‘गुरू जी’ ने जिस कंचनबेड़ा गांव से की थी अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत, उसी को भूले (देखें वीडियो)

Submitted by NEWSWING on Sun, 01/07/2018 - 18:07

Jamtara : झारखंड की जनता जिन्हें गुरू जी के नाम से बुलाती है, आज वे अपने राजनीतिक जन्म भूमि कंचनबेड़ा गांव को पूरी तरह से भूल गये हैं. जिस कंचनबेड़ा गांव से शिबु सोरेन (गुरू जी) ने महाजनी प्रथा का विरोध का बिगुल फूंका था आज भी उस गांव के लोग आस में हैं कि शायद गुरू जी को कंचनबेड़ा गांव याद आये और गांव का कायापलट हो. शहर से महज एक किलोमिटर की दूरी पर बसा गांव कंचनबेड़ा में एक समय गुरू जी का आशियाना हुआ करता था. वहीं से उन्होंने अपने जीवन काल की राजनीति की शुरूआत की थी. उसके बाद से ही उन्होंने शिबु सोरेन से गुरू जी तक के सफर को तय किया. आज पूरा झारखंड उन्हें गुरू जी के नाम से जानता है. आंदोलनकारी गुरू जी. उनके कदम से कदम मिला कर चलने वाले स्वर्गिय कणेश्वर सोरेन के परिवार आज बदहाली की जिंदगी जी रहे है. आज भी इस गांव में एक नहीं कई समस्या व्याप्त हैं.

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क्या कहते है स्वर्गीय कणेश्वर के परिजन

स्वर्गिय कणेश्वर के बड़े पुत्र बासुकिनाथ हांसदा का कहना है कि जब उनके पिता का देहांत हुआ था तो वे गुरू जी को आमंत्रण पत्र देने गये थे. लेकिन वे गुरू जी से नहीं मिल पाये. इस बात का उन्हें आज भी दुख है. स्वर्गीय कणेश्वर हांसदा की पत्नी सीतामुनी सोरेन ने अपनी नम आंखो से कहा कि एक बार गुरू जी से मिलने का सपना है. उनसे मिल इतना पूछना चाहती हुं कि कोई कैसे किसी को भुला पाता है. हम तो आज तक आपको नहीं भूल पाये.

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वोट बहिष्कार के बाद आयी गांव में बिजली

गांव के लोगों ने बताया कि हम लोगों को हमेशा से यही आशा थी कि गुरू जी एक ना एक दिन इस गांव के बारे में सोचेंगे. लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. शहर के सटे होने के वावजूद भी हम लोगों को गांव में बिजली लाने के लिए आंदोलन करना पड़ा. जब हम लोगों ने विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया तब जाकर हम लोगों के गांव में बिजली आयी. क्या हर बात के लिए आंदोलन जरूरी है. वहीं गांव के मनोज कुमार मुर्मू ने कहा कि इस बार भी चुनाव का बहिष्कार हम लोगों द्वारा किया जायेगा. गांव की र्जजर सड़क की मांग हम लोग कई साल से कर रहें हैं, लेकिन आज तक गांव की सड़क बन नहीं पायी है. सड़क पर पड़े बड़े-बड़े बोल्डरों की वजह से आये दिन दुर्घटनाएं होते रहती हैं. इसलिए हम लोग सिर्फ विधानसभा चुनाव ही नहीं, हर चुनाव का बहिष्कार करेगें. चुनाव का बहिष्कार तब तक किया जायेगा जब तक की सड़क नहीं बन जाती. वहीं उन्होंने कहा कि गांव में आंगनबाड़ी अधूरा पड़ा हुआ है लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. पेय जल की भी किल्लत है. ग्रामीणों ने कहा कि एक समस्या हो तो बतायें, यहां तो समस्या ही समस्या है.

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