संथाल परगाना के सरकारी विद्यालयों में अब नहीं होगा कृषि अवकाश

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 05/10/2018 - 21:40

Pravin kumar

दामिन इकोह के साथ-साथ संथाल परगना के सभी जिलों में कृषि अवकाश नहीं होंगे. सरकारी विद्यालय में आजादी से पूर्व से चली आ रही पंरपरा पर इस साल विराम लग जायेगा. यह परंपरा संथाल परगना के सरकारी विद्यालयों में आजादी से पूर्व से ही रही थी. कृषि अवकाश समाप्त करने का निर्णय विद्यालय के अवकाश में एकरूपता लाने के उदेश्य से लिया गया है. कृषि अवकाश की परंपरा समाप्त होने से संथाल पंरगना के करीब 11 हजार विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे अपने परिजनों को कृषि कार्य में सहयोग नहीं कर पायेंगे.

क्यों थी कृषि अवकाश की परंपरा ?

जनकार मानते है कि संथाल परगाना के लोगो की अजीविका का मात्र स्रोत कृषि कार्य था. ऐसे में बरसात के मौसम में कृषि कार्य में बच्चे अपने परिजनों का सहयोग करते थे. साथ ही संथाल परगाना का इलाका काफी दुर्गम था बरिश के मौसम में नदी नालों में पानी भर जाने के कारण बच्चों को विद्यालय पहुचने में काफी कठिनाई होती थी.

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कब तक मिलता था कृषि अवकाश, इसके क्या थे लाभ

वर्ष 2017 तक संथाल पंरगना के सभी जिलों के विद्यालयों में गर्मी की छुट्टी के स्थान पर कृषि अवकाश दिया जाता था. इस अवकाश से ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावकों को कृषि कार्य में बच्चे भी सहयोग करते थे, वहीं बच्चो में कृषि कार्य संबंधी समझ का विकास होता था, जिससे अगर वह कोई दूसरा कार्य नहीं कर पाते थे तो अपने खेतों में कृषि कार्य करने की समझ विकसित रहती थी.

क्या कहते है संथाल परगना के क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक अशोक कुमार शर्मा

संथाल परगान के विद्यालय में कृषि अवकाश 2017 तक दिया जाता रहा है लेकिन इस बार जिला के विद्यालय प्रवर्तन दल और शिक्षकों के साथ मुख्य सचिव के साथ हुए वीडियों क्रांफेंस में यह विचार उभरा की विद्यालय के अवकाश में एकरूपता होनी चाहिए इसके बाद कृषि अवकाश पर विराम लग गया है.

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क्या कहते है आदिवासी एकता मंच के संयोजक सागेन मुर्मू

संथाल परगना में कृषि अवकाश देने की परंपरा रही है. कृषि अवकाश के दैरान बच्चे अपने अभिभावक के साथ कृषि कार्य का हुनर सीखते थे. साथ ही परिजनों के कृषि कार्य में लगे होने के कारण घर के पलतू पशुओं की देखरेख करने के काम में सहयोग करते थे. कृषि अवकाश बंद होने से शहरी क्षेत्र पर तो इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर होगा. अब बच्चे कृषि के परंपरागत हुनर नहीं सीख पाएंगे और वह अपने मूल जड़ से कटते जाएंगे.

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