अगर उत्तराखंड का फैसला झारखंड में हुआ लागू तो तुरंत दस हजार पुलिसकर्मियों की करनी होगी बहाली

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 05/16/2018 - 21:19

Chandi dutta jha

Ranchi : नैनीताल हाइकोर्ट ने उत्तराखंड पुलिस के काम के घंटे तय करने के लेकर जनहित याचिका में अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने प्रदेश सरकार को एक दिन में केवल घंटे की ड्यूटी तय करने के आदेश दिए हैं. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा है कि अवकाश के दौरान कार्यरत रहने के एवज में पुलिस कर्मियों को एक माह नहीं बल्कि 45 दिन का अतिरिक्त वेतन दिया जाए. न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति शरद शर्मा की संयुक्त खंडपीठ ने मंगलवार को फैसला सुनाया है. अगर इस फैसले पर झारखंड सरकार भी अमल करती तो शायद यहां भी कार्यरत पुलिसकर्मी को कई तरह की परेशानी से मुक्ति मिलेगी. झारखंड में पुलिसकर्मी से 16 घंटे ड्यूटी ली जाती है. ड्यूटी के बाद भी विशेष काम के लिए वापस बुला लिया जाता है. यानि कहा जाए तो झारखंड में पुलिसकर्मी की ड्यूटी के लिए 24 घंटे तैयार रहना पड़ता है. अगर झारखंड में भी यह नियम लागू कर दिया जाए तो 10,000 पुलिसकर्मी की तत्काल नियुक्ति करनी होगी.  

काम के बोझ से परेशान रहते हैं पुलिसकर्मी

झारखंड पुलिस काम के बोझ के चलते भारी दबाव में काम करने को मजबूर है. विभाग के ही अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पुलिस पहले क्राईम और अपराध संभालने का ही काम करती थी. पर अब ऐसा नहीं है. अब तो शादी विवाह में प्लेट उठाने का काम हो या आवास गार्ड में नियुक्त पुलिसकर्मी का सब्जी लाने का कार्य हो, हर तरह का कार्य लिया जाता है. ट्रैफिक में कार्यरत पुलिसकर्मी एक ही शिफ्ट में काम करने को मजबूर है. पुलिस स्टेशन में भी पुलिसकर्मी कई तरह की अव्यवस्था के बीच ड्यूटी करने को मजबूर हैं.

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बुनियादी सुविधा का अभाव

पुलिस एक्ट में काम का समय तय नहीं है. इस कारण से पुलिस कर्मी 16 घंटे काम करने को मजबूर हैं. पुलिसकर्मी आज भी कई तरह की बुनियादी सुविधा के अभाव में जीने को मजबूर हैं. उनके आवास आदि की व्यवस्था सही नहीं है. अवकाश नहीं मिलने से पारिवारिक उत्तरदायित्व का सही मायने में निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं. हालत यह है कि पुलिस कर्मी मानसिक दबाव के चलते कई बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं. काम के अधिक घंटे व अवकाश की कटौती के लिए एक माह का वेतन देने की घोषणा तो सरकार ने किया, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और है.

राज्य के पुलिस अस्पताल है बेकार

झारखंड में पुलिस कर्मी और उनके परिजन के लिए स्वास्थ्य परीक्षण जिलों में अस्पताल की व्यवस्था की गयी है. कई जैप परिसर में भी अस्पताल की व्यवस्था की गयी है. लेकिन इन अस्पतालों में सुविधा के नाम पर डॉक्टर तक का मिलना मुश्किल है. झारखंड पुलिस के लिए सुपर स्पेशलिटी हॉस्पीटल का भी यही हाल है. असुविधा के कारण यहां इलाज कराने से कतराते हैं.

क्या कहते हैं प्रदेश उपाध्यक्ष

झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन के उपाध्यक्ष ने बताया कि राज्य में पुलिस के लिए कोई नीति नहीं है. पुलिस नीति का निर्माण पुलिस मुख्यालय को करना चाहिए, जबकि यह काम आईएएस के जिम्मे दिया गया है. सरकार पुलिस के प्रति उदासीन रवैया अपना रही है.

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