पाकुड़ः निलंबित नगर थाना प्रभारी ने पुलिस एसोसिएशन से न्याय की लगाई गुहार

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 05/21/2018 - 13:00

Pakur: चर्चित बेथनी क्रिश्चियन स्कूल के प्रिंसिपल डेनियल एमानुएल पर लगे छेड़खानी एवं पोक्सो एक्ट के मामले में थाना प्रभारी पर हुई कार्रवाई की बात झारखंड पुलिस एसोसिएशन एवं वरीय पुलिस पदाधिकारियों में ठन गई है. उल्लेखनीय है कि प्रभारी आईजी ने पाकुड़ नगर थाना प्रभारी आरक्षी निरीक्षक इंदु शेखर झा पर निलंबन की कार्रवाई करते हुए विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई है. परिणाम स्वरूप इंदु शेखर झा फिलवक्त निलंबित कर दिए गए हैं. लेकिन उन्होंने स्वयं पर लगाये गए गंभीर आरोपो एवं निलंबन के विरुद्ध झारखंड पुलिस एसोसिएशन को सूचित करते हुए स्वयं को निर्दोष बताया है और एसोसिएशन के द्वारा अविलंब पहल करने का अनुरोध किया है.

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क्या है पूरा मामला

9 अप्रैल 2018 को नगर के मारवाड़ी पट्टी स्थित बेथनी क्रिश्चियन स्कूल में एक छात्रा के द्वारा प्राचार्य डेनियल एमानुएल पर छेड़खानी का आरोप लगा. मोहल्ले के लोगों एवं पीड़ित के अभिभावक द्वारा विद्यालय को घेर लिया गया. नगर थाना को इसकी सूचना मिली. नगर थाना प्रभारी ने अविलंब कार्रवाई करते हुए आक्रोशित लोगों के बीच से पेट्रोलिंग पार्टी के द्वारा प्राचार्य को थाने ले आया गया. पीड़िता के परिजनों के आरोप पर थाना कांड संख्या 60/18 आईपीसी की धारा 354 A पोक्सो एक्ट के तहत प्राचार्य डेनियल को जेल भेज दिया गया. इसके बाद प्राचार्य के परिजनों ने गिरफ्तारी एवं आरोप को गलत बताते हुए पुलिस महानिरीक्षक रेल झारखंड, रांची सह दुमका प्रक्षेत्र के आईजी से निष्पक्ष जांच की मांग की. उसके बाद पुलिस महानिरीक्षक ने थाना प्रभारी इंदु शेखर झा से स्पष्टीकरण मांगते हुए पाकुड़ एसपी को अपना मंतब्य देने का निर्देश दिया. थाना प्रभारी पर सहायक अवर निरिक्षक जैसे कनीय पदाधिकारी से पूरे मामले की जांच कराने पर भी स्पष्टीकरण सवाल पूछे गये.

थाना प्रभारी का स्पष्टीकरण

तत्कालीन नगर थाना प्रभारी इंदु शेखर झा ने अपना स्पष्टीकरण देते हुए एसपी पाकुड़ को लिखा कि वे स्वयं आईटी एक्ट के नौ कांड के अनुसंधानकर्ता हैं. साथ ही नगर थाना के अलावे मुफ्फसिल प्रभाग में भी कार्यरत है. साथ ही नगर की कानून व्यवस्था की जिम्मेवारी उनपर है ऐसे में उनके द्वारा किसी और नए कांड का अनुसंधान निष्पक्ष रूप से संभव नही था. नगर थाना प्रभारी ने अपने स्पष्टीकरण में लिखा है कि नगर थाना जैसे संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान में पुलिस अवर निरीक्षक स्तर के चौदह पद स्वीकृत है जबकि स्वीकृत पद के आलोक में एक मात्र पुलिस अवर निरीक्षक की पदस्थापना है. कई बार मौखिक रूप से कम से कम एक और पुलिस अवर निरीक्षक स्तर के पदाधिकारी की पदस्थापना के लिए कहा गया है. लेकिन ऐसा हो नही पाया. उन्होंने लिखा है कि नगर थाने में पदस्थापित एक मात्र पुलिस अवर निरीक्षक राजेन्द्र कुमार मिश्रा उच्च न्यायलय एवं पुलिस अधीक्षक के आदेश से दिनांक 6 अप्रैल 18 से प्रशिक्षण हेतु 13 अप्रैल तक रांची में थे. ऐसे में तत्कालीन रूप से उक्त कांड का अनुसंधान सहायक अवर निरीक्षक स्तर के पदाधिकारी को दिया गया.

