जस्टिस लोया मामला : सुप्रीम कोर्ट ने कहा निष्पक्ष होनी चाहिए जांच, केस के सभी दस्तावेज कोर्ट को सौंपें

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 01/22/2018 - 15:34

News Delhi :  जस्टिस लोया की मौत की जांच के मामले में दायर याचिका पर सोमवार को शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने कहा कि इस केस की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.उच्चतम न्यायालय ने सभी पक्षकारों से कहा कि वह जस्टिस लोया मामले में ऐसे दस्तावेज एकत्र करें, जिन्हें अभी तक जमा नहीं किया गया है और उन्हें न्यायालय को सौंपें. उच्चतम न्यायालय ने वकीलों से कहा कि वे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर आक्षेप नहीं लगायें, क्योंकि वह इस मामले में पक्षकार नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आज की स्थिति के अनुसार यह स्वाभाविक मौत है, आक्षेप नहीं लगायें,. कोर्ट ने कहा कि   दो फरवरी को दस्तावेजों का परीक्षण करेंगे.

न्यायालय ने याचिकाओं में उठाये गये मुद्दों को गंभीरबताते हुये कहा कि हमें सभी दस्तावेज बहुत ही गंभीरता से देखने होंगे. एक वरिष्ठ महिला अधिवक्ता के यह कहने पर कि उच्चतम न्यायालय मीडिया की आवाज दबा रहा है, प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने नाराजगी जताते हुए उनसे बयान वापस लेने और माफी मांगने के लिये कहा. उच्चतम न्यायालय ने जज लोया की मौत के मामले में किसी भी याचिका पर सुनवायी करने से सभी उच्च न्यायालयों को रोका है. उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई के विशेष न्यायाधीश बी. एच. लोया की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से जुड़ी बंबई उच्च न्यायालय की दो याचिकाओं को अपने पास स्थानांतरित किया.

इसे भी पढ़ें - जज लोया की संदिग्ध मौत का मामला गंभीर, स्वतंत्र जांच की मांग पर महाराष्ट्र सरकार दे जवाब : सुप्रीम कोर्ट (पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट)

लोया की मौत की संदेहास्पद परिस्थितियों पर उठाए गए सवाल

मालूम हो कि बृजगोपाल लोया के परिजनों से हुई बातचीत का हवाला देते हुए  The Caravan पत्रिका में प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट में लोया की मौत की संदेहास्पद परिस्थितियों पर सवाल उठाये गये थे. इस रिपोर्ट के प्रकाशित किये गये हिस्से में रिपोर्टर से बात करते हुए लोया की बहन ने बताया कि उस समय बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहित शाह ने उनके भाई बृजगोपाल लोया को पक्ष में फैसला देने के लिए 100 करोड़ रुपये का ऑफर दिया था.

इसे भी पढ़ें - पिछले 20 वर्षों में 15 बेहद संवेदनशील मामलों में सुप्रीम कोर्ट के जूनियर जजों ने दिया फैसला

जमीन, घर और पैसे का मिला था ऑफर

लोया की बहन अनुराधा बियानी के मुताबिक, मोहित शाह बृजगोपाल लोया को देर रात में कॉल करके सादे कपड़ों में मिलने के लिए कहते, साथ ही जल्दी और पॉजिटिव फैसला देने का दबाव बनाते थे. अनुराधा के अनुसार मोहित शाह ने उनके मनमुताबिक फैसला देने के एवज में खुद 100 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव लोया के सामने रखा था. अनुराधा ने यह भी बताया था कि मोहित शाह ने लोया से कहा था कि अगर फैसला 30 दिसंबर से पहले आता है तो इस पर किसी का ध्यान नहीं जायेगा क्योंकि उस समय कोई और ऐसी सनसनीखेज स्टोरी होगी, जो सुनिश्चित करेगी कि इस बात पर लोगों का ध्यान न जाए. अनुराधा की इस बात का समर्थन बृजगोपाल लोया के पिता ने भी किया है. उन्होंने रिपोर्टर को बताया कि उनके बेटे को पैसों का ऑफर मिला था. उन्होंने का कि उनके बेटे को यह बताया था कि तुम्हें मुंबई में घर चाहिये, कितनी जमीन चाहिये, कितना पैसा चाहिये, उसे इस तरह के प्रस्ताव मिलते थे. लेकिन लोया के पिता स्पष्ट करते हुये कहा था कि उनका बेटा ऐसे किसी प्रस्ताव के सामने नहीं झुका था. उन्होंने कहा था कि उसने मुझे बताया कि मैं या तो इस्तीफा दे दूंगा या ट्रांसफर ले लूंगा. फिर गांव चला जाऊंगा और खेती करूंगा.

