जामताड़ा में स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी से झोलाछाप डॉक्टरों की चांदी

Submitted by NEWSWING on Fri, 01/12/2018 - 10:22

Jamtara : सरकार जिस स्वास्थ्य व्यवस्था पर करोड़ो रूपये खर्च करती है उसका लाभ जिले के लोगों को ठीक से नहीं मिल पाता है. जिसके कई कारण है. जिले में डाक्टर की कमी से लेकर एएनएम तक की कमी इन कारणों में शामिल है. समय पर स्वास्थ्य उपकेंद्र का नहीं खुलना, केंद्र में एएनएम का आवासन नहीं करना, दवा की समूचित व्यवस्था नहीं होने की वजह से जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से दम तोड़ चुकी है.

झोलाछाप डॉक्टरों की चांदी 

जिले में दम तोड़ चुकी स्वास्थ्य व्यवस्था का लाभ आम लोगों को भले ही नहीं मिल रही हो, लेकिन इसका पूरा लाभ झोलाछाप डॉक्टरों को जरूर मिल रहा है. कारण ये है कि स्वास्थ्य विभाग में ना तो डॉक्टर साहब आते हैं और ना ही एएनएम आती हैं. ऐसी स्थिति में लोग झोलाछाप डॉक्टर के पास जाने को मजबूर हैं. कई बार झोलाछाप डॉक्टर के चक्कर में पड़ कर लोग अपनी जान भी खो बैठते हैं. सबसे बड़ी बात तो यह है कि झोलाछाप डॉक्टर खुद का जेब तो गर्म करते ही हैं साथ में शहर में अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम को भी इसका लाभ पहुंचाने का काम करते हैं.

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शहर के हर इलाके में संचालित है अवैध नर्सिंग होम

शहर के इलाके में अवैध नर्सिंग होम का संचालन किया जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग से बिना रजिस्ट्रेशन कराये अवैध नर्सिंग होम का संचालन होता है. ये नर्सिंग होम क्षेत्र में बिचौलियों को पैसे देकर रखते हैं, और ये बिचौलियों के द्वारा मरीजों को बरगला कर वैसे नर्सिंग होम में भर्ति करवाया जाता है. इलाज के क्रम में कई मरीजों की जाम भी चली जाती है. लेकिन नर्सिंग होम के संचालक उसके परिजनों और विवाद करने वाले लोगों को पैसा खिला कर मुंह बंद करा देते हैं. इतना ही नहीं बहुत से ऐसे नर्सिंग होम है जो दवा दुकान के लाइसेंस पर नर्सिंग होम का संचालन कर रहे हैं.

स्वास्थ्य विभाग के द्वारा नहीं उठाया गया कोई ठोस कदम

जिले में धड़ल्ले से अवैध नर्सिंग होम का संचालन किया जा रहा है. लेकिन इसके बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग के द्वारा इसे रोकने के लिए किसी भी तरह का कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. कई बार कार्रवाई की भी जाती है लेकिन वैसे नर्सिंग होम पर की जाती है जो नियम-कानून को मानकर चलते हैं. और यह भी मात्र एक खानापूर्ति के लिये किया जाता है.

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क्या है जिले में अस्पतालों और स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या

सरकारी अस्पतालों की संख्या -  सदर अस्पताल एक, स्वास्थ्य  केंद्र 132, पीएससी 15, सीएचसी 4.
सरकारी डॉक्टरों की संख्या - स्वीकृत पद 89, कार्यरत 25
नर्सिंग स्टाफ की संख्या - रेगुलर स्वीकृत पद 165, कार्यरत 105, एनआरएचएम के तहत स्वीकृत पद 203 कार्यरत 143
जिले में एंबुलेंस की संख्या - सदर अस्पताल में एक ,कुडहित में 3,नाला में 2, जामताड़ा 2,
शिशु मृत्यु दर - 1000 में तीन

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