कलेक्शन सरकारके अनुमान से लगातार कम रहे हैं. साथ ही सरकार टैक्स चोरी रोकने के विभिन्न पहलुओं को लागू करने में असफल रही है. इसके लिए खरीद-बिक्री की कीमत का पता करने के लिए इनवॉइस मैचिंग और फैक्टरियों से जो सामान शोरूम तक पहुंचते हैं, उनकी भी गतिविधि पर पूरी तरह से नजर रखने का लिए ई-वे बिल्स जैसे पहल किये गये. अधिकारियों का कहना है कि कई कारोबारियों को तो यह लगी कि सरकार   जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर- 3बी का मिलान नहीं करेगी तो ऐसे में उन्होंने दोनों में अलग-अलग आंकड़े भरे.

हालांकि इस बारे में  टैक्स कंस्लटंट्स का कहना है कि दोनों आंकड़ों में अंतर के वाजिब वजह भी हो सकते हैं. चूंकि टैक्स पे करते वक्त कई महीनों से जमा इनपुट टैक्स क्रेडिट का इस्तेमाल मौजूदा अवधि क क्रेडिट के साथ किया जाता है. 

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