पाकुड़ मनरेगा घोटाला : जनसंवाद में शिकायत के बाद टूटी प्रशासन की कुंभकरण वाली नींद, एसडीएम जांच करने पोस्ट ऑफिस पहुंचे 

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 03/16/2018 - 17:10

Pakur/Ranchi: पाकुड़ में हुए मनरेगा घोटाला को लेकर एक बार फिर प्रशासन की नींद खुली है. नींद तब खुली जब पूरे मामले में आधे-अधूरे कार्रवाई को लेकर सीएम जनसंवाद में इसकी शिकायत की गयी. बताते चलें कि शिकायत करने वाला और कोई नहीं बल्कि वो तत्कालीन कार्यक्रम पदाधिकारी गोपाल गौतम है, जिसपर मामले को लेकर प्रशासन की तरफ से कार्रवाई करते हुए संविदा रद्द कर दी गयी थी. मामला 2009-10 का है. पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा प्रखंड के डुमरचीर और पचुवाड़ा पंचायत में मनरेगा के तहत वित्तीय वर्ष 2009-10 में तालाब खुदाई के नाम पर करोड़ो का फर्जीवाड़ा हुआ. महीनों बाद डीसी ने मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश जांच कर रही टीम को दिया. मामले को देख कर लगता है कि अगर सीएम जनसुनवाई में शिकायत नहीं की जाती तो मामले को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी पाकुड़ प्रशासन की तरफ से कर दी गयी थी.

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एसडीएम समेत टीम आयी हरकत में

डीसी के निर्देश पर एसडीओ जीतेंद्र कुमार देव, कार्यपालक अभियंता ग्रामीण कार्य विभाग श्याम सुंदर मुर्मू बुधवार को मनरेगा के तहत तालाब निर्माण के नाम पर फर्जी मजदूरों के नाम से की गयी निकासी मामले की जांच करने प्रखंड के भारतीय स्टेट बैंक, वनांचल ग्रामीण बैंक, डाकघर पहुंचे. अधिकारियों ने शाखा प्रबंधक और डाकपाल से वित्तीय वर्ष 2009-10 में मनरेगा के तहत तालाब खुदाई में काम करने वाले मजदूरों को किये गये भुगतान से संबंधित जानकारी ली और अधिकारियों द्वारा पंचायतों के मुखिया, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक से भी मजदूरों से संबंधित जानकारी हासिल की गयी है और जांच टीम में शामिल अधिकारियों ने किये गये एमआइएस के आधार पर जांच शुरू की.

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क्या था पूरा मामला

पाकुड़ के अमड़ापाड़ा प्रखंड के डुमरचीर पंचायत में धरमा पहाड़िया, गैना मुर्मू , नुनकु हांसदा, चंपा पहाड़िया, कमल मरांडी, जेठा मुर्मू, रामेश्वर मुर्मू, दरिया पहाड़िया और पचुवाड़ा पंचायत के नाजीर किस्कू , देवीलाल मुर्मू , सिकर मुर्मू और बैजुन टुडू की जमीन पर तालाब निर्माण की स्वीकृति दी गयी थी और तालाब निर्माण कराये बिना राशि की निकासी फर्जी एमआइएस के जरीये कर लिये जाने की शिकायत की गयी थी. इस मामले में डीसी दिलीप कुमार झा ने अगस्त 2017 में तत्कालिन डीडीसी अजीत शंकर को पूर्व बीपीओ सुधांशु शेखर सिंह, लिपिक सर्वेश कुमार, बीडीओ रौशन साह, ज्ञानेंद्र कुमार , मुखिया लुचिया सोरेन , लाजवंती मरांडी , कनीय अभियंता संजय कुमार अग्निवेश वगैरह के खिलाफ कार्रवाई नहीं किये जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था. डीसी के निर्देश के आलोक में डीडीसी श्री शंकर ने अलग संचिका में संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की जानकारी दी. लेकिन महीनों बीतने के बाद जिला ग्रामीण विकास अभिकरण ने कार्रवाई नहीं की.

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न्यूज विंग उठाता रहा है मामला

न्यूज विंग लगातार इस मामले को उठाता रहा है. तीन बार शिकायत करने के बाद मुख्यमंत्री जनसंवाद में शिकायत दर्ज की गयी थी. इस खबर को भी न्यूज विंग ने उठाया था. इसके बाद मामला दर्ज किया गया. पाकुड़ में मनरेगा के तहत किये गये फर्जीवाड़ा और घोटाले मामले को दबा दिये जाने और दोषियों के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं किये जाने को लेकर तत्कालीन प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी गोपाल गौतम ने मुख्यमंत्री जनसंवाद में शिकायत की थी. शिकायत में तत्कालीन बीपीओ ने वित्तीय वर्ष 2009-10 की 12 योजनाओं में शामिल सभी दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की थी.

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2010-11 में मामले में आया नया मोड़

इस मामले में नया मोड़ तब आया जब वित्तीय वर्ष 2009-10 की योजना संख्या 35 देवीलाल मुर्मू के जमीन पर वित्तीय वर्ष 2010-11 में भी तालाब निर्माण के नाम पर राशि की निकासी कर लिये जाने का मामला सामने आया. डीसी के निर्देश पर तत्कालीन बीपीओ गोपाल गौतम और रोजगार सेवक सतेंद्र कुमार की संविदा रद्द कर दी गयी. संविदा रद्द किये जाने के बाद बीपीओ ने एकतरफा कार्रवाई किये जाने और योजना के नाम पर फर्जीवाड़ा में शामिल असली गुनहगारों के खिलाफ कार्रवाई की गुहार मुख्यमंत्री जनसंवाद में लगायी. तब प्रशासन की नींद टूटी और फिर मामले की जांच शुरू की गयी है.

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मामले की जांच पहले से चल रही है : एसडीएम

न्यूज विंग से बात करते हुए पाकुड़ के एसडीएम जितेंद्र कुमार देव ने बताया कि मामले की जांच सीएम जनसंवाद में भी की गयी है और साथ ही साथ पहले से भी एफआईआर हुआ है. कुछ फ्रेस एविडेंस मिले थे, जिसके आधार पर बुधवार को टीम जांच करने पहुंची. जांच खत्म कर रिपोर्ट डीसी को सौंप दी जायेगी.

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