दुख की बात है कि 12 साल बाद भी मनरेगा मजदूरों को अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है : ज्यां द्रेज

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 02/02/2018 - 17:05

Latehar : 'हर हाथ को काम दो, काम का पूरा दाम दो' नारा के साथ शुक्रवार को लातेहार समाहरणालय परिसर में विभिन्न मांगों को लेकर एक सम्मेलन सह धरना आयोजित किया गया. ग्राम स्वराज मजदूर संघ, नरेगा सहायता केन्द्र, एनसीडीएसआर, आदिम जनजाति अधिकार मंच ने संयुक्त तत्वावधान में यह धरना आयोजित किया. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के  लागू हुए 12 वर्ष पूरा होने के अवसर पर यह सम्मेलन सह धरना आयोजित की गयी. सभा को संबोधित करते हुए अर्थशास्त्री प्रोफेसर ज्यां द्रेज ने कहा कि मनरेगा को लागू हुए 12 साल हो गये हैं, मगर दुख की बात है कि मनरेगा मजदूरों को अपने अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. वहीं खुशी की बात यह है कि इन 12 सालों में मनरेगा मजदूरों ने संघर्ष किया और अपने अधिकार के प्रति मुखर हुए.

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बजट में दलित व आदिवासी समुदाय के लिए कुछ नहीं

प्रोफेसर ज्यां द्रेज ने बजट पर चर्चा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने 2018-19 के लिए जो बजट पेश किया है, उसमें दलित व आदिवासी समुदाय के लिए कुछ खास नहीं दिया है, जो दलित व आदिवासियों के साथ अन्याय है. कहा कि नरेगा वॉच के राज्य समन्वयक  जेंम्स हेंरेज ने कहा कि राज्य में मनरेगा के फेल होने के लिए मुख्य कारण सरकारी मशनरी है. इस वजह से समय पर मनरेगा मजदूरों का मजदूरी का  भुगतान नहीं हो रहा है.

उन्होंने कहा कि अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो पायेंगे कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में मनिका प्रखंड में 2202 और बरवाडीह प्रखंड 904  ट्रांजेक्शन (भुगतान) बैंकों द्वारा निरस्त कर दिया गया, जिसका  मुल्य करीब 30,00,000 (तीस लाख) रुपये है. वहीं पूरे जिले के अंकड़ों पर नजर डालते हैं, तो 9652 ट्रांजेक्शन (भुगतान) जो 94,00,000 (चौरानबे लाख) रुपये रिजेक्ट कर दिये गये हैं. इसमें से 7487 ट्रांजेक्शन (भुगतान) पुनः भुगतान के लिए लंवित  है.

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साजिश के तहत मनरेगा मजदूरों को किया जा रहा अधिकारों से वंचित

सभा को संबोधित करते हुए एनसीडीएआर के सुनिल मिंज कहा कि मनिका में वर्ष 2016-17 में  मनिका प्रखंड के पांच पंचायतों 256 मजदूरों ने बेरोजगारी भत्ता के लिए आवेदन किया था. मगर  आज तक उनके बेरोजगारी भत्ता का भुगतान नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि मनरेगा कानून के  अनुसार 15 दिनों के अंदर जॉब कार्ड, काम और भुगतान पाने का अधिकार है. मगर इस कानून  का मनरेगा कर्मचारी उल्लंघन कर मजदूरों को परेशान कर रहे हैं. सरकार द्वारा मनरेगा में आदिवासी उपयोजना के अंतर्गत करोड़ रुपये बजटीय प्रावधान किया गया,  उसके बाद भी आदिवासी व दलित मनरेगा मजदूरों को समय पर मजदूरी भुगतान से वंचित रखा जा रहा है. एक साजिश के तहत मनरेगा मजदूरों को अधिकारों से वंचित किया जा रहा है.

ये थे मौजूद

सभा को कन्हाई सिंह, सेलेस्टीन कुजूर, मिथिलेश कुमार, जितेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, नन्हकू सिंह, राहुल अमर दयाल सिंह, विष्णु, नगिना बीबी, सुखमणी कुवंर, मनोज सिंह, जनवा देवी, दिनेश सिंह सहित सैकड़ों मनरेगा मजदूरों ने भाग लिया और अपनी बतों को रखा. कार्यक्रम का संचालन लाल बिहार सिंह ने किया.

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