पलामू : ब्लड देकर दूसरों की जान बचाने वाला ब्लड बैंक आज खुद खून के लिए मोहताज

Publisher NEWSWING DatePublished Sun, 01/14/2018 - 13:32

Daltonganj : मुसिबत में दूसरों को खून देने वाले ब्लड बैंक को आज अपने प्राण बचाने के लिए रक्तदाता को तलाशना पड़ रहा है. पलामू जिला मुख्यालय डाल्टनगंज के सदर अस्पताल में स्थित एवं सरकार द्वारा स्थापित जय जवान ब्लड बैंक की स्थिति यह है कि वहां मात्र चार यूनिट ब्लड ही शेष रह गया है. मानव सेवा के लिए विख्यात विश्व व्यापी सेवा संगठन ‘रेडक्रॉस इंटरनेशनल’ की पलामू जिला इकाई की देख-रेख में चल रहे इस ब्लड बैंक की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही. पलामू जिले की करीब 25 लाख आबादी के लिए संचालित ब्लड बैंक का प्रदर्शन गत एक वर्ष से अत्यंत दयनीय स्थिति में आ गया है.

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हर दिन कम होता गया खून

जरूरत के अनुसार ब्लड बैंक में हर दिन खून निकलता तो गया पर वापस से उसकी भरपाई नहीं की गयी. नतीजतन आज ब्लड बैंक में सिर्फ चार यूनिट ब्लड बचा हुआ है. यह स्थिति पिछले एक सप्ताह से बनी हुई है. दो दिन पूर्व तो यहां मात्र एक यूनिट ब्लड था, लेकिन जिले के पुलिस अधीक्षक इंद्रजीत महता की पहल से पांच यूनिट रक्त दान किया गया. उसमें भी कमी आ गयी है. ऐसा इसलिए होता है कि लोगों को ब्लड तो दे दिया जाता है लेकिन उनसे ब्लड के बदले ब्लड लिया नहीं जाता. 

 

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सीएस के दखलअंदाजी से गड़बड़ायी स्थिति  

हालांकि सूत्रों के अनुसार जब से पलामू के सिविल सर्जन डॉ कलानंद मिश्र ने ब्लड बैंक प्रबंधन में दखलअंदाजी प्रारंभ की है तबसे पलामू रेडक्रॉस और ब्लड बैंक के रिश्ते में खटास आ गयी है. सूत्र बताते हैं कि रेडक्रॉस सोसाईटी द्वारा ब्लड बैंक को इसके स्थापना काल से व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा रहा था. किन्तु एक वर्ष से रेडक्रॉस ने अपनी सक्रियता घटा दी है.  इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि ब्लड डोनेशन कैंप आयोजन करने में ढिलाई आ गयी. इसे रेडक्रॉस की लापरवाही ही माना जाएगा. अगर रेडक्रॉस सोसाईटी की मंशा ब्लड बैंक के प्रबंध से हाथ खींचने की है तो उसे स्पष्ट रूप से अपने को अलग कर लेना चाहिए और इसका संपूर्ण भार सिविल सर्जन या अस्पताल प्रबंधन को सौंपने में अब विलंब नहीं करना चाहिए.

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खून के लिए भटक रहे रोगी 

सिविल सर्जन पलामू और रेडक्रॉस सोसाइटी की खींचतान के कारण आज रोगियों को खून के लिए भटकना पड़ रहा है. लोगों को मजबूर होकर दलालों के चंगुल में पड़ कर अस्पताल के निकट चल रहे अवैध रक्तकोष से बहुत उंची कीमत पर खून खरीदने को विवश होना पड़ रहा है. आज सरकार द्वारा संचालित इस ब्लड बैंक में मात्र चार यूनिट खून उपलब्ध है. जनता के कल्याण और स्वाथ्य सेवा का दम भरने वाली झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री के जिले की यह दुदर्शा है तो बाकी जिलों की क्या हालत होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.

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हादसा होने पर मच सकता है कोहराम

पलामू जिला नक्सल प्रभावित है. हर दिन यहां नक्सल विरोधी अभियान चलाया जाता है. ऐसे में अगर किसी घटना के बाद ज्यादा खून की जरूरत पड़ी तो कोहराम मच सकता है. एक्सीडेंट तो यहां हर दिन ही होती है, जिसके बाद खून की जरुरत पड़ती है. एक अनुमान के अनुसार ब्लड बैंक में हर दिन 8 से 10 यूनिट ब्लड लेने लोग आते हैं.

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