अवैध कमेटी की अनुशंसा पर डीजीपी ने एसपी आवास में महिला सिपाही का यौन शोषण करने वाले सार्जेंट व रीडर को किया निलंबन मुक्त !

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 03/09/2018 - 17:39

Sweta Kumari
Ranchi
: बीते 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया गया. महिलाओं के उत्थान को लेकर बड़ी-बड़ी बाते की गयीं. राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास की सुरक्षा का जिम्मा महिला सिपाहियों को दिया गया. महिलाओं के उत्थान के लिए सीएम ने कई घोषणायें की और यह भी कहा कि हम झारखंड में महिलाओं को मालकिन बनाना चाहते हैं. लेकिन जब महिला सुरक्षित ही नहीं होगी तो मालकिन कैसे बनेगी. जब महिला झारखंड सरकार के ही विभागों में हर दिन पुरूष साथियों की गलत हरकतों की शिकार बनेंगीं, तो मालिकाना हक कहां रह जायेगा. महिलाओं के सम्मान से खेलने वाले को बचाने वाला कोई और नहीं है, बल्कि राज्य पुलिस के मुखिया डीजीपी हैं. जो कई बार खुद तो कानून तोड़ते देखे ही जाते हैं, इस मामले में उन्होंने आरोपियों को उस कमिटि का रिपोर्ट के आधार पर निलंबन मुक्त कर दिया जो कमिटी वैधानिक रूप से अवैध है.  महिला पुलिस विभाग में सिपाही है और जामताड़ा के एसपी के आवासीय कार्यालय में पदस्थापित थी. वहीं की एसपी भी एक महिला ही हैं.    
सीएम साहब.. आपने तो महिलाओं को मालकिन बनाने का ऐलान कर दिया. लेकिन देखिये ना आपके ही पुलिस विभाग में यह क्या हो रहा है. इस विभाग के मंत्री भी आप ही हैं. जहां महिलाओं के दुश्मन विभाग के लोग ही बन बैठे हैं और महिलाओं पर मालिकाना हक जता रहे हैं. चूंकि पुलिस विभाग में ही कार्यस्थल पर महिलाओं का अधिकारी और सहकर्मी यौन शोषण कर रहे हैं और विरोध करने पर आरोपी को ही विभाग क्लिन चिट दे रहा है तो ऐसे में तो हक तो गया तेल लेने.

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कार्यस्थल पर यौन शोषण की प्रतीकात्मक तस्वीर

क्या है पूरा मामला

दरअसल पूरा मामला जामताड़ा की उन तीन महिला पुलिसकर्मियों का है, जिनकी ड्यूटी एसपी जया रॉय के आवासीय कार्यालय में लगी थी. कार्यस्थल पर ही प्रभारी सार्जेंट मेजर अशोक कुमार और एसपी के रीडर शशिकांत कुशवाहा के द्वारा यौन शोषण का शिकार बनीं.  शिकायत करने पर जिला  के एसपी ने कोई कार्रवाई नहीं की. तब तीनों महिला सिपाही आईजी सुमन गुप्ता के पास पहुंची और मामले की शिकायत की.  6 दिसंबर को  आईजी सुमन गुप्ता ने जब दोनों आरोपियों को  निलंबित कर दिया, तब एसपी की नींद खुली.  जैसे ही उन्हें इसकी सूचना मिली, उन्होंने शिकायत की जांच के लिए एक आंतरिक कमेटी का गठन कर दिया. आंतरिक कमेटी ने आरोपियों को क्लीन चीट दे दिया और आंतरिक कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों को डीजीपी के स्तर से निलंबन मुक्त कर दिया गया.

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पूरे मामले की शुरूआत सितंबर 2017 से शुरू हुई. जब एसपी के आवासीय कार्यालय में कार्यरत तीन महिला पुलिसकर्मियों ने एसपी जया राय के रीडर शशिकांत कुशवाहा पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया. एसपी जया राय से इस बारे में महिला पुलिसकर्मियों ने मिलकर शिकायत भी करना चाहा,  लेकिन रीडर ने उन्हें कभी मिलने नहीं दिया. दरअसल एसपी के गोपनीय आवासीय कार्यालय में रीडर आये दिन महिला पुलिसकर्मियों को भद्दी- भद्दी बातें कहा करता था और इशारों–इशारों में सेक्सुअल संबंध बनाने की बात करता था. लेकिन महिला पुलिसकर्मियों के साफ मना करने और झिड़क देने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी दिया करता था. साथ ही एसपी मैडम (जया राय ) से कहकर पोस्टिंग जिला मुख्यालय से दूर करवाकर परेशान करवाने की धमकी दिया करता था. 

