रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा ने की न्यायपालिका में आरक्षण की मांग, दोनों मोदी सरकार में हैं मंत्री

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 04/17/2018 - 18:16

New Delhi : लगता है आरक्षण के मुद्दे से नरेंद्र मोदी सरकार का जल्द पीछा नहीं छूटने वाला है. कभी विपक्ष इसको लेकर सरकार पर हमलावर होता है, तो कभी अपने भी मुसीबत का सबब बन जाते हैं. ताजा घटनाक्रम में एनडीए सरकार के दो मंत्रियों रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा ने न्यायपालिका में आरक्षण की वकालत कर मोदी सरकार की परेशानी  बढ़ा दी है. हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति में आरक्षण की मांग करने वाले दोनों मंत्रियों का कहना है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का न्यायालयों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, लिहाजा इन्हें मौका दिया जाना चाहिए. ये बात भी बीजेपी को परेशान कर सकती है कि रामविलास पासवान ने न्यायपालिका में आरक्षण हासिल करने के लिए आंदोलन शुरू करने तक की बात कही है. उन्होंने पटना में आयोजित दलित सेना के राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा, ''मैं लोजपा प्रमुख की हैसियत से बोल रहा हूं कि हमें न्यायापालिका में आरक्षण हासिल करने के लिए आंदोलन शुरू करना चाहिए.'' पासवान ने बिहार में निचली और उच्च न्यायिक सेवाओं में आरक्षण लाने के लिए नीतीश सरकार की सराहना भी की.

इसे भी देखें- प्रतिमाह होती थी 20 हजार करोड़ करंसी की खपत, 12 दिनों में ही निकाल लिये गए 45 हजार करोड़ रुपये 

कुशवाहा ने जजों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

इस बीच राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने भी मोदी सरकार के धर्म संकट में इजाफा करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में आजादी के बाद अपवाद ही रहा होगा कि एक आधे जज एससी/एसटी या ओबीसी श्रेणी से बने हों. कुशवाहा ने ये भी कहा कि जजों की नियुक्ति की जो प्रक्रिया है उसमें एससी/एसटी या ओबीसी छोड़ दीजिए गरीब सवर्ण नौजवान भी चाहे कि अपनी योग्यता के दम पर सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट का जज बन जाए तो बेहद मुश्किल है. उपेंद्र कुशवाहा ने कहा ' आजादी के बाद जितने भी लोग अब तक जज हुए हैं उनके परिवार में कोई जज रहा होगा, जमींदार रहा होगा या फिर उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि रही होगी.

इसे भी देखें- ठुल्ला प्रकरण: कोर्ट ने कहा- जेटली से माफी मांग सकते हैं केजरीवाल, तो पुलिसकर्मी से क्यों नहीं

मंत्रियों के बयान से मोदी सरकार असहज

इन दोनों मंत्रियों का बयान इस अर्थ में भी अहम माना जा रहा है क्योंकि आज देश की सियासत में सुप्रीम कोर्ट क जजों की नियुक्ति का मामला गंभीर बहस का मुद्दा भी बना हुआ है. वहीं हालिया दिनों आरक्षण के मुद्दे पर दलितों के भारत बंद और विपक्षी दलों द्वारा मोदी सरकार पर कई आरोप लगाए गए. इस बीच कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि कुशवाहा और पासवान के बयान से मोदी सरकार और भी असहज महसूस करने लगेगी. क्योंकि इसका जवाब तलाशने के लिए उसे भी मशक्कत करनी होगी.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

loading...
Loading...