साहिबगंज : जिले में धड़ल्ले से जारी है प्रतिबंधित पॉलीथिन का कारोबार, विभाग मौन

Publisher NEWSWING DatePublished Sun, 05/06/2018 - 15:45

झारखण्ड में पूर्णतः प्रतिबंधित है पॉलीथिन, पड़ोसी राज्यों से लाकर खपाया जाता है पॉलीथिन

Sahibganj : जिले में एक बार फिर से पॉलीथिन की खरीद बिक्री धड़ल्ले से दुकानों में शुरू है. जिसपर संबंधित विभाग अब तक अंकुश नहीं लगा पाई है. जनवरी माह के शुरुआत में नगर परिषद एवं जिला प्रशासन की ओर से अभियान चलाकर पॉलीथिन की खरीद-बिक्री, आदान प्रदान करने वालों पर सख्ती बरतते हुए जुर्माना भी वसूला गया था. लेकिन कुछ ही दिनों बाद शहर में फिर से पॉलीथिन की खरीद बिक्री, इस्तेमाल दुकानों में बेझिझक शुरू है. वहीं थर्मोकोल के बने प्लेट कटोरे सहित अन्य एवं प्लास्टिक के ग्लास बाजारों में धड़ल्ले से बिक रहे हैं. जो हमारे जिले प्रदेश सहित धरती को प्रदूषित कर रहा है. पॉलीथिन सहित थर्मोकोल के प्लेट कटोरे, प्लास्टिक के ग्लास कटोरे पड़ोसी राज्य बिहार और बंगाल से व्यापारी लाकर जिले में धड़ल्ले से खपा रहे हैं. इन सबके प्रयोग से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, कैंसर जैसी बीमारी होती है. पर्यावरण प्रदूषित होता है. धरती बंजर हो रही है. नदियां भी प्रदूषित हो रही है. प्रदेश में पूर्णतः प्रतिबंध के बावजूद पॉलीथिन की खरीद-बिक्री जिले के ज्यादातर दुकानों में धड़ल्ले से बेझिझक जारी है. शहर के चौक बाजार, कॉलेज रोड, बाटा रोड, जिरवाबाड़ी पुलिस लाइन, सकरुगढ़ पूर्वी फाटक, सब्जी मंडी, हटिया, एलसी रोड, रसूलपुर दहला, फल बाजार, मछली मार्केट, मीट मार्केट, मिठाई दुकान, स्टेशन रोड, नास्ता दुकान, कॉस्मेटिक दुकान, गिफ्ट दुकान सहित कई कपड़े के दुकानों, जूता-चप्पल के दुकानों में धड़ल्ले से पॉलीथिन का इस्तेमाल किया जा रहा है.

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ग्राहक ठोंगा में नहीं लेना चाहते हैं सामान, पॉलीथिन की करते हैं मांग

कई दुकानदारों ने कहा कि जिलेवासी कागज के बने ठोंगा में सामग्री नहीं लेते हैं, पॉलीथिन देने की मांग करते हैं. मजबूरन हमलोगों को उंचे कीमत पर संबंधित व्यापारियों से पॉलीथिन लेनी पड़ती है और ग्राहकों को पॉलीथिन में सामग्री देनी पड़ती है.

वहीं नगर परिषद सिटी मैनेजर शशि प्रकाश ने कहा कि जल्द ही पॉलीथिन का इस्तेमाल करने वाले दुकानदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. जुर्माना भी वसूला जाएगा.

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पॉलीथिन से मानव जीवन एवं पर्यावरण को नुकसान : वैज्ञानिक डॉ रंजीत

वहीं वैज्ञानिक डॉ रंजीत कुमार सिंह ने कहा कि पॉलीथिन, थर्मोकोल सहित प्लास्टिक निर्मित सामान मानव जीवन एवं पर्यावरण को हानि पहुंचाता है. साथ ही साथ गंगा पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है. जिलेवासी सहित समस्त भारतीय पॉलीथिन, थर्मोकोल से निर्मित बर्तन, प्लास्टिक के ग्लास इत्यादि का प्रयोग न करें. पर्यावरण को हरा भरा एवं स्वच्छ निर्मल रखें.

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