सरकार को नहीं अल्पसंख्यकों की चिंता, झारखंड के हिस्से का 800 करोड़ हो गया लैप्स

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 04/13/2018 - 14:20

Md. Asghar Khan

Ranchi : अल्पसंख्यक कल्याण के लिए झारखंड सरकार की उदासीनता का अंदाजा राज्य में ठप पड़े अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम (एनएमडीएफसी) की हालत देखकर लगाया जा सकता है. सरकार अगर इनके कल्याण के लिए सचेत होती तो राज्य के गठन के बाद से अब तक अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम को मिलने वाली कम से कम अनुमानित 800 करोड़ की राशि शायद लैप्स नहीं हो पाती. जानकारों का मानना है कि झारखंड में मुस्लिम आबादी काफी पिछड़ी हुई है और इनकी आर्थिक स्थिति दयनीय है. इसलिए अगर राज्य में अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम सक्रिय होता तो कम से कम इस राज्य के कोटे में 50 करोड़ रुपया हर साल आता ही. और अगर शुरु में ही एनएमएफडीसी का गठन हो गया होता तो अब तक राज्य को 800 करोड़ की राशि मिल चुकी होती. ऐसा ही मानना झारखंड अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. शाहिद अख्तर का भी है. गौरतलब है कि एनएमडीएफसी के तहत 2017-18 में झारखंड के पड़ोसी राज्य बंगाल को 200 करोड़ और बिहार को लगभग 100 करोड़ की राशि मिली है. 2011 जनगणना के अनुसार झारखंड में कुल सवा तीन सौ करोड़ में से अल्पसंख्य समुदाय की आबादी 63 लाख बताई जाती है. इसमें सबसे अधिक 47 लाख मुस्लिम हैं, जिनमें 45 प्रतिशत युवा बेरोजगार हैं.

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सरकार ने नहीं की कोशिश

राज्य अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम सुचारु ढंग चले, इसके लिए झारखंड के पूर्व अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन डॉ शाहिद अख्तर ने भी प्रयास किया. उनका कहना है कि एनएमएफडीसी के लोन प्रक्रिया प्रारंभ करने के लिए सीएम को पत्र तक लिखा. इसके अलावा विभागीय मंत्री, नेशनल और स्टेट एनएमएफडीसी के एमडी के साथ कई बार बैठक की. हर बार मुझे आश्वस्त किया गया कि जल्द ही इसे शुरु किया जायेगा. लेकिन सरकार की ओर से वैसी कोशिश नहीं की गई, जैसी मुझे उम्मीद थी. डॉ शाहिद एनएमएफडीसी निष्क्रियता की वजह इसके अधिकारियों की उदासीनता को मानते हैं. उनके मुताबिक इससे हर साल 50 करोड़ से भी अधिक राशि से अल्पसंख्यक समाज वंचित रह जाता है. इसपर अल्पसंख्यक मामलों के जानकार और आमया के अध्यक्ष एस अली कहते हैं कि इस संस्था की निष्क्रियता दर्शाती है कि सरकार अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए संजीदा नहीं है. यही वजह है कि इसके तहत केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ अल्पसंख्यक समुदाय नहीं ले पाता है. राज्य में अल्पसंख्यक युवा वर्ग व्यवसाय के लिए न्यूनतम साधारण ब्याज दर पर मिलने वाले लोन से वंचित है.

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गठन के बाद भी नहीं मिला लाभ

बिहार पुर्नगठन अधिनियम 2000 के आधार पर नियमानुसार झारखंड में सभी सरकारी और संवैधानिक संस्थाओं का गठन होना था. इसके अंतर्गत अल्पसंख्य राज्य वित्त एवं विकास निगम (एनएमडीएफसी) गठन किया जाना था, जिसकी लगातार मांग की जाती रही है. लेकिन 12 साल तक तमाम सरकारें इसके गठन को लेकर सुस्त रहीं. एस. अली बताते हैं कि राज्यपाल के हस्तक्षेप के बाद ही तब की तत्कालीन सरकार ने 12.07.2012 को एनएमडीएफसी का गठन किया. लेकिन गठन के बाद भी बीते छह साल में किसी भी अल्पसंख्यक युवा को इसका लाभ नहीं मिल सका है. केंद्र सरकार अल्पसंख्यों के कल्याण के लिए गंभीर है. भारत सरकार ने अल्पसंख्यकयों के लिए कई नई स्कीम शुरु की है, लेकिन झारखंड सरकार उसे धरातल पर लाने में उदासीन है. सरकार की इसी लपरवाही की वजह से प्रति वर्ष राज्य का 50 करोड़ लैप्स कर जाता है, जिससे हजारों युवाओं को स्वरोजार हेतु लोन उपल्बध कराया जा सकता था.

