सरकार ने जमीन से छेड़छाड़ शुरू की फिर ग्रामसभा ने पत्थलगड़ी शुरू की- जोसेफ पूर्ति

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 03/23/2018 - 12:20

Pravin kumar

Khunti: पत्थलगड़ी को जहां एक ओर ग्रामीण अपना संवैधनिक अधिकार बता रहे हैं, वही दूसरी ओर जिला प्रशासन इसे संविधान की गलत व्याख्या कह रहा है. आखिर क्यों खूंटी में पत्थलगड़ी को लेकर जिला प्रशासन और ग्रामसभा आमने सामने है, इस विषय पर न्यूज विंग के वरीय संवाददाता प्रवीण कुमार ने खूंटी के जोसेफ पूर्ति से बात की. बातचीत का अंश

न्यूज विंग- सरकार के किस विषय से आहत होकर आपने गांव में फिर से पत्थलगड़ी की प्रथा शुरू की  ग्राम सभा से स्वशासन करने की पहल का क्या विषय रहा ?

जोसेफ पूर्ति- आदिवासियों का जीवन जमीन से जुड़ा है यदि जमीन नहीं रहती हैं तो जीवन भी नहीं रहेगा. सीएनटी में इस बावत 46 वां संशोधन हुआ और जितने भी संशोधन हुए सभी अवैध है. इलाके में पत्थलगड़ी की शुरुआत सीएनटी एक्ट संशोधन के विरोध में रैली में गोलीकांड हुआ था एक व्यक्ति मारा गया था. उस समय हमने सोचा कि अब हमें कुछ अलग करना होगा अब ग्रामसभा के अधिकार को जानेंगे और इसे सशक्त करने की सुरूआत की. साथ ही संवैधानिक अधिकारों को पत्थरों पर अंकित करना शुरु किया और आज रिजल्ट सामने है. जल, जंगल ,जमीन को बचाने के लिये पत्थलगड़ी शुरूआत की है. ये पेशा कानून से अलग है. संसद में बनाया कानून ग्राम सभा पर लागू नही है. जमीन से छेड़छाड़ शुरु हुई तब से हमने पत्थलगड़ी शुरु की. खूंटी में 400 कंपनियों ने कंपनी लगाने के लिये रजिस्ट्रेशन करवाया है. रांची के समीप सो़ढ़ा में 210 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था वहां ग्रामीणों ने पत्थलगड़ी की. फिर उस जमीन से कंपनी हट गई. उलीहातू में तेल माइंस है सरकार की इसपर भी नजर है. दस्तावेजों में ये कहा गया है कि जिसकी जमीन उसका खनिज. हम आदिवासी ही इस देश के असली मालिक हैं हम भारत सरकार हैं, ऐसा हमें पता नहीं था पर अब हम अपने अधिकारों को जान गये हैं. हमने संविधान को जाना फिर हमने पत्थलगड़ी कर संविधान को उकेरा. सरकार अनाप- शनाप बयान दे रही है. हमने कोई गलत व्याख्या नहीं की है, किताब खोलकर भी दिखा सकते हैं. वही सरकार के द्वारा खूँटी जिला का निर्माण भी अवैध है. क्योंकि जिला बनाने की लोकाधिसूचना अभी तक जारी नहीं हुई है. जब जिला अवैध है तो जिला प्रशासन के सभी अधिकारी अवैध हैं. उपायुक्त की कार्यशक्ति का प्रसार 5वीं अनुसूची क्षेत्रों पर राज्यपाल के द्वारा नहीं की गयी है. डीसी-एसपी वर्जित क्षेत्रों में घुसकर तानाशाही नहीं दिखा सकते. डीसी और एसपी कहते हैं 5वीं अनुसूची क्षेत्रों पर उनकी कार्यशक्ति का विस्तार हुआ है वे भी संविधान दिखाते हैं. हमें भी पता है ऐसा लिखा हुआ है पर उपबंधों के अधीन. ये उपबंध क्या है ये उपबंध है ग्रामसभा. ये बात एसपी-डीसी क्यों नहीं बताते हैं. रूढ़िवादी व्यवस्था के अधीन रहते हुए आपको काम करना है.

इसे भी पढ़ें:रांची :  राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग, जेवीएम विधायक प्रकाश राम ने नहीं दिखाया बैलेट पेपर, बचाव में उतरे सीपी सिंह

न्यूज विंग- क्या इस इलाके में 5वीं अनुसूची का पालन नहीं किया गया. आपके अनुसार 400 कंपनियों ने खूंटी जिले में जमीन अधिग्रहण के लिये रजिस्ट्रेशन कराया है जो झारखंड मोंमेटम में भी भाग ले चुके हैं तब आपने ग्राम सभा को सशक्त बनाने का निर्णय लिया.

