साहिबगंज : सदर अस्पताल के लापरवाही की भेंट चढ़ा नवजात, पूरे मामले से सीएस बचते नजर आये

Submitted by NEWSWING on Tue, 01/09/2018 - 16:12

 Sahebganj : झारखंड के सदर अस्पतालों में लापरवाही के मामले अक्सर देखने को मिलते हैं. जो मरीजों की जान पर अक्सर भारी पड़ जाता है. खासकर गर्भवती महिलायें इसकी भुक्तभोगी ज्यादा होती हैं. जिन्हें या तो अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है या फिर नवजात की जान पर बन आती है.ऐसा ही मामला साहिबगंज में भी सामने आया है. जिसमें सदर अस्पताल के डॉक्टर्स की लापरवाही बतायी जा रही है क्योंकि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर अक्सर गायब रहते हैं.

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क्या है पूरा मामला

दरअसल मंगलवार की सुबह जिले के सदर प्रखंड के छोटी कौदेरजना गांव की राजश्री देवी (32वर्ष) को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनो ने साहेबगंज सदर अस्पताल में भर्ती करवाया. प्रसूता के भाई राजेश यादव ने बताया की करीब साढ़े आठ बजे बहन को उसने भर्ती कराया. साथ ही बताया कि सुबह के नौ बजे बहन का प्रसव ड्यूटी पर तैनात एएनएम कांति कुमारी व नीलिमा टोपनो ने कराया. लेकिन बच्चे के जन्म के बाद ही एएनएम ने कहा कि नवजात की हालत ठीक नहीं है और इसे डॉक्टर को  दिखाना होगा. इससे आगे राजेश ने बताया कि यह सुनकर वह सभी घबरा गये, लेकिन उस वक्त अस्पताल में एक भी डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद नहीं था. फिर स्थिती को देखते हुए हम नवजात को लेकर अस्पताल के ही एक डॉक्टर महमूद आलम के निजी क्लिनिक लेकर गये. मगर वहां भी स्थिती कुछ अगल नहीं थी. एक घंटा से ज्यादा इंतजार के बावजूद भी डॉक्टर ने नवजात को नहीं देखा. फिर वापस सदर अस्पताल लाकर नर्स ने उसे ऑक्सीजन लगाया और फिर तुरंत कह डाला कि नवजात की मौत हो गयी है.     

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सीएस ने मामले से बचते नजर आये  

इस घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल प्रबंधक के खिलाफ अपना गुस्सा दिखाते हुए हंगामा किया. वहीं इस बारे में जिले के सिविल सर्जन बी मरांडी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि प्रसूता को आखिरी वक्त में अस्पताल लाया गया था और उसके पंद्रह मिनट बाद ही प्रसव कराया गया. साथ ही उन्होंने कहा कि जन्म लेते ही नवजात की मौत हो गयी. लेकिन फिर भी इसे वेरीफाई करने के लिए उसे निजी क्लिनिक में ले जाया गया. हालांकि जब सीएस से डॉक्टर के ड्यूटी से गायब रहने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसपर टालमटोल रवैया अपनाते हुए कहा कि मामला मेरे संज्ञान में अब आया है और जल्दी ही इसकी    होने जांच करवा ली जायेगी.

जबकि परिजनों का साफतौर पर कहना है कि यदि अस्पताल में उस वक्त ड्यूटी पर डॉक्टर तैनात होते तो आज नवजात जिंदा होता. लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने अपनी लापरवाही छुपाने के लिए यह तर्क दिया कि जन्म लेते ही नवजात की मौत हो गयी.इसके अलावा परिजनों ने यह सवाल भी उठाया कि यदि जन्म लेते ही नवजात की मौत हो गयी थी तो उसे नर्स के द्वारा ऑक्सीजन क्यों लगाया गया.       

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