गुमला के वनक्षेत्र में हो रहा अवैध खनन, हिंडाल्को के कारनामे पर वन विभाग बना धृतराष्ट्र (देखें वीडियो)

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 12/19/2017 - 18:31

Pravin Kumar, Gumla : गुमला जिले में हिंडाल्को दशकों से बॉक्साइट का खनन करता आ रहा है. जिस इलाके में खनन कार्य किया जाता है, वहां के लोगों की जीवनशैली ही बदल जाती है. परेशानी का सबब कुछ ऐसा है कि किसी से अपनी पीड़ा कह भी नहीं सकते. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि खनन से पहले उनलोगों का जीवन बेहतर था. खनन शुरू होने के बाद इलाके का विकास तो नहीं हुआ, हां विनाश जरूर हो रहा है. आज इलाके के लोग टीबी जैसी बिमारी का दंश झेलने को मजबूर हैं.

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गुमला में हिंडाल्को कर रही 1983-84 से खनन कार्य

1983-84 से हिंडाल्को गुमला जिला में बॉक्साइट खनन कर रही है. कंपनी सूत्रों के अनुसार नेतरहाट पठार में 13 मिलयन टन बॉक्साइट का भंडार था. हिंडाल्को ने 429,20 हेक्टेयर जमीन सरकार से शुरूआती दौर में लीज पर लिया था. लेकिन आज तक उसका स्टाक समाप्त नहीं हुआ है, जो स्टॉक वर्षों पहले समाप्त हो जाना चाहिए. बाद के समय में कपंनी ने स्थानीय लोगों के साथ एग्रीमेंट कर रैयतों की जमीन भी खनन कार्य के लिए निजि तौर पर ले ली है. एग्रीमेंट की कॉपी आज तक किसी रैयत को कंपनी ने नहीं दी है. जेरोम एवं राकेश रोशन के सर्वे के मुताबिक जो कि गुरदरी गांव के बरपाठ और पोलपोल पाठ, राजाडेरा गांव के नावटोली टोला और कुजाम गांव के रामझरिया टोला एवं गुरूदरी गांव के अम्बाकोना टोला में 94 परिवार को चिन्हित किया गया. जिन्होंने अपनी जमीन हिंडाल्को को बॉक्साइट खनन के लिए दी थी. इन 94 रैयतों के परिवार ने कुल 329.77 एकड़ रैयती जमीन और 3.55 एकड़ गैरमजरूआ जमीन खनन के लिए दिया था. जिसमें से 276.32 एकड़ जमीन से खनन कार्य किया जा चुका है. अब मात्र 21.43 एकड़ जमीन ही शेष रह गयी है, जिसमें खनन किया जा रहा है. कपंनी के लीज के इलाके से खनन किये जाने के बाद वन क्षेत्र से भी अवैध बॉक्साइट खनन निंरतर जारी है.

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पहले से भी बदतर हो गया स्थानीय लोगों का जीवन स्तर

जिला के 230 परिवारों का सर्वेक्षण किया गया. इसमें वैसे परिवार जिनकी नौकरी कंपनी में लगी हुई उनका जीवन स्तर में बदलाव आया है. आर्थिक दशा में सुधार हुआ है. एसे कुल 10 परिवार ही मिले, जबकि 196 परिवार के लोगों का मनना है कि समान्य जिंदगी खनन से पहले ही बेहतर थी. आज भी इलाके की औसत वार्षिक आय मात्र दो हजार रूपये ही है.

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हिंडाल्को को अब कहां से मिल रहा है बॉक्साइट

जनावल के जोयकेम केरकेटा बताते हैं कि हमें कुछ पैसों की जरूरत पड़ी थी. हमने अपनी एक एकड़ जमीन बॉक्साइट खनन करने के लिए हिंडाल्को के ठेकेदार को दिया. जिसके एवज में दो लाख अस्सी हजार रुपये मुआवजा के रूप में दिया गया. हमें किसी तरह का इकरारनामा का कोई भी कागज नहीं दिया गया. बस दो चेक दिये गये. ऐसा सिर्फ हमारे साथ नहीं हुआ. हमारे गांव के कई लोगों ने खनन के लिए जमीन दिया है. सभी के साथ इस तरह ही किया जाता है. जमीन वापस लेने के लिए रैयातों को काफी दौड़-धूप करना पड़तचा है. इसके बाद कंपनी जमीन का समतलीकरण कर रैयत को वापस देती है. जो ग्रामीण कंपनी का चक्कर नहीं काटते, उनके जमीन पर ऐसे ही गड्ढे बना कर छोड़ दिये जाते हैं. पूरे पठारी इलाके में बॉक्साइट के अवैध खनन के हजारों गड्ढे नजर आते हैं. स्थानीय लोगों में हमेशा भय बना रहता है कि उसके पालतू पशु उन गढ़े में ना गिर जाए. खनन होने से पशुओं के चारागाह स्थल की भी कमी हुई है.

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कंपनी के सीएसआर के तहत सिर्फ चुआं बना ककरमपाठ में

ककरमपाठ के ग्रामीणों के अनुसार कंपनी जनावल के इस टोले से बॉक्साइट का तो खनन कर रही है लेकिन जनसुविधा के लिए कोई विशेष काम नहीं कर रही. कंपनी की ओर से कोई सुविधा ग्रामीणों को नहीं मिल रही है. बस गांव में एक चुआं था उसे पक्का किया गया है. वृक्षारोपण के सवाल पर जोयकेम केरकेटा कहते हैं कि इलाके में हिंडालको पौधरोपण कार्य नहीं कर रहा है. बस पौधरोपण कार्य दिखाने के लिए सड़क के किनारे किया जा रहा है. ठेकेदार द्वारा अवैध खनन पूरे पठार में किया जा है. उन स्थान में भी खनन के निशान मिल जायेंगे जहां खनन करना गैरकानूनी है. इस तरह के अवैध खनन से स्थानीय निवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिसे सुनने वाला जिला प्रशासन से लेकर वन विभाग भी समाने नहीं आता. इस अवैध खनन से इलाके में बेतहाशा पेड़ काटे जा रहे हैं. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जिस दिन जिला प्रशासन चाह ले उस दिन से इलाके में बॉक्साइट का अवैध खनन रुक जायेगा. वन विभाग की उदासीनता की वजह से हजारों साल के पेड़ काटे जा रहे है.

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