इसे भी पढ़ें - पहली बार CJI दीपक मिश्रा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने किया प्रेस कॉन्फ्रेंस

मामले में अमित शाह बरी

The Caravan की यह रिपोर्ट के मुताबिक रिपोर्टर द्वारा मोहित शाह और अमित शाह दोनों को सवाल भेजे गये थे, लेकिन रिपोर्ट के प्रकाशन के समय तक दोनों ही पक्षों से कोई जवाब नहीं दिया गया. लोया की मौत के बाद एमबी गोसवी को इस केस की जिम्मेदारी दी गयी थी, जिन्होंने 15 दिसंबर को सुनवाई शुरू की. मिहिर देसाई के मुताबिक, गोसवी ने बचाव पक्ष के वकीलों की अमित शाह से आरोप हटाने की दलील 3 दिन सुनीं, जबकि सीबीआई जो कि मुख्य जांच एजेंसी थी, उसकी बहस 15 मिनट में ही खत्म हो गयी. सुनवाई 17 दिसंबर को खत्म हुयी, जिसके बाद गोसवी ने अपना आदेश सुरक्षित रखा. और फिर 30 दिसंबर 2014 को गोसवी ने बचाव पक्ष के वकीलों की बात को सही मानते हुए फैसला सुनाया कि सीबीआई राजनीतिक उद्देश्यों के चलते आरोपी को फंसा रहा है. इसके बाद अमित शाह इस मामले से बरी हो गये 

इसे भी पढ़ें - जज बी एच लोया के पुत्र अनुज लोया ने कहा, पिता की हुई थी स्वभाविक मौत इसमें कोई संदेह नहीं

अगर मेरे परिवार को कुछ होता है तो उसके लिए चीफ जस्टिस व अन्य होगें जिम्मेदारः एनुज लोया

उस दिन को याद करते हुए अनुराधा बियानी ने बताया था है कि उस रोज क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की खबर ही टीवी चैनलों पर बनी रही थी. उन्होंने कहा कि केवल नीचे टिकर में अमित शाह दोषी नहीं लिखकर आ रहा था. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि मोहित शाह लोया के गुजरने के लगभग दो महीने बाद उनके परिवार से मिलने पहुंचे थे. जिस रोज वे उनके परिवार से मिले, बृजगोपाल लोया के बेटे अनुज ने अपने परिवार को एक खत लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि मुझे डर है कि ये नेता मेरे परिवार के किसी भी सदस्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं और मैं इतना ताकतवर नहीं हूं कि इनसे लड़ सकूं. अनुज ने मोहित शाह से मुलाकात के बारे में लिखा था कि मैंने पापा की मौत की जांच के लिए उनसे जांच आयोग बनाने की मांग की है. मुझे डर है कि हमें उनके खिलाफ कुछ भी करने से रोकने के लिए वे हमारे परिवार के किसी भी सदस्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक अनुज के इस पत्र में दो बार यह बात कही गयी थी है कि अगर मेरे या मेरे परिवार के किसी भी सदस्य को कुछ होता है, तो चीफ जस्टिस मोहित शाह और इस साजिश में शामिल अन्य लोग जिम्मेदार होंगे.

इसे भी पढ़ें - जज लोया के भाई समेत कई लोगों को शक- 'अनुज लोया ने दबाव में दिया बयान'

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

 

Main Top Slide
loading...
Loading...

NEWSWING VIDEO PLAYLIST (YOUTUBE VIDEO CHANNEL)