पेसा कानून में ही छिपा है झारखंड के विकास का सूत्र : बंदी उरांव (देखें वीडियो)

Publisher NEWSWING DatePublished Sun, 01/14/2018 - 12:56

Pravin Kumar

Ranchi:  बंदी उरांव 16 जनवरी 2018 को 86 साल के हो जायेंगे. बंदी झारखंड के एक ऐसे शख्सियत हैं जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी अपने विचारों, सिद्धांतों और झारखंडी जनमानस के हित के लिए लगा दिया. इन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कुछ ऐसे काम किये हैं जो कि संवैधानिक प्रावधान के रूप में पूरे देश में लागू है. 1980 में गिरिडीह जिले के एसपी के पद पर रहते हुए बंदी उरांव ने नौकरी से त्यागपत्र देकर कार्तिक उरांव के प्रेरणा से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की. पेसा कानून को लेकर इन्होंने लंबा संघर्ष किया है और यह मानते हैं कि झारखंड का विकास तभी हो सकता है अक्षरशः पेसा कानून राज्य में लागू हो.

इसे भी पढ़ें: झारखंड के शीर्ष दो अफसरों पर संगीन आरोप, विपक्ष कर रहा कार्रवाई की मांग, सरकार की हो रही फजीहत, रघुवर चुप

इसे भी पढ़ेंः रघुवर दास सीएस राजबाला वर्मा पर एहसान नहीं कर रहे, बल्कि एहसान का बदला चुका रहे हैं : विपक्ष

एसपी की नौकरी छोड़ राजनीति में आये थे बंदी

बंदी उरांव ने अपने जीवन के बारे में बताया कि उनका जन्म. 16 जनवरी 1931 को गुमला जिले के दतिया गांव में हुआ था. उन्होंने रांची जिला स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा 1947 में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की. उन्होंने कहा कि मुझसे पहले ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों में कार्तिक उरांव प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थी थे. कार्तिक उरांव गुमला जिला के ग्रामीण क्षेत्र के मेधावी छात्र थे, जिन्होंने प्रथम श्रेणी से मैट्रिक की परीक्षा उर्तीण की. इसके बाद उन्होंने पटना साइंस कॉलेज से पढ़ाई पूरी की और इंजीनियरिंग कर के विदेश चले गये. कार्तिक उरांव चाहते थे कि मैं भी उनकी तरह इंजीनियर बनूं, लेकिन मैं बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर पुलिस सेवा में गया. 1980 में मैं गिरिडीह जिला में एसपी बना. नौकरी में रहते हुए त्यागपत्र देकर कार्तिक उरांव के कहने पर राजनीति में आया. इसके बाद सिसई विधानसभा क्षेत्र से लगातार विधायक रहा, लेकिन मेरे लिए जीवन की सबसे बड़ी खुशी तब हुआ जब लोक सभा में पंचायत विस्तार अधिनियम 1996 में पास हुआ.

इसे भी पढ़ेंः डीजीपी डीके पांडेय ने एडीजी एमवी राव से कहा था कोर्ट के आदेश की परवाह मत करो !

नेता और अधिकारी पेसा कानून के बारे में नहीं जानते

बंदी उरांव ने बताया कि भूरिया कमिटी के द्वारा पंचायत राज्य विस्तार अधिनियम तैयार किया गया. इस कानून को बनाने में स्व. बीडी शर्मा के साथ मिलकर हम सबने काम किया. आदिवासी पंरापरा और स्वशासन को कलमबद्ध करने का काम किया. जब कानून पास हो गया तो इसे लेकर गांव-गांव में पत्थरगड़ी की गयी, ताकि हमारी आने वाले पीढ़ी ग्रामसभा के शक्तियों को देखे, पढ़े और अपने जीवन में अत्मसात करे. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रशासन द्वारा पत्थलगड़ी पर सवाल खड़ा करना गैर संवैधानिक है. राज्य के नेता और अधिकारी पेसा कानून नहीं जानते. अगर वह इसे पूरी तरह पढ़ कर समझ जाते तो आज राज्य का विकास होता. राज्य में कमीशनखोरी का मामला भी नहीं होता. राज्य में ग्रामसभा को अधिकार दिया जाता तो आज राज्य में विकास का दूसरा ही नजारा रहता.

इसे भी पढ़ें: मंत्री रंधीर सिंह का पार्टी के खिलाफ बयान, कहा - 'बीजेपी से मतलब नहीं, पार्टी हमें तेल लगायेगी' (देखें-सुनें क्या कहा कृषि मंत्री ने)

करप्शन तभी खत्म होगा जब पेसा कानून अक्षरशः लागू होगा

उन्होंने कहा कि राज्य के विकास के लिए जरूरी है कि राज्य को करप्शन से मुक्ति मिले. जब तक करप्शन के कोर से राज्य को मुक्ति नहीं मिलेगी. तब तक न आदिवासियों का और न ही राज्य का विकास हो सकता है. ऐसी अवस्था में पेसा कानून को राज्य में पूरी तरह लागू करना चाहिए, तभी राज्य का विकास होगा.

अब तो सिर्फ चुनाव के वक्त राजनेता जाते हैं गांव

बंदी उरांव ने कहा कि राज्य के राजनेता गांव नहीं जाते हैं. वह सिर्फ चुनाव में ही गांव जाते हैं, इसलिए उन्हें करप्शन कर धन जमा करना पड़ता है और चुनाव लड़ना पड़ता है. चुनाव में पैसे खर्च करने पड़ते हैं. मैं अपने समय में काफी कम संसाधनों से चुनाव लड़ता था और जीतता था. पैसे का बंदरबांट चुनाव में नहीं होता था. जनप्रतिनिधियों द्वारा किये गये कार्यों का आकलन करते हुए जनता वोट देती थी और इस वोट से लोग जीतते थे.

Bandi oraon
Bandi Oraon

इसे भी पढ़ें: लैंड माइन ब्लास्ट में घायल हाथी को बचाने में जुटा वाइल्ड लाइफ

राजनीति में अब नहीं बचा है सिद्धांत, विचार और आदर्श

उन्होंने कहा कि राज्य में भाजपा और संघ जैसी ताकतों के बढ़ने का मुख्य कारण यह है कि उनके राजनेता आज गांव-गांव जा रहे हैं. लोगों के सुख-दुख में भागीदारी कर रहे हैं, जबकि दूसरे दलों के लोग यह काम नहीं कर रहे हैं. इसी कारण झारखंड जैसे राज्य में झारखंडियों को बांटकर भाजपा और संघ के लोग शासन की बागडोर थामे हुए हैं. वर्तमान राजनीति में सिद्धांत, विचार और आदर्श नहीं बचा है, जिस कारण राज्य की दशा बदतर होती जा रही है.

कार्तिक उरांव के आदर्श का झारखंड बने

बंदी उरांव किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. अपने जीवन के 86 साल देख चुके हैं. राज्य की राजनीतिक हालत और राज्य के जनमानस की हालत पर आज भी दुखी हैं. वे चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध हो पाये. इसके लिए ऐसे राजनेता के राज्य को जरूरत है जो कि राज्य की जनमानस की इच्छा और आकांक्षाओं को समझते हुए विकास की नयी रूपरेखा तैयार करे. कार्तिक उरांव के आदर्श का झारखंड बनाया जाये.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

Main Top Slide
City List of Jharkhand
loading...
Loading...

NEWSWING VIDEO PLAYLIST (YOUTUBE VIDEO CHANNEL)