आदिवासी अधिकार को पूर्ण रूप से लागू करने की मांग को लेकर जयस करेगा एक अप्रैल को संसद का घेराव

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 03/27/2018 - 19:21

Ranchi : जयस के द्वारा रांची में आदिवासी आक्रोश रैली कर सत्ताधारी एवं विपक्षी रजनीतिक दल के नेता को खुली चुनैती दी थी. अदिवासी अधिकार को लेकर आदिवासी युवा किसी तरह का समझौता करने के मुड में नहीं दिख रहे थे. इस रैली में भारी संख्या में आदिवासी युवा शमिल होकर कुर्मी और तेली समाज को आदिवासी की सूची में शमिल करने की अनुंशसा का विरोध किया गया था. साथ ही जयस के द्वारा संसद घेराव कार्यक्रम की भी तैयारी की जा रही थी. जयस ने झारखंड में युवाओं के बीच एक अलग पहचान बनाने की कोशिश की है. जयस के झारखंड प्रभारी संजय पाहन मंगलवार को रांची में पत्रकारों को संबोधित करते हुये जयस का मिशन 2018 के बारे में बताया. आदिवासी अधिकारों को लेकर  एक अप्रैल 2018 को जय आदिवासी युवा शाक्ति के द्वारा दिल्ली में संसद का घेराव किया जाएगा, जिसमें देश के 10 अनुसुचित राज्य से 01 करोड़ आदिवासी समाज के लोग शामिल होंगे. घेराव कार्यक्रम में झारखंड के रांची, गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, खूंटी, लातेहार, हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, सिंहभूम, खरसावां, दुमका, देवघर, गोड्डा, साहेबगंज, पाकुड़ जिला से हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग शमिल होंगे.

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ऐतिहासिक होगा संसद का घेराव : संजय

संजय पाहन ने कहा संसद घेराव ऐतिहासिक होगा, घेराव के माध्यम से अनुसूचित राज्यों में पांचवीं अनुसूची का पूर्ण रूप से अनुपालन करवाने के साथ-साथ कुरमी-तेली समाज को झारखंड/बंगाल में आदिवासी का दर्जा देने के प्रस्ताव को रद्द करने, अनुसूचित जाति जनजातीय अत्याचार निरोधक अधिनियम पर सर्वोच्च न्यायालय के आये निर्देश पर केन्द्र सरकार से पुनर्विचार याचिका दायर करवाने, संविधान में अनुसूचित जनजातीय शब्द के स्थान पर आदिवासी लिखने, देश के विभिन्न राज्यों में विलुप्त हो रहे आदिम जनजाति बैगा, असुर, पहाड़िया, जारवा और ओंगा आदिम जनजाति के विकास और सुरक्षा सुनिश्चित करने, विश्व आदिवासी दिवस पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने आदि मांग को लेकर किया जा रहा है. साथ ही सरकार के द्वारा आदिवासी अधिकारों की जा रही अवहेलना पर भी नाराजगी जतायी. प्रेस कॉन्फ्रेंस में रोहित कच्छप, शाशिकांत उरांव, जितेंद्र मानकी, कमल सिंह मुण्डा, संदीप कुमार बेदिया, मोची राम मुण्डा, विक्की उरांव, कार्तिक उरांव आदि शामिल थे.

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समाज की ताकत क्या होती है यह आने वाले समय में राजनीतिक पार्टियों के गुलाम नेताओं को बतायेगा जयस

डॉ हीरा अलावा राष्ट्रीय जयस संरक्षक ने नई दिल्ली में कहा कि कुछ बीजेपी एवं कांग्रेस के गुलाम लोग जयस के ऊपर आरोप लगाने का कम कर रहे हैं. जयस आदिवासी अधिकार को लेकर युवाओं को चेतना से लैस करने का काम कर रहा है, साथ ही समाज के पढ़े लिखे युवाओं को अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए राजनीति में आने के लिए प्रेरित कर रहा है, तो इसमें गलत क्या है. समाज के अच्छे युवा अगर चुनाव लड़कर विधानसभा और लोकसभा में जाना चाहते हैं तो हम उनका समर्थन भी करेंगे, लेकिन बीजेपी और कांग्रेस के लोग तो हमारे सामाज़ के नहीं हैं, क्योंकि दोनों राजनीतिक दल के खुद हैं और कह रहे हैं कि जयस समाज के नाम पर राजनीति कर रहा है.

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बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं को वोट मांगने के लिए गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जायेगा

डॉ हीरा अलावा ने कहा कि आने वाले समय में दोनों पार्टी के नेताओं को चुनाव में वोट मांगने के लिए गांव में घुसने भी नहीं देना है, क्योंकि ये लोग आदिवासी समाज के नहीं राजनीतिक पार्टी के लोग हैं. यह समाज की बात नहीं करेंगे, क्योंकि यह तो राजनीतिक पार्टी के लोग हैं और ये राजनीतिक पार्टी तो आदिवासी है नहीं और जो आदिवासी नहीं है वह आदिवासी का क्या खाक भला करेंगे, वो समाज को लूटने का ही काम करेंगे.

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