सामूहिक दुष्कर्म के एक आरोपी को 10 वर्ष का सश्रम कारावास, पांच हजार जुर्माना

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 03/24/2018 - 19:33

Pakur : सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी मांझी मरांडी को पाकुड़ व्यवहार न्यायालय के एडीजे वन रमेश कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने दोषी करार देते हुए 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. साथ ही पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर दो माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. जबकि मानवेल हेम्ब्रम नामक एक अन्य आरोपी का जुवेनाइल कोर्ट में मामला विचाराधीन है. इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों पर ट्रायल चल रहा है.

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पहाड़िया युवती ने हिरणपुर थाना में सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था

उल्लेखनीय है कि 16 वर्षीय पहाड़िया युवती ने 22 अगस्त 2012 को हिरणपुर थाना में सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था. जिसमें कहा गया था कि पीड़िता अपनी एक सहेली के साथ साहेबगंज जिले के बोरियो प्रखंड स्थित आदिम जनजाति आवासीय बालिका उच्च विद्यालय बंदरटोला से हिरणपुर स्थित गांव जा रही थी. वनांचल एक्सप्रेस ट्रेन से दोनों पाकुड़ स्टेशन पर संध्या सात बजे उतरी. जहां दोनों के भाई उनका इंतजार कर रहे थे. सभी लोग ऑटो से तोड़ाई पहुंचे. जहां से पैदल वे चारों अपने गांव जा रहे थे.

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सात युवकों ने किया था दुष्कर्म

पतरापाड़ा के पास आसंजोला जाने वाली सड़क पर सात व्यक्ति शराब पी रहे थे. वहां से जैसे ही चारों आगे बढ़ेसभी शराबी चारों का पीछा करने लगे. कुछ दूर जाने के बाद सातों बदमाशों ने पीड़िता एवं उसकी सहेली के भाईयों को बुरी तरह पीटकर भगा दिया. और धनगढ़ा पहाड़ पर ले जाकर क्रमश: दोनों के साथ चार और तीन व्यक्तियों  ने बारी-बारी से दुष्कर्म किया और भाग गये. इसके बाद वे किसी तरह पतरापाड़ा पहुंची और फिर अपने घर वालों को फोन कर वहां बुलाया. इसके बाद हिरणपुर थाने में मामला दर्ज कराया गया. एफआईआर के अनुसार सभी युवक 20 से 30 वर्ष के थे, तथा संथाली बोल रहे थे.

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घटना स्थल से मिला था मोबाइल

घटना स्थल से एक मोबाइल मिला था, जिसमें दो सिम एयरटेल और यूनिनॉर कंपनी का लगा हुआ था. एडीजे के न्यायालय में जीआर 700/12 सेशन संख्या 139/12 के अंतर्गत मामला चल रहा था. जिसमें शनिवार को आरोपी मांझी मरांडी को न्यायालय ने दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर दो माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता निरंजन मिश्रा, जबकि सरकारी पक्ष की ओर से लोक अभियोजक शिवेंद्र कुमार सिंह ने पैरवी की.

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