NEWSWING EXCLUSIVE: नौ लाख कंबलों में सखी मंडलों ने बनाया सिर्फ 1.80 लाख कंबल, एक दिन में चार लाख से अधिक कंबल बनाने का बना डाला रिकॉर्ड, जानकारी के बाद भी चुप रहा झारक्राफ्ट

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 03/19/2018 - 18:55

Akshay Kumar Jha 
Ranchi:
ठंड में गरीबों को दिए जाने वाले कंबलों में भी घोटाला कर देना, यह काम कोई झारक्राफ्ट और झारखंड सरकार के अफसरों से सीख सकता है. सखी मंडल और बुनकर समिति को रोजगार का दिलासा दिला कर घोटाला कर देना. सरकार की तरफ से ऐसा करने वालों पर कार्रवाई नहीं करना. ‘बेदाग सरकार’ का ‘दंभ’ भरने वाले लोगों की मंशा पर सवाल उठाता है. सीएम ने 25 से ज्यादा बार इस बात की घोषणा की कि इस बार कंबल सखी मंडल और बुनकर समिति बनाएगा और राज्य का पैसा राज्य में ही रहेगा.

दरअसल, महिला सखी मंडलों से कंंबल बनवाने की घोषणा करने से पहले सरकार ने किसी तरह की कोई तैयारी नहीं की थी. सरकार में शामिल कुछ लोगों का कहना है कि कम समय होना इस घोटाले का कारण बना.  तो ऐसे में सीएम की तैयारी और घोषणाओं पर  सवाल उठता हैं. फिलवक्त जवाब देने वाला कोई नहीं है.

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20 फीसदी कंबल ही झारखंड में बन सके, सरकार ने बटोरी झूठी प्रशंसा
कंबल घोटाले की खबर की पड़ताल करते हुए पता चला कि सखी मंडल और बुनकर समिति ने मिलकर नौ लाख में से करीब 1,8000 कंबल ही अपने हाथों से तैयार किए थे. बाकी करीब 7,20000 कंबल बाजार से खरीदे गए. वो भी बिना किसी टेंडर के. इस बात की कोई मनाही नहीं थी कि कंबल कहां से और कितने में खरीदना है. ऐसा होने से बिचौलियों की इच्छा पूरी हो गयी.  बाजार से कंबल लाकर उसपर झारक्राफ्ट का लोगों साट कर झारखंड की गरीब जनता के बीच कंबल को बांटा गया. यानि सरकार की तरफ से कंबल बनाने के नाम पर सिर्फ झारक्राफ्ट का स्टीकर चस्पा किया गया. सरकार को भी यह कहने का मौका मिल गया  कि उसने झारखंड की महिलाओं को रोजगार मुहैया कराया. इसे झारखंड सरकार की झूठी प्रशंसा बटोरने की कड़ी मान कर भी देखा जा सकता है. इस सरकार एेसे कई मामले उजागर हुए हैं.

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एजी ने मामले को लेकर झारक्राफ्ट को लिखे सात लेटर
कंबल घोटाला का पर्दाफाश शायद ही हो पाता. कंबल खरीद मामले की ऑडिट करते वक्त एजी (महालेखाकार) ने खरीद में हुई अनियमितता को पकड़ा. एक-के-बाद-एक, एजी ने झारक्राफ्ट को कुल सात चिट्ठी लिखी है. एजी के सवालों का जवाब अब सरकार को नहीं सूझ रहा है. झारक्राफ्ट ने कंबल खरीद मामले में फाइल भी ठीक से तैयार नहीं की है. ऑडिट के दौरान आसानी से घोटाले के पर्दाफाश हो रहा है. 

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झारक्राफ्ट का दावा एक दिन में टार्गेट से ज्यादा बने चार लाख कंबल
जितने कंबल बनने थे, वो सारे हस्त करघा से बनने थे. हस्त करघा की रफ्तार किसी से छिपी नहीं है. कंबल की खरीदी बाहर से करने के बाद झारक्राफ्ट ने जो फाइल तैयार की उसमें दावा किया गया है कि एक दिन में सखी मंडल और बुनकर समिति ने करीब 3.60 लाख से ज्यादा कंबल तैयार कर लिए. हस्त करघा से एक दिन में 10 कंबल औसतन रफ तरिके से तैयार किया जा सकता है. काफी तेजी से काम हो तो 15 कंबल तक तैयार किए जा सकते हैं. लेकिन झारक्राफ्ट का दावा है कि एक हस्त करघा से 60-70 कंबल तैयार कर लिए गए. टारगेट से करीब 3.60 लाख कंबल ज्यादा.

जारी....

अगली कड़ी में पढ़ें, कैसे कागजों पर राज्य भर में गरीबों तक पहुंचाये गये कंबल.

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