जामताड़ा : जिले में धड़ल्ले से जारी है पहाड़ों पर खनन, अधिकारियों की मिलीभगत से माफिया कर रहे मनमानी

Submitted by NEWSWING on Wed, 01/03/2018 - 13:17

Jamtara : जिले के दर्जनों पहाड़ गायब हो चुके हैं. जो पहाड़ बचे हुए हैं,अब उनपर पत्थर माफियाओं की नजरें गड़ी हुई हैं. माफियाओं के इस काम में खनन विभाग की मिलीभगत भी बतायी जा रही है. जिससे    पहाड़ों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है. एक ओर सूबे की सरकार जल, जंगल और पहाड़ को बचाने की बातें करती है तो दूसरी ओर खुद खनन विभाग उसी पहाड़ को खत्म करने में जरा भी नहीं कतरा रहा है.जिसका नताजी यह है कि जिले के कई एकड़ में फैले पहाड़ आज खत्म होने के कागार पर है.

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एनजीटी के नियम के विरूद्ध  खनन का काम जारी है

वहीं एनजीटी के नियम के विरूद्ध भी पहाड़ पर खनन किया जा रहा है. केलाही पहाड़ जो अपनी खुबसूरती व सौंदर्य के लिए जाना जाता है. अब खनन के बाद इन पहाड़ों का अस्तित्व पूरी तरह से खत्म हो चुका है. वहीं गोडल पहाड़ी पर हर दिन 200 डंफर हाईवा पत्थर का खनन धड़ल्ले से किया जा रहा है. इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि खनन विभाग ने 33 एकड़ का लिज तीन अलग अलग नाम से दिया है, लेकिन उसका मालिक एक की व्यक्ति है. जो रांची में  ही रहकर जामताड़ा जिला में लिज लेने का काम करता है. विभाग ने लीज तो दे दिया गया है, लेकिन इसका सीमांकन नहीं कराया गया है. इसके अलावा लीज कहां से कहां तक दिया गया है इसकी कोई सीमा भी तय नहीं की गयी है. जिससे कंपनी पूरे पहाड़ से ही पत्थर का खनन कर रही है.

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खनन विभाग की अनदेखी

वहीं खनन किये जाने के बाद नियम के अनुसार उन जगहों पर कंपनी के द्वारा गढढों को भरवाना जरूरी है. लेकिन कंपनी ने आज तक एक भी गढढे को भरवाने का काम नहीं किया. जिससे आये दिन किसी ना किसी तरह की दुर्घटना होती रहती है. साथ ही खदान में काम करने वाले मजदूरों की यदि मानें तो रात-दिन खनन का काम जारी रहता है. इसके अलावा मजदूरों का कहना था कि कंपनी के द्वारा उनके स्वास्थ्य का भी ख्याल नहीं रखा जाता है और जो सुविधायें उन्हें मिलनी चाहिए, उसे भी कंपनी अनदेखा करती है.  

पहाड़ों पर लगातार दिन–रात किये जा रहे खनन के काम से गांव की सड़कों पर ओवरलोडेड हाइवा चलते रहते हैं. जिससे सड़कों की हालत जर्जर हो गयी है. गांव की सड़कों पर बड़े बड़े पत्थर निकल आये हैं , इससे ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सड़क र्जजर होने की वजह से आये दिन   किसी ना किसी प्रकार की दुर्घटना घटित होती रहती है.

ग्रामीणों ने कई बार की खनन बंद करने की मांग  

जिले में पहाड़ों पर किये जा रहे खनन के काम का  कई बार ग्रामीणों ने विरोध किया और इसे बंद करने की भी मांग की, लेकिन इसका खनन विभाग पर कोई असर नहीं हुआ. इस बारे में खनन पदाधिकारी भोला हरिजन ने कहा की नियम को देखते हुए कंपनी को लीज दिया गया है. ग्रामीणों से इस संबंध में किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं मिला है.

इससे पहले बोकापहाड़ी जो वहां लोगों की आस्था का प्रतीक है और इसे भी खनन विभाग और पत्थर माफियाओं की मिली भगत से लीज पर देने का काम किया गया. यदि इसी तरह से पहाड़ों के लीज पर देने के काम जारी रहा तो जामताड़ा के नक्शे से पहाड़ गायब हो जायेंगे और लोग इतिहास में भी पढ़ेंगे कि इस जिला में कभी पहाड़ भी हुआ करता था.

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