राहे : मनरेगा योजना में लाखों का घोटाला प्रमाणित होने के बाद भी नहीं हुई राशि की वसूली

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 06/14/2018 - 15:53

 Pravin kumar

Ranchi  :  ग्रामीण विकास की योजनाओं को लेकर राज्य सरकार से लेकर केन्द्र सरकार की ओर से बड़े-बड़े दावे किये जाते रहे हैं,  वहीं रघुवर सरकार के द्वारा भी भ्रष्टाचार को लेकर जीरो  टॉलरेंस की बात कही जाती रही है,  लेकिन आम जन से जुड़ी योजनाओंं  में भारी अनियमियता का मामला उजागर होने के बाद भी राशि की वसूली नहीं होना मुख्यमंत्री के दावे को गलत सबित करता है. रांची जिले के राहे प्रखंड के कई गांवों में मनरेगा योजना में भारी अनियमिता का मामला सोशल ऑडिट में उजागार हुआ. इसके बाद सात से दस दिन के भीतर योजनाओं में अवैध रूप से निकाली गयी राशि की वसूली का आदेश जूरी सदस्यों ने दिया था, लेकिन आज तक  राशि की वसूली नहीं होना यह साबित करता है कि मनरेगा योजनाओं में की जा रही गड़बड़ी में सिर्फ पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधि मुखिया, वार्ड सदस्य ही शामिल नहीं हैं, बल्कि प्रखंड के वरीय अधिकारियों की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता. बता दें कि बकरी शेड, तालाब खुदाई, सड़क बनाने के नाम पर करोड़ों की राशि का फर्जीवाड़ा हुआ है. सोशल ऑडिट में मामला सामने आने के बाद भी सरकारी धन की वसूली अब तक नहीं की जा सकी है और इसे ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है.

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किन योजनाओं में हुई गड़बडी़

राहे प्रखंड के चैनपुर गांव के कानीनाथ महतो की जमीन समतलीकरण की योजना वर्ष 2015-16/25177 स्वीकृत की गयी थी, जिसकी कुल प्राक्‍़कलित राशि 1,24,658 रुपये थी,  जिसमें सिर्फ मेढ़ निर्माण कार्य कर योजना की पूरी राशि निकाल ली गयी. सोशल ऑडिट में गड़बड़ी प्रमाणित होने के बाद सात दिन के अंदर  1,16,640 रूपये वसूलने की बात कही गयी थी,  जिसे आज तक रिकवरी नहीं किया जा सका. प्रखंड के डोमनडीह गांव की मंजु देवी के नाम से जमीन समतलीकरण की योजना 2016-17/14028 स्वीकृत की गयी थी.  इसमें भी मेढ़बंदी कर योजना की पूरी राशि की बंदरबाट कर ली गयी.  योजना 1,40,280 रूपये की थी. राहे प्रखंड में ऐसे कई मामले हैं, जिसमें जमीन समतलीकरण के नाम पर राशि की बंदरबाट की गयी है.  सोशल ऑडिट में दस दिन के भीतर राशि रिकवरी की बात तय की गयी थी जो आज तक नहीं हुई है.

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एक ही परिवार को मिला कई योजनाओं का लाभ

 राहे प्रखंड के धनंजय महतो, गांव बुडाडीह को परिवार के नाम से वर्ष 2016-17 और 17-18 में कुल छह योजनाएं स्वीकृत की गयीं. बकरी शेड निर्माण के नाम पर पत्नी और पति के नाम से राशि आवंटित  की गयी,   इसके बावजूद योजना धरातल पर मौजूद नहीं है.  अन्य रूवीकृत योजना भी धरातल पर नहीं दिखती.  प्रखंड में इस तरह योजनाओं के चयन में गड़बड़ी सिर्फ एक परिवार के लिए नहीं की गयी है,  बल्कि राजनीतिक रसूख रखने वाले लोगों को एक ही वित वर्ष में कई योजनाओं का लाभ दिया गया है. जो जमीन पर कहीं नहीं दिखती.  प्रखंड के डोकद गांव में भी लाभुक के चयन में भारी गड़बड़ी की गयी है. योजना के तहत एक ही परिवार के तीन लोगों को एक ही योजना के लिए अलग -अलग लाभुक बनाया गया है.

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तालाब निर्माण में भारी फर्जीवाड़ा

राहे प्रखंड के बुड़ाडीह निवासी कमना देवी के नाम से योजना वर्ष 2015-16,16-17/87409 स्वीकृत की गयी, जिसकी  लागत 6,40,900 रुपयेथी . योजना की रिकार्ड फाइल के अनुसार मस्टर रोल में 4,95,997  रूपये खर्च दिखाये गये हैं, जबकि एमबी 6,40,900 रुपये का बनाया गया है. जबकि योजना के भौतिक सत्यापन के दौरान योजना नदारद दिखी.  इस योजना में 5,72,454 रूपये का  फर्जीवाड़ा सोशल ऑडिट में सामने आ चुका है,  लेकिन अब तक किसी प्रकार की राशि की वसूली नहीं हो सकी है. वही प्रखंड के डोदी गांव के ललित सिंह मुंडा के नाम से भी तालाब निर्माण की योजना स्वीकृत की गयी थी, जिसमें बिना काम किये लाख- दो लाख से अधिक रूपये की निकासी की जा चुकी है . फर्जीवाड़ा सोशल ऑडिट में प्रमाणित होने के बाद भी अब तक राशि का वसूली नहीं हो सकी है.  वर्ष 2015-16/63582 प्रखंड के चैनपुर गांव के घासी महतो के नाम से तालाब निर्माण की योजना स्वीकृत की गयी थी. योजना दस्तावेज और भौतिक सत्यापन से यह स्पष्ट होता है कि इस योजना में भी मात्र 64,042 रूपये का काम कर 4,09,536 रूपये निकाल लिये गये है, जबकि अवैध रूप से निकासी के मामले में राशि की वसूली दस दिन में करने की बात कही गयी थी, जो आज तक नहीं हुई.

सड़क बनी नहीं,  5,45,202 रुपये सरकारी खजाने से निकाल लिये गये

चैनपुर गांव के यीरूटोली से मुंडा टोली तक 1000 फीट सड़क निर्माण की योजना 2015-16/16-17/40293 स्वीकृत की गयी थी. बिना सड़क निर्माण के ही इस योजना की राशि की बंदरबाट कर ली गयी.  इस योजना में भी फर्जीवाड़ा  सामने आने के बाद भी राशि की वसूली नहीं की जा सकी है.

क्या कहते हैं राहे के प्रखंड विकास पदाधिकारी

सोशल ऑडिट में प्रखंड की कई योजनाओं में अनिमियतता और गड़बड़ी के प्रमाण उजागर हुए हैं.  सोशल ऑडिट जनवरी महीने में किया गया था.  गड़बडी वाले मामलों में योजना राशि की वसूली की बात कही गयी थी,  लेकिन अभी तक राशि की वसूली नहीं हो सकी है. राशि की वसूली नहीं होने पर जिम्मेवार लोगों पर सर्टीफिकेट केस किया जा चुका है.

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