झारखंड में कैसे सुधरेगा शिक्षा का स्तर, जब शिक्षकों को मानदेय देने में ही छूट रहे हैं सरकार के पसीने

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 06/09/2018 - 18:24

Ranchi : झारखंड में शिक्षा विभाग की लापरवाहियों की पोल आये दिन खुलती रहती है. साथ ही कोई ना कोई मामला ऐसा सामने आ खड़ा होता है, जो सरकार की किरकिरी कराने के लिये काफी होता है.   सरकार के खिलाफ नारेबाजी और आंदोलन होता है तो जल्दी से आश्वासन का मरहम भी लगा दिया जाता है. कुछ ऐसा ही राज्य के पारा शिक्षकों के साथ हो रहा है. जिनका लगभग 5 महीने से मानदेय बकाया है और अब वे अपनी तंगहाली में जीवन गुजार रहे हैं. आर्थिक तंगी ऐसी हो गयी है कि दो वक्त की रोटी पर भी आफत आ गयी है. पारा शिक्षकों की यह स्थिति शिक्षा विभाग की लापरवाही की ही एक बानगी है.

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पैसे के अभाव में इलाज नहीं करा पाने से कई शिक्षकों की हो चुकी है मौत 

पारा शिक्षकों को पिछले 5 महीने से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है. जिससे उनके सामने गंभीर संकट की स्थिति है. लेकिन सरकार का ध्यान इस ओर बिल्कुल नहीं है. पारा शिक्षकों को कभी भी  मानदेय का भुगतान नियमित रूप से नहीं किया जाता है. इलाज के अभाव और मानसिक तनाव में लगभग हर महीने एक पारा शिक्षक की मृत्यु हो रही है. जिसे ना तो कोई देखने वाला है और ना ही मदद के लिये कोई हाथ ही आगे है. अब हालात ये हैं कि अपने ही कमाये गये पैसे लेने के लिये   भी आंदोलन का रूख करना पड़ रहा है.

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आर्थिक तंगी से परेशान शिक्षक ने की थी आत्महत्या

पारा शिक्षकों में एक 35 वर्षीय लोकेश नाथ उर्फ लोकेश्वर महतो जोगोमिया प्रखंड की बड़की सीधाबारा पंचायत के बुधुटांड़ निवासी हैं. आर्थिक तंगी से जूझ रहे इस शिक्षक ने खुद को ही खत्म कर लिया.  लोकेश नाथ ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. दिव्यांग लोकेश नव प्राथमिक विद्यालय बेंदी में कार्यरत थे. बताया जाता है कि उन्होंने स्कूल में शौचालय का निर्माण कराया था. लेकिन विभाग ने पैसे का भुगतान नहीं किया. जिन लोगों ने शौचालय के लिए सामग्री दी थीवे लगातार पैसे के लिए तगादा कर रहे थे. इससे परेशान होकर 4 जून की रात लोकेश ने अपने घर में ही फंदे से झूलकर अपने जीवन को समाप्त कर लिया. 

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जान गंवा चुके हैं कई शिक्षक

वहीं इससे पहले भी चार पारा शिक्षक आर्थिक तंगी की वजह से जान गंवा चुके हैं. पारा शिक्षक सुखदेव महतो जो नावाडीह प्रखंड की चपरी पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय मुंगो के निवासी थे, ये भी अपनी जान गंवा चुके हैं. सुखदेव महतो पैसे के अभाव में बीमारी का  इलाज कराने में असमर्थ थे. उनकी मौत इलाज के अभाव में हो गई.  इसके अलावा पारा अश्विनी महली जो चंदनकियारी प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय बोआ में कार्यरत थे और पारा शिक्षक सुंदरलाल रविदास जो नावाडीह के नव प्राथमिक विद्यालय बरई में कार्यरत थे, इन दोनों ने ही आर्थिक तंगी की वजह से आत्महत्या कर ली.  इससे पहले पारा शिक्षक शुकर महतो जो नावाडीह के पोखरिया पंचायत के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में कार्यरत थे उनकी भी मौत आर्थिक तंगी की वजह से हुई थी.

झारखण्ड प्रदेश पारा शिक्षक संघ के संरक्षक विक्रांत ज्योति ने कहा  

इस बारे में प्रदेश के पारा शिक्षक संघ के संरक्षक विक्रांत ज्योति ने कहा कि पारा शिक्षकों को 5 माह से मानदेय नहीं मिला है और मानदेय मिलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं. जबकि शिक्षा सचिव का यह आदेश है कि किसी भी परिस्थिति में पारा शिक्षकों का मानदेय हर महीने के 5 तारीख तक हो जाना चाहिए. अन्यथा संबंधित विभागीय पदाधिकारी पर कार्रवाई होगी.

लेकिन आज तक न तो कभी समय पर पारा शिक्षकों का पेमेंट हुआ है और न कभी विभागीय पदाधिकारी पर इस लापरवाही को लेकर कोई कार्रवाई हुई है. जरूरत है संबंधित पदाधिकारी पर कार्रवाई होने की. ताकि समय पर  मानदेय मिलता रहे.

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