पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 192 राजस्व ग्राम को जोड़ने का हो रहा है विरोध, समस्या नहीं सुलझी तो नक्सल आन्दोलन को मिल सकता है नया सहारा

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 05/15/2018 - 19:07

Manoj Dutta Deo

Latehar : लातेहार जिला अन्तर्गत पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र के आसपास के 192 अन्य राजस्व ग्राम को बिना ग्राम से अनुमति लिए साथ ही पांचवी अनुसूची की धज्जियां उड़ाते हुए वन विभाग भूमि का अधिग्रहण तेजी से कर रही है. जिसका आये दिन विरोध लातेहार जिला मुख्यालय सहित विस्थापित किये जाने वाले ग्राम में देख जा रहा है.

 

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16300 एकड़ जमीन अधिग्रहण की योजना है

पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में लातेहार जिला के गारू प्रखंड के 45, महुआडांड़ प्रखंड के 45, बरवाडीह प्रखंड के 79 एवं मनिका प्रखंड के 23 राजस्व ग्राम की कुल 16300 एकड़ जमीन को अधिग्रहण करने की परियोजना पलामू टाइगर रिजर्व की है. जिसके तहत लातेहार जिला के उत्तर की दिशा में स्थिति बरवाडीह प्रखंड के केचकी नाका से दक्षिण की दिशा में स्थित महुआडांड़ प्रखंड के चेतमा ग्राम तक एवं पूरब की दिशा में स्थित गारू प्रखंड के विजयपुर ग्राम से पश्चिम दिशा में स्थित छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित बारकोर ग्राम तक के राजस्व अदा करने वाले ग्रामीणों को विस्थापित करने की योजना है. जिसकी प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है और विरोध प्रदर्शन एवं संघर्ष भी जारी है.

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ग्रामीणों पर जबरन जमीन अधिग्रहण का दबाव बनाया जा रहा

पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र आदिवासी बहुल क्षेत्र है. रिजर्व क्षेत्र के अंदर और बाहर केवल अनुसूचित जनजाति के एवं आदिम जनजाति के लोग निवास करते हैं और इनकी हक अधिकार और सुरक्षा के लिए संविधान की पांचवी अनुसूची में सुरक्षित भी रखा गया है. जहां स्पष्ट लिखा गया है कि बिना ग्रामीण और ग्रामसभा की अनुमति लिए कोई भी उनकी ज़मीन का अधिग्रहण नहीं कर सकता है. बावजूद नियम को ताक पर रखकर वन विभाग के अधिकारी आदिवासियों की अधिग्रहित करने की योजना बना ली है. और ग्रामीणों पर जबरन जमीन अधिग्रहण करने का दबाव बना रहे हैं.

जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध में लगातार जारी है आन्दोलन

भूमि अधिग्रहण का विरोध कई बैनरों के तले किया जा रहा है, जिसमें पायलट प्रोजेक्ट नेतरहाट फिल्ड फायरिंग रेंज विरोध, जन संघर्ष समिति झारखण्ड, इंडीजीनस पीपुल्स फोरम, आदिवासी अधिकार मंच, जागरुकता मंच गुमला, सीपीआईएम आदि शामिल है. मामले को लेकर पूर्व सांसद वृंदा करात ने भी 25 अगस्त को प्रभावित ग्राम के ग्रामीणों से मुलाकात की थी. इसी विरोध प्रदर्शन की एक कड़ी में मंगलवार को त्रिपुरा पूर्वी क्षेत्र के सीपीआईएम सांसद जितेन चौधरी ने प्रभावित ग्राम के ग्रामीणों के साथ लातेहार माको चौक से जिला मुख्यालय स्थित प्रदर्शन स्थल पूर्व नगर पंचायत तक पैदल मार्च किया एवं जनसभा कर ग्रामीणों के साथ अपना विरोध दर्ज कराया.

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समस्या नहीं सुलझी तो नक्सल आंदोलन को मिल सकता है बल

पलामू टाइगर रिजर्व के यदि 192 ग्राम के भू-अर्जन की समस्या नहीं सुलझी तो नक्सल आंदोलन माओवाद को सहारा मिल सकता है. क्योंकि लातेहार जिला में दम तोड़ती नक्सल आंदोलन माओवाद का पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र गढ़ है, जहां से वे अपनी योजना को बनाते हैं और कार्रवाई करते हुए घटना को अंजाम देते है. विगत दिनों ग्रामीणों पर बढ़ती पुलिसिया दबाव के कारण माओवादी को प्रभावित होने वाले ग्रामीणों का सहयोग नहीं मिल रहा और माओवादी झारखण्ड और छत्तीसगढ़ की सीमा स्थित बुढा पहाड़ के इलाके में सिमट कर रह गए हैं. मगर जिस तरह से वन विभाग ज़मींदारी प्रथा की तर्ज पर भूमि अधिग्रहण करना चाहती है, जिससे बौखलाए ग्रामीण अपनी मदद की मांग को लेकर माओवाद की शरण में जा सकते हैं. यदि ग्रामीण माओवाद की शरण में गए तो जिला में दम तोड़ती माओवाद आंदोलन को क्रांति का नया सहारा एवं जरिया मिल सकता है और पुनः माओवादी जिला के प्रभावित होने वाले 192 ग्रामों में अपना पैर पसार लेंगे.

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