चरही महाप्रबंधक की लापरवाही से बन्द होने के कगार पर केदला परियोजना : राजलाल सिंह पटेल

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 03/14/2018 - 21:33

Ramgarh : एन्टी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल कमिटी के फाउंडर सह राष्ट्रीय अध्यक्ष राजलाल सिंह पटेल ने केदला परियोजना की बदहाली के लिए चरही प्रबंधक को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि सेन्ट्रल कोल फील्ड्स लिमिटेड के चरही प्रबंधक की लापरवाही के कारण केदला उत्खनन परियोजना बन्द होने के कगार पर पहुंच चुका है. केदला परियोजना के बन्द होने से सरकार को सलाना अरबों रुपए के राजस्व घाटा होगा. श्री  पटेल ने झारखण्ड प्रदेश कमिटी की बैठक को संबोधित करते हुए बोल रहे थे. उन्होंने बताया कि झारखण्ड में अपार खनिज सम्पदा रहते हुए भी राज्य विकास की रफ्तार नहीं पकड़ रहा है. भ्रष्टाचार एवं पदाधिकारियों की लापरवाही विकास में बाधक बन रही है. इसका जीता जागता उदाहरण है केदला उत्खनन परियोजना. उन्होंने कहा कि अगर चरही क्षेत्र के महाप्रबंधक परियोजनाओं को लेकर गम्भीर रहते और ईमानदारी पूर्वक कार्य करते तो आज केदला परियोजना बन्द होने के कगार पर नहीं रहता.

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क्यों बन्दी के कगार पर पहुंची केदला परियोजना

राजलाल सिंह पटेल ने कहा कि खान सुरक्षा नियमों का अनुपालन नहीं किये जाने के कारण केदला परियोजना आज बन्दी के कगार पर पहुंच गयी है. उन्होंने यह भी बताया कि इसके लिए मुख्य रूप से वरीय पदाधिकारी जिम्मेवार हैं. अगर समय-समय पर वरीय पदाधिकारी परियोजनाओं का निरीक्षण करते तथा नियमानुकूल कार्य करवाते तो यह स्थिति उतपन्न नहीं होती. लेकिन वरीय पदाधिकारी वातानुकूलित कमरों से बाहर नहीं निकलना चाहते हैं.

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कैसे नहीं हुआ खान सुरक्षा नियमों का अनुपालन

श्री पटेल ने कहा कि विगत अगस्त महीने में वे केदला परियोजना का भ्रमण कर रहे थे. इसी दौरान खान सुरक्षा में उन्होंने कई कमियां पायी. परियोजना के अन्दर होल पैक रोड, लाइट वेहिकल रोड और बेंच कटिंग का काम तक नहीं हुआ था. वहां की सुरक्षा भगवान भरोसे ही थी. जिस पर श्री पटेल ने गम्भीर होकर पीएमओ एवं श्रम तथा रोजगार मंत्रालय भारत सरकार को पत्र लिखा. उनके पत्र के आलोक में निदेशक खान सुरक्षा द्वारा जांच की गयी. जांच के बाद खान सुरक्षा महानिदेशालय द्वारा माइंस एक्ट 1952 के सेक्शन 22(A) के तहत बन्द करने का निर्देश दिया गया है. खान सुरक्षा महानिदेशालय के पत्रांक संख्या-Admin-11/1515 दिनांक 14/02/2018 के माध्यम से उन्हें प्रेषित पत्र के अवलोकन व अध्ययन से यह स्पष्ट होता है.

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इस लापरवाही से हो सकती है दुर्घटना

एसीसीसीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि खान सुरक्षा के नियमों का अनुपालन सुनिश्चित नहीं होने के कारण कभी भी किसी भी समय खान में हादसा हो सकता है. कितने कर्मियों की जानें जा सकती हैं. कितने कर्मी घायल हो सकते हैं. गोड्डा की ललमटिया एवं रामगढ़ की सियाल परियोजना की खान हादसा इस बात का उदाहरण है. इसके बावजूद भी महाप्रबंधक गंभीर नहीं हैं.

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ये थे मौजूद

इस मौके पर संस्था के साइबर क्राइम कंट्रोल सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आकाश शर्मा, मेडिकल सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सचिन गुप्ता, राष्ट्रीय महासचिव एमडी शाहिद अली, राष्ट्रीय संयुक्त सचिव राजदीप रंजन, महिला सेल की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष केशर प्रवीण, लीगल सेल के प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता प्रकाश रंजन, गलु महतो, महेश महतो सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे. बैठक की अध्यक्षता झारखण्ड प्रदेश अध्यक्ष शशि सिंह एवं संचालन युवा सेल के प्रदेश अध्यक्ष पिन्टू मालाकार ने किया.

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