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क्या कहा एसपी ने

पाकुड़ एसपी ने तत्कालीन नगर थाना प्रभारी के स्पष्टीकरण पर अपना मंतव्य देते हुए लिखा कि आईटी एक्ट के नौ कांड सहित अन्य कार्यों का बोझ रहने के कारण एएसआई स्तर के पदाधिकारी को उक्त कांड का प्रभार सौंपे जाने का तर्क घोर आश्चर्यजनक है. उन्होंने आगे लिखा है कि आईटी एक्ट के तहत जिन कांडों का अनुसंधान नगर थाना प्रभारी कर रहे थे उसकी प्रगति संतोषजनक नही है. सिर्फ अनुसंधान के नाम पर खानापूर्ति है. मंतव्य में उन्होंने लिखा है कि अधिकांश आईटी एक्ट कांडों की दैनिकी समर्पण दिसम्बर 2017 तक ही है. जबकि कुछ कांडों में जनवरी-फरवरी माह में दैनिकी समर्पित की गई है. सात कांड के अभियुक्तों की गिरफ्तारी एवं टेक्निकल सेल की मदद से अग्रतर अनुसंधान नहीं किया गया है.ऐसे में उनके द्वारा दिये गए स्पष्टीकरण में तर्क उक्ति संगत प्रतीत नही होता है. साथ ही मैं सपर्पित स्पष्टीकरण से सहमत नही हूँ. एसपी ने अपने मंतव्य में आगे लिखा है कि घटना स्थल का निरीक्षण करने, वादी एवं गवाहों के बयान, अबतक के अनुसंधान, सहित अन्य दृष्टिकोण से उक्त कांड असत्य प्रतीत होता है. एसपी के इसी मंतव्य के आधार पर तथा अन्य उक्त कांड के से संबंधित कारणों के तहत तत्कालीन नगर थाना प्रभारी को निलंबित करते हुए विभागीय कार्रवाई करने की अनुशंसा पुलिस महारिनिक्षक के द्वारा की गई. फिलहाल आरक्षी निरीक्षक सह थाना प्रभारी निलंबित है.

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एसोसिएशन से लगाई न्याय की गुहार

एसोसिएशन से निलंबित आरक्षी निरीक्षक ने गुहार लगाते हुए लिखा है कि मेरे ऊपर लगे आरोप अप्रासंगिक है. क्योंकि पाकुड़ जिले में ही ऐसे कई उदाहरण है जिसमें वर्ष 2014 से 2018 तक पोक्सो एक्ट के तहत अंकित कई कांडों के अनुसंधानकर्ता एएसआई स्तर के पदाधिकारी रह चुके हैं. उदाहरण के तौर पर जिले के विभिन्न थानों में 2014 में 8,2015 में 5,2016 में 4,2017 में 6 एवं 2018 में ऐसे पोक्सो एक्ट के मामले दर्ज हुए है जिनका अनुसंधानकर्ता एएसआई स्तर के ही पदाधिकारी रहे हैं. उन्होंने झारखंड पुलिस एसोसिएशन से इस विषय में गुहार लगाते हुए मुख्यालय के वरीय पदाधिकारियों को जमीनी सच्चाई से अवगत कराने की गुहार लगायी है.

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