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कार्यस्थल पर यौन शोषण की प्रतीकात्मक तस्वीर

महिला पुलिसकर्मियों से क्या कहता था एसपी का रीडर शशिकांत कुशावाहा
1.    बताओ तुम्हारा पीरियड की तारीख क्या है.
2.    मेरे साथ एक बार अकेले में समय बिताओ तो तुन्हें अच्छी पोस्टिंग दिलवा दूंगा.
3.    मेरी बात तुम्हें समझ नहीं आती, एक बार खुद को मेरे सुपुर्द कर दो तो फिर देखो कितना ऐश करवाता हूं.
4.    इसके अलावा रीडर कुशवाहा अक्सर महिला पुलिसकर्मियों को जबरन अनचाहा स्पर्श करता था और ड्यूटी में लंच टाइम में अकेला पाकर पास आकर बैठना और परेशान करना उसकी आदत थी.     

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इस पूरे मामले की शिकायत कई बार महिला पुलिसकर्मियों ने एसपी से मिलकर करना चाहा तो रीडर ने उन्हें मिलने नहीं दिया. फिर इन महिला पुलिसकर्मियों ने जया राय को फोन करके पूरे मामले से अवगत कराया. लेकिन एसपी होने के नाते जया राय ने मामले में कभी भी कोई कार्रवाई नहीं की. फिर भी महिला पुलिसकर्मियों ने लगातार उनसे कार्रवाई करने की मांग दोहराती रहीं.  
इन सबके बीच सभी महिला पुलिसकर्मियों ने आईजी रेल सह दुमका प्रक्षेत्र, दुमका सुमन गुप्ता से मिलकर अपनी समस्या को सामने रखा और साथ ही इस संदर्भ में 5 दिसंबर 2017 को एक लिखित आवेदन दिया. जिसमें साफ तौर पर लिखा था कि किस तरह से जामताड़ा गोपनीय रीडर शशिकांत कुशवाहा और प्रभारी सार्जेंट मेजर अशोक कुमार ने उन्हें मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित किया. इस मामले के संज्ञान में आते ही आईजी ने पूरे तथ्यों से वाकिफ होते हुए दोनों आरोपियों को 6 दिसंबर 2017 को निलंबित कर दिया. लेकिन ठीक 6 दिसंबर के ही दिन निलंबन के आदेश पर एसपी जया राय ने आरोपियों का बचाव करके हुए उसी दिन एक आंतरिक कमिटि का गठन कर दिया.  और खुद उस कमिटी की परजाइडिंग ऑफिसर बन गयीं. साथ ही एसडीपीओ पूज्य प्रकाश और महिला थाना प्रभारी विजया  कुजूर को कमेटी का सदस्य बना दिया.

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आंतरिक कमेटी का क्या है नियम

कार्यस्थल पर यौन शोषण की शिकायतों की जांच के लिए आंतरिक कमेटी बनाने का नियम है. नियम के अनुसार तो हर कार्यालय में यह कमेटी पहले से गठित होनी चाहिए. लेकिन जामताड़ा में इस नियम का पालन नहीं किया जाता है. किसी भी आंतरिक कमिटि के गठन में एक स्वतंत्र सदस्य (जो किसी भी सरकारी पद पर स्थापित ना हो) को रखने का नियम है.  एसपी जया राय ने इस मामले में इसका पालन नहीं किया. साथ ही इस तरह के मामले में महिला अधिकारियों को सदस्य बनाया जाता है, लेकिन एसपी ने यहां भी एसडीपीओ पूज्य प्रकाश को कमिटी का सदस्य बनाया. जो कि पुरुष हैं.  यानि कि कुल मिलाकर आंतरिक कमिटि का गठन ही पूरी तरह से अवैध था. तो ऐसे में जांच पूरी तरह से सवालों के घेरे में है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर

