RIMS एमआरडी रिपोर्टः वर्ष 2017 में इलाज कराने आये 8 हजार 982 मरीजों की मौत

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 02/14/2018 - 11:08

Ranchi : पिछले साल वर्ष 2017 में रिम्स में इलाज कराने आये 8 हजार 982 मरीजों की मौत हो गयी. मरनेवालों में पांच हजार 513 पुरूष और तीन हजार 459 महिलाएं थीं. इस आंकड़े के बारे में औसतन बात करें, तो हर महीने 749 और इस आंकड़े के हिसाब से हर दिन 24 मरीजों की मौतें हुईं.  ये आंकड़े रिम्स के एमआरडी की हैं. विभाग के तौर पर देखें तो सबसे ज्यादा मौतें मेडिसिन विभाग और उसके बाद न्यूरो विभाग में हुईं. मेडिसिन विभाग में पिछले साल चार हजार 647 मौतें हुईं. जबकि न्यूरो सर्जरी विभाग में एक हजार 633 मौतें हुईं. सर्जरी विभाग में 997 मरीजों की मौत हुई.

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यहां आनेवाले ज्यादातर मरीज गंभीर अवस्था में रहते हैं

एक दैनिक अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार एक साल में मरीजों की मौत के इतन बड़े आंकड़ें चौंकानेवाले हैं. वहीं रिम्स प्रबंधन का कहना है कि मौत के ये आंकड़े आश्यर्चजनक नहीं है. क्योंकि रिम्स राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल है और हर जगह से मरीज गंभीर अवस्था में यहीं आते हैं. कहा जा सकता है कि मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए जब कहीं इलाज नहीं किया जाता, तो उसे यहां भेज दिया जाता है. यहां आनेवाले ज्यादातर मरीज गंभीर अवस्था में रहते हैं.

हम यहां से मरीजों को लौटा नहीं सकतेः रिम्स निदेशक

मरीजों की मौत के बड़े आंकड़े के संबंध में रिम्स निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव कहते हैं कि रिम्स में निजी अस्पतालों से गंभीर अवस्था में मरीज को रेफर कर यहां भेज दिया जाता है. हम यहां से मरीजों को लौटा नहीं सकते है, इसलिए भर्ती करना पड़ता है. निजी अस्पतालों के कारण रिम्स में मरीजों की मौत का आंकड़ा बढ़ता है.

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रिम्स में डॉक्टरों की संख्या

रिम्स में डॉक्टरों की संख्या करीब 430 है.

इनमें 270 सीनियर डॉक्टर हैं.

ट्यूटर व एसआर की संख्या 150 के करीब है. इसमें क्लिनिकल व नॉन-क्लिनिकल डॉक्टर दोनों हैं.

 महीने के अनुसार मौत का आंकड़ा 

 जनवरी 711

फरवरी 640

मार्च 778

अप्रैल 707

मई 724

जून 631

जुलाई 727

अगस्त 873

सितंबर 800

अक्तूबर 801

नवंबर 776

दिसंबर 807

एक साल में रिम्स में 1283 बच्चों की मौत

2017 में रिम्स में 1,283 बच्चों की भी मौतें हुई. रिम्स के आंकड़ों के अनुसार शिशु विभाग में पिछले साल 7,877 बच्चे इलाज के लिए भर्ती किये गये थे. इनमें से जनवरी में 93, फरवरी में 65, मार्च में 100, अप्रैल में 88, मई में 106, जून में 76, जुलाई में 124, अगस्त में 157, सितंबर में 143, अक्तूबर में 111, नवंबर में 103 और  दिसंबर में 117 बच्चों की मौतें हुई. रिम्स के शिशु सर्जरी विभाग में 29 बच्चों की मौत हुई. यहां 661 बच्चों को भर्ती कराया गया था. इनमें 496 बच्चों की सर्जरी की गयी.

 विभाग में मौत 

मेडिसिन 24,474 4,657

शिशु 7,877 1,283

सर्जरी 12,553 997

न्यूरो सर्जरी 8,357 1,633

कार्डियोलॉजी 3,618 161

स्त्री विभाग 10,806 105

हड्डी 4,686 89

शिशु सर्जरी 661 29

कैंसर 1,386 10

स्कीन वीडी एंड एसटीडी 566 5

यूरोलॉजी 559 5

टीबी एंड चेस्ट 312 3

इएनटी 855 5

देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स में प्रतिदिन औसतन 10 मरीजों की मौत हो जाती है.

पीजीआइ चंडीगढ़ में प्रतिदिन औसतन 13 मरीजों की मौतें होती हैं.

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