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वेबसाइट पर झारखंड की स्थिति

दो टर्म के बाद भी ठप

झारखंड में अल्पसंख्यक वित्त निगम गठन के बाद भी ठप पड़ा हुआ है. 2012 में इसका गठन हुआ और 2016 में पुनर्गठन. लेकिन नियमानुसार अब तक अल्पसंख्य कोटे से दो सदस्यों का मनोयन तक नहीं हो पाया. जबकि गठन के दो साल बाद संस्था को स्थायी कार्यालय मिला. इधर बीते छह साल में एक बार भी राष्ट्रीय अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम को राशि आवांटित करने का प्रस्ताव नहीं भेजा गया. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच प्रकोष्ठ के संयोजक नाजिश हसन कहते हैं कि अल्पसंख्यकों के प्रति सरकार गंभीर नहीं है. राज्य में पिछले चार साल से पूर्ण बहुमत की सरकार है, लेकिन एनएमडीएफसी को सक्रिय नहीं किया गया. इससे सरकार को ही नहीं, बल्कि अल्पसंख्यकों का भी हर साल 50 करोड़ का नुकसान हो रहा है. हमारी मांग है कि जल्द से जल्द एनएमडीएफसी को सक्रिय किया जाए ताकि अल्पसंख्यकों को स्वावलंबन और स्वरोजगार हेतु लोन मुहैया हो सके. उधर एनएमडीएफसी के ऑफिशियल वेबसाइट पर दूसरे राज्यों के डिटेल्स तो अपडेट हैं पर झारखंड के बारे में 'नॉट स्टार्टेड लिखा हुआ मिला. अब सवाल यह है कि सरकार क्यों इस संवैधानिक संस्था की निष्क्रियता पर खमोश है. क्या 'सबका साथ सबका विकास' के नारे महज चुनावी जुमले हैं या फिर ऐसी संस्थाओं का काम जमीन नहीं, बल्कि कागजों तक ही सीमित है.

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सरकार ने नहीं दिया जी.जी लेटर

राष्ट्रीय अल्पसंख्य वित्त एवं विकास निगम के एमडी मोहम्मद शहबाज अली कहना है कि झारखंड सरकार की तरफ कई बार मांग जाने के बाद भी गवर्नमेंट ने गारंटी लेटर नहीं दिया है. इसी कारण झारखंड को लोन एलोकेशन नहीं हो पाता है, और काम रुका हुआ है. उन्होंने कहा कि एनएमएफडीसी को लोन आवंटित करने से पहले राज्य सरकार को जेनरल लोन एग्रीमेंट करना होता है, जो किया जा चुका है. लेकिन जी.जी लेटर अब तक नहीं दिया गया.

एनएमएफडीसी की स्थिति बहुत खराब

झारखंड राज्य अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम के प्रबंधक निदेशक का अतिरिक्त पदभार संभाल रहे हर्ष मंगला का कहना है कि एनएमएफडीसी की स्थिति बहुत खराब है. इसके गठन के बाद से अबतक इसे स्थायी एमडी नहीं मिल पाया. एकाउंट अपडेट नहीं है और न ही शेयर कैपिटल आया है. स्टॉफ की भी कमी है. सब अपडेट किया जा रहा है, उम्मीद है अगले वर्ष लोन राशि आवंटित करवाने की प्रक्रिया शुरु हो जायेगी.

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क्या और कैसा काम करता है वित्त निगम

एनएमडीएफसी का गठन कंपनी एक्ट 1956 के तहत 30 सितंबर 1994 में हुआ. इसी के तहत विभिन्न राज्यों ने इसका गठन किया गया. निगम का कार्य अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों स्वावलंबी बनाने हेतु ब्यवसाय और तकनीकी शिक्षा के लिए न्यूनतम दर पर लोन उपलब्ध करना है. राज्य अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास अधिनियम अल्पसंख्यक आबादी और जरुरत के अनुसार लोन राशि के लिए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम को हर साल बजट प्रस्ताव भेजती है. इसके बाद ही निगम राशि को आवंटित करता है. अल्पसंख्यक राज्य वित्त एवं विकास निगम का अध्यक्ष, कल्याण विभाग का सचिव होता है, जबकि एक प्रबंध निदेशक होगा. कल्याण विभाग के विशेष सचिव इसके निदेशक होंगे. इसके अलावा भी कई निदेशक होते हैं, जबकि दो गैर सरकारी प्रतिष्ठित अल्पसंख्यक व्यक्ति को सदस्य के लिए मनोनीत किया जाता है. हालांकि मोदी सरकार ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम के बजट को 2015 में 1500 से बढ़ाकर 3000 करोड़ कर दिया है. जिसे शेयर कैपिटल कोष के माध्यम से विभिन्न राज्यों के एनएमएफडीसी को आवंटित किया जाता है. दूर्भाग्यपूर्ण ये है कि झारखंड में इसका गठन हुए छह साल हो गए हैं, पर आज तक इसके तहत एक पैसे भी राशि का लाभ नहीं मिल सका है.

केंद्र और राज्य की योजना का लाभ

व्यवसाय के लिए 3 से 6 प्रतिशत साधारण ब्याज दर पर टर्म लोन योजना. व्यवसाय के लिए 6 प्रतिशत साधारण ब्याज दर पर कलस्टर ऋण योजना. तकनीकी शिक्षा के लिए 3 प्रतिशत साधारण ब्याज दर पर शैक्षणिक लोन योजना. छोटे कारोबार के लिए 5 प्रतिशत साधारण ब्याज दर पर लघु ऋण योजना.    

- 3 प्रतिशत साधारण ब्याज दर पर महिला समृद्ध योजना.

- ट्रेनिंग और दुकान के लिए 3 प्रतिशत साधारण ब्याज पर दर पर मुख्यमंत्री श्रम शक्ति योजना.

- 5 प्रतिशत साधारण ब्याज दर पर पांच लाख रुपये तक के लोन के लिए मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक रोजगार योजना.

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