आंतरिक जांच कमेटी के समक्ष महिला सिपाहियों ने पेश किए थे 10 अॉडियो-वीडियो सीडी

आंतरिक जांच कमेटी गठित होने के बाद महिला पुलिसकर्मियों ने 17 दिसंबर 2017 को SDPO पूज्य प्रकाश से मिलकर मामले की जानकारी दी. लेकिन उन्होंने इसे लिखित रूप में देने को कहा. तब महिलाकर्मियों ने 22 दिसंबर 2017 को ही पूरे मामले की जानकारी लिखित रूप में दिया. अपने लिखित बयान में महिला पुलिसकर्मियों ने साफ लिखा है कि किस तरह से एसपी के रीडर द्वारा उनका मानसिक और शारीरिक रूप से उत्पीड़न किया गया. लिखित बयान में  यह भी आरोप लगाया गया है कि किस तरह रीडर ने उन्हें कॉम्प्रमाइज करने को कहा और नहीं मानने पर ड्यूटी के दौरान अंजाम भुगतने की बात कही गयी. वहीं इस कमिटि के गठित होने के बाद भी आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इस मामले में महिला पुलिसकर्मियों ने 10 सीडी भी आंतरिक जांच कमिटि को सौंपा था. कमेटी, जिसके परजाइडिंग ऑफिसर खुद एसपी जया राय थी, उन्होंने आरोपियों द्वारा महिला सिपाहियों को कही गयी भद्दी–भद्दी बातों को सामान्य बातचीत बता दिया. साथ ही एसपी ने यौन शोषण के साक्ष्य नहीं होने की बात भी अपने निष्कर्ष में लिखा है.  पूरे मामले की जांच काफी धीमी चल रही थी. काफी दिन तक की कार्रवाई ना होता देख महिला कर्मियों ने एसपी, डीआइजी, आइजी, डीजीपी, मुख्यमंत्री सहित अन्य अधिकारियों से भी इसकी शिकायत की थी. 
पूरे मामले की जांच के दौरान जो सीडी पीड़िताओं ने पेश किये थे , उसे देखने सुनने के बाद आईजी सुमन गुप्ता ने इसे सेक्सुअल हरासमेंट का मामला पाया. साथ ही उन्होंने पाया कि पूरे मामले में एसी जया राय के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किया गया, बल्कि इसकी सत्यता की जांच ना कराके मात्र इसे सामान्य वार्तालाप बताया गया. साथ ही उन्होंने कहा कि जबकि एक सीडी में गवाह द्वारा साफ तौर पर बताया गया है कि कैसे रीडर के द्वारा एसपी के नाम पर पैसों की वसूली का जाती है और साथ ही स्कूटी भी ली गयी है. आईजी सुमन गुप्ता ने पूरे तथ्यों को देखते हुए पुलिस मुख्यालय को भेजे गए अपने रिपोर्ट में कहा था कि इस मामले में पहले ही ना तो की कानूनी कार्रवाई हुई और ना ही जांच में सामने आये तथ्यों पर ध्यान दिया गया.

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sexual harassment act

जया राय ने किया 4( 2 ) (ए ) (बी ) (सी ) का उल्लंघन कर किया आंतरिक कमिटि का गठन
जामताड़ा एसपी ने इस मामले में  आईजी, संथानपरगना क्षेत्र सुमन गुप्ता द्वारा इस मामले में कार्यालय द्वारा जो निर्देश दिया गया था , उसका कोई अनुपालन नहीं किया. और ना ही मामले में कोई संज्ञान लिया है. आइजी ने पुलिस मुख्यालय को जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें साफ लिखा है कि एसपी ने आंतरिक कमेटी के गठन के क्रम में the sexual harassment of women at workplace (prevention, prohibitation and redressal) act-2013 के प्रावधानों (4( 2 ) (ए ) (बी ) (सी )) का उल्लंघन किया है. इस वजह से आइजी ने एसपी जया राय से स्पष्टीकरण की भी मांग की है. 

जारी...

कल पढ़िये, पीड़ित महिला पुलिसकर्मियों की जुबानी, यौन शोषण की दास्तान.

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