नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म : पीड़िता की मां से पुलिस ने कहा, पैसा लेकर यहां से दफा हो जाओ

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 04/06/2018 - 14:28

Jamshedpur : सरायकेला खरसावां जिले के चांडिल क्षेत्र के चिरुगोड़ा गांव में एक नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म का मामला सामने आया है. 13 साल की नाबालिग की अस्मत को 43 वर्षीय एक वहशी अधेड़ ने तार-तार कर दिया, जिसके बाद बच्ची की हालत बिगड़ गई. बिटिया के साथ हुई घटना से आहत मां जब मामले की शिकायत लेकर चांडिल थाना पहुंची, तो उसे सिस्टम की बेदर्दी और गैर जिम्मेदाराना रवैये का भी कड़वा एहसास हुआ. पीड़िता की मां को पुलिस ने थाने से भगा दिया. फिर उसे कपाली टीओपी भेजा गया, पर वहां भी पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने से इन्कार कर दिया. पीड़ित के परिजनों के मुताबिक पुलिसकर्मी आरोपी को बचाने के लिए समझौता करने का दबाव बना रहे थे. बिटिया को इंसाफ दिलाने के लिए मां चार दिनों तक भटकती रही, मगर बेरहम तंत्र का पत्थरदिल नहीं पिघला. इस बीच पीड़ित की हालत ज्यादा बिगड़ गई तो उसे एमजीएम अस्पताल ले जाया गया, मगर यहां भी सिस्टम ने पीड़ित और उसके परिजनों का दर्द नहीं समझा. वहां डॉक्टरों ने थाने में मामला दर्ज कराए बिना बच्ची का इलाज करने से इन्कार कर दिया. डॉक्टरों पर अपनी बेटी की जान बचाने के लिए की गई मां की मिन्नतों का भी कोई असर नहीं हुआ.

कुछ लोगों ने की पीड़िता की मां की मदद

ओपीडी के पास मदद की गुहार लगाती महिला की आवाज सुनकर अस्पताल में भीड़ इकट्ठी हो गई, लोगों ने उसे एसपी ऑफिस में शिकायत करने की सलाह दी, लेकिन वहां जाने के लिए भी महिला के पास पैसे नहीं थी. इस बीच भीड़ में खड़े एक समाजसेवी ने महिला को 500 रुपये दिये, जबकि एक ऑटो वाले ने उसे एसपी ऑफिस पहुंचाया. इस मामले की सूचना एसपी को मिलने के बाद ही थाने में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज हो पाया. जिसके बाद पुलिस ने आरोपी राजाराम मांझी को गिरफ्तार कर लिया.

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पैसा लो और यहां से भागो !

दुष्कर्म पीड़ित बच्ची की मां ने बताया कि दो अप्रैल को वह चांडिल थाना गई. यहां से उसे भगा दिया गया। अगले दिन वो फिर थाने गई तो उसे कपाली टीओपी भेजा गया, जहां घंटों बैठे रहने के बाद भी किसी पुलिसकर्मी ने ध्यान नहीं दिया. एफआईआर दर्ज करने का आग्रह करने पर पुलिस ने कहा कि पैसा लेकर मामला रफा-दफा करों और यहां से भागो. इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं होगा.

जांच के बाद बख्शे नहीं जाएंगे दोषी पुलिसकर्मी : एसएसपी

सरायकेला के एसपी चंदन कुमार सिन्हा ने मामले में पुलिसकर्मियों की लापरवाही की जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने माना है कि इस मामले में चांडिल थाना व कपाली ओपी के पुलिसकर्मियों की सरासर गलती सामने आ रही है. दो अप्रैल को ही मामला दर्ज कर पीड़िता का इलाज कराना चाहिए था. लेकिन, ऐसा नहीं किया गया. यही नहीं, पुलिस मामले में समझौता करने के लिए पीड़िता की मां पर दबाव बना रही थी. इन तमाम आरोपों की जांच कराई जाएगी.

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कानून

सार्वजनिक कर्मचारियों के लिए क्या है कानूनी प्रावधान ?

धारा 166 ए

जो भी, एक सार्वजनिक कर्मचारी होने के नाते -

(ए) जानबूझकर कानून की किसी भी दिशा की अवहेलना नहीं करता है जो किसी व्यक्ति के किसी भी स्थान पर किसी अपराध या किसी अन्य मामले की जांच के लिए उपस्थित होने की आवश्यकता पर रोकता है, या

(बी) जानबूझकर किसी भी व्यक्ति की पूर्वाग्रह, कानून के किसी अन्य दिशा, जिस तरह से वह इस तरह की जांच का आयोजन करेगा, या वह

(सी) धारा 326 ए, धारा 326 बी, धारा 354, धारा 354 बी, अनुभाग के तहत दंडनीय संज्ञेय अपराध के संबंध में, अपराध प्रक्रिया के संहिता 154 के उप-धारा (1) के तहत उन्हें दिए गए किसी भी जानकारी को रिकॉर्ड करने में विफल रहता है. 370, धारा 370 ए, धारा 376, खंड 376 ए, धारा 376 बी, धारा 376 सी, धारा 376 डी, धारा 376 ई या धारा 509, के तहत कठोर कारावास के साथ दंडित किया जाएगा, जो कि छह महीने से कम नहीं हो लेकिन जो दो साल तक हो , अधिक दंड के लिए भी उत्तरदायी होगा.

धारा 166 बी

जो कोई भी, अस्पताल, सार्वजनिक या निजी, चाहे वह केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय निकायों या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा चलाया जाता है, का कार्यभार संपार्श्विक संहिता, 1973 संहिता की धारा 357 सी के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, उसे दंडित किया जाएगा एक अवधि के लिए कारावास जो एक वर्ष तक बढ़ सकता है, या जुर्माना और सजा दोनों हो सकते हैं.

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आखिर क्यों नहीं जागती तंत्र की संवेदना ?

जब भी  किसी मजलूम पर अत्याचार होता है, वो सबसे पहले सरकारी सिस्टम पर ही भरोसा करता है. अपराध के बाद अस्पताल या फिर पुलिस की जरुरत अमूमन पड़ती है. लेकिन लोगों के भरोसे को जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग जिस बेपहवाही से तोड़ते हैं, उसी वजह से आज सरकारी सिस्टम पर कोई यकीन नहीं कर पाता. ज्यादातर मामलों के मीडिया में  आने, खबर वायरल होने, या फिर आला अधिकारियों तक सूचना पहुंचने के बाद ही कार्रवाई होती है. लोगों के मन में हमेशा ये सवाल होता है कि आखिर कब बदलेगी  जिम्मेदार बनेगा सिस्टम ?

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