जोसेफ पूर्ति- हां, हमने बाध्य होकर अपने अधिकारों को जानना पड़ा, रिसर्च करनी पड़ी. क्योंकि हम क्या कर सकते थे, सरकार हमें बर्बाद कर विस्थापित कर देना चाहती है. हमने जाना कि हमारे रूढ़िगत परंपराओं से हम बच सकते हैं हमने संविधान से जो अधिकार मिले हैं उन्हें जाना फिर हमने ये शुरु किया. रिजल्ट सामने है और अभी खूंटी से पूरब की ओर खूँटकटी क्षेत्र में  एक भी जमीन अधिग्रहण नहीं हो पाया है. भाजपा का इतना बड़ा नेता अमित शाह उलीहातू आया था एक शौचालय का उद्घाटन करने के लिए जो भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष है, ये एक ढकोसला था-ढोंग था. वो यहां शौचालय का नहीं माइंस का उद्घाटन करने आये थे,  ये हम सब तमाशा देख रहे थे. उस समय उलीहातू के लोगों को डराया-धमकाया गया था. जब पत्थलगड़ी करने की कोशिश हुई तो मान सिंह मुंडा को जेल भेज दिया गया था. इसके बाद फिर से उलीहातू के लोग खुद ही पत्थलगड़ी करने वाले है. पड़ासी को सांसद कड़िया मुण्डा ने गोद ले लिया बाद में पता चला कि वहाँ सोना है. उलीहातू को भी गोद लिया गया तिलमा ,तारूब को भी गोद लिया गया है. वहां भी तेल पझर रहा है उसको भी सरकार और कंपनी के लोग जानते है. ऐसा ही हाल गुदड़ी,  मनोहरपुर प्रखंड का है. पूरे इलाके में सोना बिछा हुआ है. सरकार आदिवासियों को विस्थापित कर विनाश करना चाहती है. हमें इन सबसे बचना है, तब हमें पत्थलगड़ी जैसे कदम उठाना पड़ा. सरकार हमें बुड़बक समझ के आदिवासियों को अंधेरे में रख रही है. अब हमने सभी अधिकारों को जाना,  समझा और सीखा अब हम इन अधिकारों का अनुपालन कर रहे हैं तो सरकार कह रही है इन्होंने संविधान की गलत व्याख्या की है. सरकार के लिये जमीन अधिग्रहण करना गलत नहीं है पर हमारे लिये यह गलत है .

 

न्यूज विंग-  ग्राम सभा में पत्थलगड़ी हो रही है, कहा जा रहा है वो नोट छापेगी, अलग देश की मांग की जा रही है, क्या यह सच है ?

जोसेफ पूर्ति- ये गलत है कि ग्राम सभा कभी नोट नहीं छापेगी,  ये अफवाह है. ये वैसे लोग हैं जो अपने आपको चर्चा में बनाये रखना चाहते हैं और मीडिया वाले भी इसे मसाला के रूप में देखते हैं. वे प्रतियोगिता की दौड़ में लिखते रहे हैं. ग्राम सभा अलग देश की मांग नहीं कर रहा है, पूरा भारत देश आदिवासियों का है. ये लैंड रेवेन्यू एक्ट 1921, 1972 में स्पष्ट रूप से बोलता है. आदिवासियों का ही पूरा देश है. तो अलग देश का मांग कर रहे है ये कहना गलत है .

इसे भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव आज, इस बार वोट देने के लिए नहीं बल्कि अपना वोट खराब करने के लिए इनाम का ऑफर, साहू और संथालिया के बीच होगी जोरदार टक्कर

न्यूज विंग-  वर्तमान व्यवस्था से नाखुश होते हुए सरकारी स्कूल बंद करके अपनी शिक्षण व्यवस्था शुरू की आखिर क्यों ?

जोसेफ पूर्ति- अब सरकार हमें एसटी-एससी का जो हमें आरक्षण मिला था अब खत्म करते जा रही है. सरकार हमारे उपर तीखा हमला कर रही है. ज्यूडिशियल स्कूलों में पढ़ा रहे हैं और सरकार आरक्षण खत्म कर दिया है. इसलिये ग्राम सभा के अपने शिक्षण व्यवस्था बनाकर अपने भूभाग पर लागू कर सकती है. कॉलेजों में पॉलिटिकल साइंस में लोकतंत्र की पढ़ाया जाता है. मगर हमारे परंपरागत व्यवस्था 5वीं अनुसूची,  सीएनटी, विलकिंसन रूल  के बारे में पढ़ाई नहीं होती. हम चाहते हैं शत-प्रतिशत आरक्षण मिले और ट्राईबल सब प्लान का पैसा ग्राम सभा को मिले. जब तक ये नहीं होगा हमारे बच्चे स्कूल नहीं जायेंगे. सभी विषयों के साथ रूढ़िगत व्यवस्था भी सिलेबस में होगी, इन्ही शर्तों के साथ ही बच्चे स्कूलों में लौटेंगे. यह मांग हमारी पूरी नहीं हो जाती तब तक सरकारी स्कूल में ग्रामसभा नहीं लौटेगी.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

City List of Jharkhand
loading...
Loading...