खूंटी जिला प्रशासन ने पत्थलगड़ी को लेकर जारी किया पर्चा, कहा- पत्थलगड़ी का वर्तमान स्वरूप राष्ट्र विरोधी

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 05/03/2018 - 15:05

Pravin kumar

Khunti : खूंटी जिले में एक तरफ जहां पत्थलगड़ी का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा, वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन ने पत्थरगड़ी पर पर्चा जारी कर इसके वर्तमान स्वरूप के राष्ट्रविरोधी एवं जनहित के खिलाफ करार दिया है. जबकि ग्रामीणों का कहना है सरकार सिर्फ गांव के संसाधनों पर नजर गड़ाए हुए है. आज भी गांव में स्वास्थ्य,शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है. ऐसे में यह सिर्फ संविधान की हो रही अवहेलना की ओर इशारा नहीं करता, बल्कि वर्तमान विकास मॉडल में गांव के संसाधनों को लूटने के सरकारी प्रयासों का विरोध भी है.

क्या रहा है पत्थलगड़ी का इतिहास ?

झारखंड के अनुसूचित क्षेत्र विशेष मुंडा अंचल मैं पत्थलगड़ी की अपनी प्राचीन परंपरा रही है. पत्थलगड़ी का अर्थ पत्थर पर लिख कर उसे किसी खास उद्देश्य के लिए जमीन में गाड़ना, जो एक तरह का शिलापट्ट है. पत्थलगड़ी आदिवासियों की परंपरा है जो सदियों से चली आ रही है. आदिवासी समाज विशेषकर मुंडा समाज कई मकसदों के लिए पथलगड़ी करते रहे है, जिसमें मृतकों की स्मृति, गांव का सीमांकन, जमीन का सीमांकन, जंगल पहाड़ का सीमांकन, किसी घटना की जानकारी, नए कार्य की शुरूआत के लिए, शहादत की स्मृति के लिए, किसी खास निर्णय को सार्वजनिक करने के लिए, किसी संघर्ष में विजय हासिल करने के बाद पत्थलगड़ी करते रहे है. पत्थलगड़ी की परंपरा कब शुरू हुई है यह कहना कठिन है लेकिन यह निश्चित रूप से अतिप्राचीन है जो मुंडा अंचल में आज भी जीवित है.

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प्रशासन द्वारा जारी पर्चा

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पत्थलगड़ी को लेकर खूंटी में अब तक हुई गिरफतारी

खूंटी जिला में पत्थलगड़ी को लेकर अब तक 15 से अधिक लोगो को गिरफ्तारी हो चुकी है. वहीं गिरफ्तारी के बाद भी जिले में पत्थगड़ी का सिलसिला रूकने का नाम नही ले रहा है. पत्थलगड़ी अब जिले की सरहद को पार करते हुए राज्य के दूसरे जिलों में भी पहुचती जा रही है. बुधवार को सरायकेला खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड के कई गांवों में भी पत्थलगड़ी की गई.

क्या है कहते है जोसेफ पूर्ति पत्थलगड़ी के सवाल पर ?

सरकार गांव का विकास नहीं करना चहती. हम पत्थलगड़ी के माध्यम से ग्रामसभा का सशक्तीकरण कर रहे है. ग्रामसभा को मिले अधिकार के तहत हम अपने भू-भाग में स्वशासन व्यवस्था संचालित कर सकते है. सरकार संविधान का पालन नहीं कर रही है. इस कारण हमें संविधान को पत्थरों पर लिखना पड़ रहा है. हम संविधान की पालन कर रहे है, जो गलत नहीं.

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प्रशासन का पर्चा

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क्या कहता है जिला प्रशासन अपने पर्चे में ?

जिला प्रशासन ने पत्थलगड़ी का वर्तमान स्वरूप सामाजिक एवं सास्कृतिक दृष्टिकोण से रारूट्र विरोधी एवं जनहित के खिलाफ बताया वही परचे में आगे लिखा है कि जिला प्रशासन पत्थलगड़ी के पारंपरिक स्वरूप जो आदिवासी समाज में सदियों से चली आ रही है, के खिलाफ नही है. लेकिन वर्तमानमें पत्थलगड़ी के आड़ में संविधान की गलत व्याख्या करतथा अफीम जैसे अवैध कारोबार को बढ़ावा देकर आदिवासी एवं गरीबों के खिलाफ साजिस की जा रही है. इसमें संदेह नहीं कि पत्थलगड़ी की आदिवासी समाज में परंपरागत पृष्ठभूमि रही है. लेकिन वर्तमान संदर्भ हैरान करने वाला है. संविधान की गलत व्याख्या कर अफीम जैसे अवैध कारोबार को बढ़ावा देकर गरीब आदिवासियों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है, वहीं जिलं में एक साल से कुछ ज्यादा समय से की जा रही पत्थलगड़ी को कुछ सवार्थी संगठनों ने मनमाना स्वरूप देकर भोले-भाले आदिवासी ग्रामीणों को मानसिक रूप से दिगभ्रमित करने का कार्य किया है.

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