पॉलिटेक्निक मामला : SBTE ने छात्रों को जारी किये थे फर्जी सर्टिफिकेट, नामांकन के दौरान भी प्राइवेट कॉलेज का बताया था सरकारी नाम

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 06/12/2018 - 09:01

Kumar Gaurav

Ranchi : राज्य में पॉलिटेक्निक कर रहे युवाओं को अगर इसकी डिग्री जारी करने वाला संस्थान ही फर्जी डिग्री देने लगे तो क्या कहा जाएगा. स्टेट बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन झारखंड द्वारा  टेक्नो इंडिया सिल्ली के छात्रों को पहले राजकीय पॉलिटेक्निक सिल्ली के नाम का सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया. उसके बाद फिर पास आउट होने के बाद बदले हुए नाम का सर्टिफिकेट दिया गया. लेकिन सर्टिफिकेट में नाम का जो बदलाव हुआ वो पहले सेमेस्टर के रिजल्ट में नहीं किया गया. इसके अलावा नामांकन के दौरान 2014 से लेकर 2017 तक के काउंसिलिंग में भी सिल्ली कॉलेज में नामांकन गर्वमेंट पॉलिटेक्निक  के नाम पर ही लिया गया. मतलब सरकारी संस्थानों ने भी सरकारी कॉलेज का नाम लेकर पीपीपी मोड में चल रहे कॉलेज में छात्रों का फर्जी तरीके से नामांकन कराया, उसके बाद टेक्नो इंडिया के स्थान पर गर्वमेंट पॉलिटेक्निक के नाम से दो सत्र के छात्रों को रिजल्ट और डिग्री भी दी गयी.

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राजकीय पॉलिटेक्निक सिल्ली
गर्वमेंट पॉलिटेक्निक सिल्ली

एआईसीटीई के अप्रूवल  के बिना ही बदल दिया था नाम

उच्च तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग द्वारा साल 2013 में सिल्ली पॉलिटेक्निक को टेक्नो इंडिया सिल्ली के पीपीपी मोड पर चलाने का निर्णय लिया गया. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, नई दिल्ली द्वारा संस्थान को मान्यता तथा राज्य प्रावैधिक शिक्षा पर्षद से संबंधता भी टेक्नो इंडिया सिल्ली के नाम से प्राप्त था. पर तत्कालिन मुख्य सचिव के आदेश  पर बिना अप्रूवल के ही कॉलेज का नाम बदल दिया गया. जिस वजह से टेक्नो इंडिया सिल्ली के स्थान पर गर्वमेंट पॉलिटेक्निक सिल्ली के नाम से सर्टिफिकेट जारी किया गया.  जिस कारण नियोक्ता कंपनियों ने इस कॉलेज से पास आउट छात्रों को अमान्य और अस्वीकृत कर दिया. जिसके बाद संज्ञान लेकर सर्टिफिकेट में नाम का परिवर्तन किया गया. लेकिन अभी भी छात्रों के पहले सेमेस्टर के रिजल्ट में वही नाम है.

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जारी रिजल्ट
जारी रिजल्ट

राज्य प्रावैधिक शिक्षा पर्षद के पास टेक्नो इंडिया के नाम से ही थी संबद्धता

राज्य से पॉलिटेक्निक कर रहे छात्रों को डिप्लोमा राज्य प्रावैधिक शिक्षा पर्षद ही जारी करता है. पॉलिटेक्निक कॉलेजों की संबद्धता भी राज्य प्रावैधिक शिक्षा पर्षद ही करता है. सिल्ली में संचालित पॉलिटेक्निक कॉलेज की संबंद्धता जब टेक्नो इंडिया के नाम से है तो कैसे पर्षद ने ही गर्वमेंट पॉलिटेक्निक सिल्ली के नाम से सर्टिफिकेट जारी किया, ये सबसे महत्वपूर्ण बिंदू है.

दो तरीके के सीट हैं कॉलेज में

टेक्नो इंडिया सिल्ली में छात्रों का नामांकन राजकीय पॉलिटेक्निक सिल्ली के नाम से ही लिया जाता रहा. टेक्नो इंडिया सिल्ली पीपीपी मोड पर कॉलेज का संचालन करती है. इसके करार के तहत दो तरह की सीटें हैं. पहला फ्री सीट दूसरा पेड सीट. फ्री सीट में सीट का कुल 10 प्रतिशत नामांकन होता है. एमओयू के अनुसार फ्री सीट के लिए सरकारी कॉलेजों जितना ही फीस लगना है. जबकि पेड सीट के लिए कॉलेज तय करती है.

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जारी सूचना
जारी सूचना

फ्री सीट के लिए भी देने पड़ रहे हैं तीन गुणा फीस

पीपीपी मोड पर कॉलेजों के संचालन के लिए जो एमओयू हुआ था, उसमें ये साफ तौर पर लिखा है कि फ्री सीट पर सरकारी कॉलेजों जितना फीस ही लिया जाएगा. लेकिन कॉलेज छात्रों से दो से तीन गुणा ज्यादा पैसे  वसूल रहा है. वहीं सरकारी कॉलेजों के छात्रों को चार हजार के लगभग फीस देनी होती है. जबकि टेक्नो इंडिया सिल्ली बारह हजार तक फीस वसूल रहा है. इसके अलावा पेड सीट के छात्रों से मनमाफिक पचास हजार रुपये लिये जा रहे हैं.

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