अवैध माइनिंग का मामला: हजारीबाग में एनजीटी की टीम, तीन बिंदुओं पर रहेगा फोकस

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 03/05/2018 - 19:49

HAZARIBAGH : हजारीबाग-कोडरमा जिले में अवैध माईनिंगवन्य जीवों के दुष्प्रभाव और प्रदूषण की जांच के लिए दिल्ली एनजीटी द्वारा गठित टीम हजारीबाग पहुंच गई है. टीम में कुल छः सदस्य हैं, जो दो भागों में बंट कर वैज्ञानिक और कानूनी तरीके से अलग-अलग विषयों में अलग-अलग क्षेत्रों में फोकस कर जांच करेंगे. एनजीटी में इस मामले के सूचक सत्यप्रकाश भी इस जांच और वस्तुस्तिथि पर करीब से नजर बनाए हुए हैं. मामले की 29 जनवरी को हुई सुनवाई के बाद जांच टीम के गठन के बाद हजारीबाग-कोडरमा जिला प्रशासन द्वारा कार्रवाई पर उनकी पैनी निगाह है. उनका मानना है कि जांच टीम के सामने सबूत मिटाने की कोशिश की जा रही है. फिलहाल उनकी नजर जांच कर एनजीटी को सौंपे जाने वाली रिपोर्ट पर है.

प्रदूषण और वन्यजीवों पर प्रभाव पर इन इलाकों में रहेगी नजर

दिल्ली एनजीटी द्वारा प्रदूषणवन्य जीव और अवैध माइनिंग के लिए गठित जांच टीम अलग-अलग बिदुओं पर जांच कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी. सूचक सत्यप्रकाश का कहना है कि कोडरमा में अवैध माईनिंग के लिए वन विभाग के कागजातों से छेड़छाड़ कर कानून का उल्लंघन किया गया है. ईचाक में नेशनल पार्क के आसपास वन्य जीवों पर प्रभाव पड़ने की अनदेखी कर अवैध पत्थर खुदाई की जाती रही है.

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हजारीबाग में एनटीपीसी का मामला भी रडार पर

हजारीबाग में बहुचर्चित भारत सरकार की महारत्न कंपनी एनटीपीसी के पंकरी बरवाडीह कोल परियोजना का मामला भी एनजीटी के रडार पर है. इसमें कहा गया है कि परियोजना के लिए खनन के बाद परिवहन के लिए एनटीपीसी को जो मार्ग दिया गया था उस मार्ग से कोयले का परिवहन न कर भारी आबादी वाले ईलाकों से एनटीपीसी का कोयला परिवहन किया जा रहा है. जिससे जलवायु और पर्यावरण के प्रदूषण से सार्वजनिक तालाब,नदी और बड़ी आबादी प्रभावित हो रही है. इसके अलावे एनटीपीसी ने माइनिंग क्लियरेंस आदेश लेने के लिए संबंधित क्षेत्र में वन्य जीवों का जो आंकड़ा ग्राम वन सुरक्षा समिति के माध्यम से बताया था, वह भी वन विभाग के आंकड़ों से नहीं मेल खाता है और जो ग्राम सभा दिखाया गया है वह भी तय नियमों पर खरा नहीं उतरता है. ग्राम सभा के नाम पर कुछ लोगों का हस्ताक्षर एक ही व्यक्ति से करा दिया गया है. इसके अलावे एनटीपीसी द्वारा कटकमदाग में रेलवे साइडिंग में भी तय नियम-कायदों का पालन न करते हुए कोयला डंप किया जा रहा है. जिससे गांव में प्रदूषण की समस्या उत्पन्न हो गई है. कटकमसांडी में भी कोयला डंप का अवैध उद्घाटन कर कुछ दिन चलाया गया. जिसका भारी विरोध के बाद जिला प्रशासन ने बंद करते हुए वहां डंप अवैध कोयले को जब्त कर नीलामी करवाने का आदेश दिया था.

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कर्णपुरा इलाके में प्रदूषण और कानून का उल्लघंन कर हो रहा खनन-परिवहन

कर्णपुरा इलाके में कई कंपनियों द्वारा नियमों को ताक में रखकर खनन किया जा रहा है और कई कंपनी खनन की तैयारी में लगी हुई है. विकास का नाम देकर कुछ जनप्रतिनिधि और अधिकारी इन्हीं कंपनियों द्वारा खनन-प्रदूषण नियमों का उल्लंघन कर जनता के विरोध के बावजूद कंपनियों का समर्थन करते हैं. कभी कृषि प्रधान क्षेत्र के नाम से विख्यात कर्णपुरा अब प्रदूषण प्रधान क्षेत्र के रूप में कुख्यात हो गई है. नियम-कानून के पहरेदारों को प्रदूषण और वन्य जीवों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की कोई चिंता नही है.

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